इन दोनों संध प्रदेशों में नियम-कानून का नहीं प्रशासक का राज चलता है!

वफादारी से बड़ा भय होता है यह इस मामले को देखकर पता चलता है! | Kranti Bhaskar
Praful patel daman

संध प्रदेश दमन-दीव में जब से प्रशासक पद पर, प्रफुल पटेल कि नियुक्ति हुई है, तब से दमन-दीव व दानह में कई प्रकार कि उथल-पुथल देखने को मिली, अब इस उथल-पुथल से जनता को फाइदा होगा या नहीं यह तो समय ही बताएगा। लेकिन इस उथल-पुथल के चलते प्रशासन द्वारा जारी कई आदेश अब सवालो के घेरे में आते नज़र आ रहे है केवल इतना ही नहीं दमण-दीव व दादरा नगर हवेली प्रशासन द्वारा जारी कई आदेश तो ऐसे साबित होते दिखाई दे रहे है की जिसके सामने भारत सरकार भी शर्मिंदा हो जाए, वैसे मामला केवल एक आदेश का नहीं बल्कि ऐसे दर्जनों आदेशों का है जिनके आगे केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश निर्देश और नोटिफिकेशन मानों सभी रद्दी साबित हो गए हो, आखिर यह कैसे हुआ कब हुआ और क्यो हुआ यह तो सवय अपने आप में एक जांच का विषय है।

वैसे इस बार जो मामला सामने आया है वह जानने से पहले यह जान लीजिए, कि दमण-दीव व दादरा नगर हवेली प्रदूषण नियंत्रण समिति के किस पद पर, किस अधिकारी को नियुक्त करना है तथा किस पद के लिए अधिकारी की योग्यता / श्रेणी क्या होनी चाहिए, यह सभी स्पष्ट शब्दो में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा दिनांक 17 दिसंबर 2004 को जारी नोटिफिकेशन में लिखा है। उक्त नोटिफिकेशन दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति की वेबसाइट पर आज भी मौजूद है। वैसे तो उक्त नोटिफिकेशन में दमण-दीव व दानह पीसीसी के तमाम पदो पर नियुक्ति के संबंध में जानकारी दी गई है, लेकिन हम मुख्य दो पदो पर बात करते है और वो दो मुख्य पद है पीसीसी के अध्यक्ष का तथा सदस्य सचिव का।

पर्यावरण संबन्धित मामलों में तथा उधोगों के प्रदूषण के मामलो में सदस्य सचिव तथा अध्यक्ष द्वारा ही अधिकतर फाइले पास की जाती है। यदि सीधी सीधी भाषा में कहे तो उक्त दो पदो पर नियुक्त अधिकारी की कार्यप्रणाली तय करती है की हमे कैसे पर्यावरण में सांस लेंगे। पीसीसी अध्यक्ष पद के बारे में नोटिफिकेशन में लिखा है की पीसीसी के अध्यक्ष पद पर, वन एवं पर्यावरण सचिव को पीसीसी का अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए तथा पीसीसी सदस्य सचिव पद के बारे में नोटिफिकेशन में लिखा है की वन संरक्षक को पीसीसी सदस्य सचिव पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए। लेकिन लगता है दमण-दीव व दानह प्रशासन द्वारा जारी आदेशों ने उक्त नोटिफिकेशन को रद्दी में बदल दिया। अब नोटिफिकेशन के वीरुध जाकर किसी अधिकारी की उस पद पर नियुक्ति करने का अधिकार यदि प्रशासक के पास है तो फिर केंद्र सरकार को नोटिफिकेशन जारी करने की आवश्यकता ही क्यो होती? इसमे कोई दो राय नहीं की नियुक्ति मामले में बड़ी अनदेखी हुई है लेकिन इस बड़ी अनदेखी के पीछे कोनसा बड़ा मकसद छिपा है इस पर से पर्दा उठना अभी बाकी है।

  • आम आदमी अगर एक ट्राफिक सिग्नल भी तोड़ देता है तो उसे भी दण्ड दिए बिना नहीं छोड़ा जाता, ऐसे में अब इस मामले में कानून तोड़ने वाले अधिकारियों को सरकार दण्ड देगी?
  • पालनीकान्त के समय में भी हुई थी यही गलती, जिसे अब तक माफ़ी मिली हुई है, क्या जनता की गलतियाँ भी माफ़ करेगी प्रशासन?

