अब भ्रष्टाचार का इलाज जरूरी, करीब 1000 करोड़ के टेंडर घोटाले में, यादव सिंह फिर गिरफ्तार।

नई दिल्ली। देश में प्रतिवर्ष कितना भ्रष्टाचार होता है तथा भ्रष्टाचार के बाद जिसने भ्रष्टाचार किया उससे कितनी रकम रिकवर की जाती है इसका हिसाब रखने के लिए सरकार को अब एक नए विभाग और मंत्रालय की स्थापना करनी चाहिए क्यो की जिन पैसों का दुरुयोग कर भ्रष्टाचार किया जाता है और करोड़ों कि काली कमाई की जाती है वह सारा के सारा धन जनता का है। करोड़ों के भ्रष्टाचार एक मामला 2014 में सामने आया था मामला था 9 निजी फर्म को लाभ पहुंचाने काउक्त मामले में करीब एक हजार करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले में फंसे नोएडा के पूर्व मुख्य अभियंता यादव सिंह की मुश्किलें अब बढ़ती नज़र आ रही है। सोमवार को सीबीआई, दिल्ली की टीम ने विशेष अदालत में तारीख से लौटते समय परिसर से गिरफ्तार कर लिया। साथ में मौजूद पत्नी ने इसका विरोध किया तो सीबीआई के अधिकारी कई मामलों में पूछताछ की बात कहकर ले गए।

नोएडा टेंडर घोटाले के मुख्य अभियुक्त यादव सिंह कुछ माह पहले ही उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने पर डासना जेल से बाहर आए थे। सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत में उनके मामले में तारीख थी। यादव सिंह अपनी पत्नी कुसुमलता सिंह के साथ अदालत आए थे। वे पहली मंजिल पर अदालत में तारीख पर गए। अधिवक्ताओं की हड़ताल होने के कारण सुनवाई नहीं हुई। अदालत में हाजिरी लगाने के बाद वह पत्नी व कुछ अन्य लोगों के साथ नीचे उतरकर वापस जाने लगे। तभी परिसर में मौजूद सीबीआई के एएसपी राजेश चहल की टीम ने यादव सिंह को हिरासत में लेकर कार में बैठा लिया और लेकर जाने लगे। यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता ने पति के ले जाने के बारे में पूछा तो सीबीआई टीम ने कहा कि यादव सिंह के खिलाफ घोटाले के कई मामलों में विवेचना अभी चल रही है। उनसे पूछताछ की जानी है। पूछताछ के बाद विशेष अदालत में कोर्ट में पेश किया जाएगा।

2014 में सीबीआइ ने पहली बार की छापेमारी

बता दें कि नवंबर 2014 को सीबीआइ ने पहली बार यादव सिंह के घर छापेमारी की थी। इसके बाद फरवरी 2015 को यूपी सरकार ने उन्हें निलंबित कर मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। जुलाई 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने 954.38 करोड़ रुपये के घोटाले के संबंध में अगस्त 2015 को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया था। वहीं, इन मामलों में यादव सिंह व उसके परिवार के सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट से अक्टूबर 2019 में जमानत मिल चुकी है।

9 निजी फर्म को लाभ पहुंचाने का आरोप

आरोप है कि वर्ष 2007 से 2012 के बीच यादव सिंह नोएडा प्राधिकरण में मुख्य अभियंता के तौर पर तैनात था। इस बीच उसने 29 निजी फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये के टेंडर स्वीकृत किए। इनमें कई फर्म ऐसी थी, जोकि उसके परिवार के सदस्यों और दोस्त संजय कुमार के नाम रजिस्टर्ड थी। आरोप है कि यादव सिंह ने फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए उन्हें गलत तरीके से टेंडर जारी किए थे। इस मामले में सीबीआइ की दिल्ली ब्रांच ने हाईकोर्ट के आदेश पर 17 जनवरी 2018 को यादव सिंह, संजय कुमार समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

उधर, सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने वर्ष 2018 में भी यादव सिंह के खिलाफ एक घोटाले का मुकदमा दर्ज किया था। यमुना एक्सप्रेस वे के अलावा नोएडा स्टेडियम के निर्माण के  घोटाले का भी मामला है। सूत्र बताते हैं कि संभवत: इन मामलों में ही पूछताछ के लिए सीबीआई दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की टीम गिरफ्तार क रके ले गई है। बता दें कि यादव सिंह के खिलाफ नोएडा में वर्ष 2012 में हुए करीब एक हजार करोड़ के नोएडा टेंडर घोटाला, भूमिगत केबिल धोटाला और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मुकदमा दर्ज है। ईडी कोर्ट में लखनऊ में एक मुकदमा लखनऊ में चल रहा है। सीबीआई ने मुकदमा दर्ज करने के बाद पहली बार यादव सिंह को 15 फरवरी 2016 में गिरफ्तार करके जेल भेजा था। तभी से लगातार जेल में थे। करीब तीन माह पहले जमानत पर छूटे थे।

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