भ्रष्टाचार, घोटाले और जांच के मामलो में, प्रधान मंत्री कार्यालय का अजीबों-गरीब जवाब!

PMO 003 RTI
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शायद ही देश में ऐसा कोई राज्य, शहर और गांव हो जहा भ्रष्टाचार ना हो, शायद ही ऐसी कोई सरकार हो जिसके कार्यकाल में उस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप ना लगे हो। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी भ्रष्टाचार मुक्त भारत पर कई भाषण दे चुके है, आपने भी कई भाषण यूने होंगे। भ्रष्टाचार मुक्त भारत पर, प्रधान मंत्री मोदी, देश को कई सपने दिखा चुके है, देश आज भी सपना देख रहा है की जल्द भारत एक, भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनेगा। लेकिन कैसे? यह सवाल इस लिए क्यो कि, भ्रष्टाचार, अनियमितता, घोटाले और जांच के विषय में प्रधान मंत्री कार्यालय तथा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को जनता द्वारा की गई शिकायतों के बारे में प्रधान मंत्री कार्यालय से जानकारी मांगी गई, तो प्रधान मंत्री कार्यालय से एक ऐसा जवाब मिला, जिसे देखकर लगता है की प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जनता को भ्रष्टाचार मुक्त भारत का दिखाया गया सपना, वास्तव में एक सपना ही है।

आरटीआई एक्टिविस्ट चिन्टु मांगिलाल जैन द्वारा दिनांक : 07-08-2018 को सूचना के अधिकार के तहत प्रधान मंत्री कार्यालय से जानकारी मांगी गई की 2014 से 2018 तक, अनियमितता तथा घोटालो के विषय में, प्रधान मंत्री कार्यालय तथा प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को कुल कितनी शिकायते मिली, कुल कितने मामलो में भ्रष्टाचार तथा घोटालो की जांच हेतु पत्र अग्रेषित किए गए, कितने मामलो में भ्रष्टाचार तथा घोटालो की जांच हेतु शिफारिश की गई, कितने मामलो में भ्रष्टाचार तथा घोटालो की जांच कारवाई गई तथा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी एवं प्रधान मंत्री कार्यालओ को, सीबीआई जांच करवाने हेतु कुल कितने मामलो में शिकायते प्राप्त हुई?

दिनांक : 29-08-2018 को उक्त सभी मामलो और सवालों का जवाब यह मिला की, प्रधान मंत्री कार्यालय के जनता प्रभाग के कंप्यूटीकृत रिकार्ड में दर्ज़ पत्रों का विवरण निकालने के लिए, भेजने वाले का नाम, पता तथा दिनांक देना आवश्यक है, इसके अभाव में सूचना निकालना संभव नहीं है, क्योकि रिकॉर्ड व्यक्तिमूलक है ना की विषयमूलक। साफ़ साफ़ शब्दों में कहा जाए तो प्रधान मंत्री कार्यालय का यह कहना है की उनके कार्यालय में, यह जानकारी ही नहीं है की भ्रष्टाचार के मामले में जनता द्वारा कुल कितनी शिकायते आई, कितनी शिकायतों पर कार्यवाही हुई और कितनी शिकायतों पर कार्यवाही बाकी है, प्रधान मंत्री कार्यालय का कहना है की उनके कार्यालय में, विषय के हिसाब से शिकायतों और पत्रों का ब्योरा नहीं रखा जाता। क्या आपको नहीं लगता की इस जवाब ने कई सवालो को जन्म दे दिया है।

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ज्ञात हो की आज़ादी से लेकर अब तक भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा भी रहा है और एक बड़ी समस्या भी। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी भी कई बार भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात कर चुके है, प्रधान मंत्री कई बार यह कह चुके है की भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण उनका सपना है। लेकिन प्रधान मंत्री कार्यालय द्वारा, अनियमितता, भ्रष्टाचार और घोटालो की शिकायतों के संबंध में मिला यह जवाब कही ना कही प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देखे गए भ्रष्टाचार मुक्त भारत के सपने की पोल खोल रहा है, या फ़िर यह कह रहा है की सपने हक़ीक़त में नहीं बदलते, हक़ीक़त को अवश्य सपने में बदला जा सकता है। खेर इस मामले के बाद एक और मामले में प्रधान मंत्री कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मागी गई।