नोटिफिकेशन की अवमाना का मामला सबसे पहले तब सामने आया, जब दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव पद पर (उप वन संरक्षक) पलनिकान्त (आई-एफ-एस) को नियुक्त किया गया, उप वन संरक्षक पलनिकान्त ने बतौर सदस्य सचिव पीसीसी में सदस्य सचिव पद पर लम्बे समय तक कार्य किया और कई फाइले पास की। लेकिन पूर्व में जब नोटिफिकेशन की अवमानना के मामले को क्रांति भास्कर हिन्दी समाचार पत्र द्वारा उजागर किया गया, तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति एवं वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से इस मामले में शिकायत कि गई, तब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति ने क्रांति भास्कर की खबर पर संज्ञान लिया और दिनांक 19-05-2014 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति ने पत्र संख्या B-12015/60(83)/2014-AS/1300 में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के नोटिफिकेशन की अवमाना को लेकर, दमन-दीव प्रदूषण नियंत्रण समिति से इस मामले में जवाब मांगा कि क्या वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन की अवमाना हुई है? जब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति के किसी पत्र का जवाब दमण-दीव पीसीसी द्वारा नहीं दिया गया तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा दिनांक 20-10-2014 को पुनः पत्र संख्या ZOW/TECH-505-PC/GEN/2014-15/475 में दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति से वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के नोटिफिकेशन की अवमानना को लेकर जवाब मांगा।

  • दमण-दीव व दानह के होनहार अधिकारी तो केंद्रीय प्रशासन को भी गुमराह कर करने में अव्वल।
  • दमण-दीव व दानह प्रशासन द्वारा जारी आदेशों के सामने केंद्रीय प्रशासन द्वारा जारी नोटिफिकेशन भी रद्दी साबित!
  • किसका हुआ नुकसान किसको मिला लाभ, अब सीबीआई जांच करे।
  • जब पीसीसी के सदस्य सचिव की नियुक्ति ही सवालो के घेरे में है तो उक्त सदस्य सचिव द्वारा खेमानी डिस्टलरी को दिया गया कनसंट कैसे वैध हो सकता है?
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति के संज्ञान के चलते दमन-दीव व दानह के प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले तो दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति के पद पर नियुक्त, उप वन संरक्षक पालनीकान्त का तबादला किया, उसके बाद वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव पद पर, वन संरक्षक डेबेन्द्र दलाई को नियुक्त किया, इसके बाद बड़ी चालाकी से दिनांक 21-11-2014 को पत्र संख्या PCC/DMN/CMJ/2014-15/1050 में, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा नोटिफिकेशन की अवमानना के नामले में पूछे गए सवाल का उत्तर दिया कि दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव पद पर इस वक्त जो अधिकारी नियुक्त है वह वन संरक्षक है तथा नोटिफिकेशन के अनुसार है। फिर क्या था इस गोल-मटोल तथा भ्रमित करने वाले जवाब के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया और इस पूरे मामले में नोटिफिकेशन की अवमानना तथा बार बार बरती गई अनियमितताओं की तमाम जानकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को मिलने के बाद भी जब दमन-दीव प्रशासन के अधिकारियों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई तथा नोटोफिकेशन की अवमानना करने वाले किसी अधिकारी को कोई दण्ड नहीं दिया गया तो आगे भी कोई दण्ड नहीं दिया जाएगा यह मान कर, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के नोटिफिकेशन की अवहेलना बदस्तूर जारी रही और पुनः वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति की रचना के संबंध में जारी नोटिफिकेशक की अवमानना करते हुए, दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति का विभाजन कर दिया।

अब जानिए कैसे कैसे और कितनी बार हुई नोटिफिकेशन की अवमानना, दिनांक 21-11-2016 आई-एफ-एस अधिकारी डेबेन्द्र दलाई ( वन संरक्षक ) से पीसीसी सदस्य सचिव का प्रभार ले लिया गया और दिनांक 21-11-2016 आई-एफ-एस अधिकारी ( मुख्य वन संरक्षक ) ओ-वी-आर रेड्डी को दमन पीसीसी सदस्य सचिव का प्रभार दिया गया। वही दादरा नगर हवेली के प्रशासक मधुप व्यास के कार्यकाल में तथा दानह प्रशासन द्वारा दिनांक 30-11-2016 को आई-ए-एस अधिकारी उमेश त्यागी को दानह पीसीसी के अध्यक्ष का प्रभार दिया गया तथा 30-11-2016 आई-एफ-एस अधिकारी डेबेन्द्र दलाई (वन संरक्षक) को दानह पीसीसी सदस्य सचिव का प्रभार दिया गया। यह ऐसा समय था जब प्रशासन के आदेशों के अनुसार दमण-दीव पीसीसी सदस्य सचिव अलग था तथा दानह पीसीसी सचिव अलग, जबकि दिनांक 17 दिसंबर 2004 को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार दमण-दीव व दानह पीसीसी का सदस्य सचिव किसी एक अधिकारी को ही होना चाहिए, लेकिन दोनों प्रदेशों के बटवारे और बंदरबांट के चलते दिनांक 17 दिसंबर 2004 को जारी नोटिफिकेशन एक रद्दी के कागज़ में बदल गया गया।