दिनांक 28-09-2018 को सूचना के अधिकार के तहत प्रधान मंत्री कार्यालय से जानकारी मांगी गई कि, भारत देश, भारत के राजयों एवं संघ प्रदेशों में होने वाले जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन, हड़ताल, जैसे मामलो की जानकारी प्रधान मंत्री कार्यालय के किस विभाग / खंड / प्रभाग के जिम्मे है? भारत देश, भारत के राजयों एवं संघ प्रदेशों में होने वाले जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन, हड़ताल तथा संवेदनशील मामलो की जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रधान मंत्री कार्यालय में क्या व्यवस्था है, क्या सयंत्र है, तथा कितने कर्मचारी है?

इन दोनों सवालो को पढ़ने के बाद आपकों तो सवाल समझ में आ ही गया होगा, अगर नहीं आया तो एक बार और पढ़ लीजिए अवश्य समझ में आ जाएगा की हम क्या कहना चाहते है। लेकिन शायद प्रधान मंत्री कार्यालय के अधिकारियों को उक्त सवाल समझ में नहीं आया। इस मामले में प्रधान मंत्री कार्यालय से जो जवाब मिला, वह जवाब जानकार अवश्य ही आपके होश उड़ जाएंगे! प्रधान मंत्री कार्यालय से मांगी गई इस जानकारी के विषय में, प्रधान मंत्री कार्यालय से एक लाइन में यह जवाब मिला है कि मांगी गई जानकारी अस्पष्ट है और व्यापक प्रकृति की है। आपने यह भी पढ़ा की प्रधान मंत्री कार्यालय से क्या सूचना मांगी गई और अपने यह भी पढ़ा की प्रधान मंत्री कार्यालय द्वारा क्या जवाब मिला। यदि आपकों अब भी समझ में नहीं आया तो आप अवश्य ही प्रधान मंत्री कार्यालय में काम करने की क़ाबिलियत रखते है और यदि आपको संझमे आ गया तो अपने आप में सवाल करना शुरू कर दीजिए की उक्त सवाल और सवाल का सही और पूरा जवाब आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है।

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आज़ादी से लेकर अब तक शायद ही ऐसा कोई राज्य या शहर हो जहां जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और हड़ताल ना हुई हो। शायद ही ऐसा कोई वर्ष हो जब जनता ने सरकार के खिलाफ़, जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और हड़ताल ना की हो और शायद ही कोई ऐसी सरकार हो जिसने जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का सामना ना किया हो।

लोकतंत्र में, सरकार के प्रति, सरकार के काम-काज़ के प्रति और सरकार की कार्यप्रणाली के प्रति नाराज़गी जाहीर करने के लिए, जनता समय समय पर जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और हड़ताले करती रही है। जनता इसी उम्मीद में जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और हड़ताल करती है की इससे वह अपने मन की बात और मांग दोनों को, सरकार तक पहुंचा पाएगी। लेकिन यदि भारत के सबसे महत्वपूर्ण और प्रमुख मंत्रालय, कार्यालय, यानि प्रधान मंत्री कार्यालय के पास जनता की नाराज़गी दर्ज़ करने का कोई संसाधन, विभाग, प्रभाग ही नहीं है, तो जनता की बात प्रधान मंत्री तक कैसे पहुँचती होगी, यह एक यक्ष प्रश्न है। क्या जनता द्वारा किए गए जन आंदोलन का सरकार के लिए कोई अर्थ नहीं? क्या विरोध प्रदर्शन और हड़ताल से सरकार पर कोई असर नहीं पड़ता? लगता तो यही है, क्यो की अर्थ और असर दोनों शब्दों को साक्षात्कार की आवश्यकता पड़ती है और जब साक्षात्कार ही क़ब्र में दफन कर दिया गया हो तो फ़िर दोनों का अर्थ भी कफ़न में लिपटा दिखाई देता है।