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इसके बाद दिनांक 30-12-2016 को दानह प्रशासक का प्रभार प्रफुल पटेल को मिला। दानह प्रशासक पद पर प्रफुल पटेल की नियुक्ति होने से पहले तत्कालीन प्रशासक मधुप व्यास के कार्यकाल में एक समय ऐसा भी था जब दो आई-ए-एस अधिकारी पीसीसी अध्यक्ष होने का दावा कर रहे थे जिनमे एक दानह के तत्कालीन विकास आयुक्त उमेश कुमार त्यागी तथा दूसरे दमण-दीव के आई-ए-एस जे बी सिंह, लेकिन जब दानह प्रशासक पद का प्रभार भी दमण-दीव प्रशासक प्रफुल पटेल को दे दिया गया तब दमन-दीव व दानह प्रशासक प्रफुल पटेल द्वारा 16-03-2017 को आई-ए-एस उमेश त्यागी को दमन-दीव व दानह पीसीसी का अध्यक्ष नियुक्ति कर दिया गया, फिर क्या था दमण-दीव व दानह प्रशासन द्वारा जारी एक के बाद एक आदेश, केंद्रीय प्रशासन द्वारा नोटिफिकेशन की अवमाना करते रहे। दिनांक 16-08-2017 को एक बार फिर दमण-दीव प्रशासन ने आदेश जारी कर आई-एफ-एस रेड्डी को दमन-दीव पीसीसी के सदस्य सचिव से हटा दिया गया।16-08-2017 को आई-एफ-एस दलाई को दानह पीसीसी के सदस्य सचिव से हटा दिया गया और दमण-दीव पीसीसी सदस्य सचिव पद पर आई-ए-एस संदीप कुमार को नियुक्त कर दिया तथा दादरा नगर हवेली पीसीसी सदस्य सचिव पद पर आई-ए-एस अधिकारी गोरव सिंह राजवत को नियुक्त कर दिया गया। इस वक्त भी दमण-दीव पीसीसी के सदस्य सचिव दमण के आई-ए-एस अधिकारी संदीप कुमार बताए जाते है, जबकि नोटिफिकेशन के अनुसार दमण-दीव व दानह पीसीसी सदस्य सचिव के पद पर वन संरक्षक को नियुक्त होना चाहिए।

  • जब अधिकारी की नियुक्ति ही अवैध तो उस अधिकारी द्वारा लिए गए फैसले कैसे वैध समझे जाए प्रशासक महोदय?

अब सवाल यह उठता है की जब नोटिफिकेशन के अनुसार पीसीसी के अधिकारियों की नियुक्ति ही नहीं हुई तो क्या उक्त अधिकारियों द्वारा पीसीसी की फाइलों के संबंध में लिए गए फैसले सही माने जाएंगे? क्यो की नोटिफिकेशन के अनुसार तो अभी भी पीसीसी के सदस्य सचिव पद पर योग्य अधिकारी नियुक्त नहीं है, ऐसे में अभी हाल ही में दिनांक 17-04-2018 को खेमानी डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड को पर्यावरण मंजूरी देने के मामले में जन सुनवाई रखी गई थी, तो क्या इस जन सुनवाई को सही माना जाए या नहीं यह सवाल भी अब फन उठाए खड़ा है, इतना ही नहीं दिनांक 27-07-2017 को खेमानी डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड को दमण–दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा एक कनसंट दिया गया था उक्त कंसट देने वाले अधिकारी की नियुक्ति भी नोटिफिकेशन के अनुसार अयोग्य है तो क्या उक्त कनसंट भी अवैध माना जाएगा?

सवाल कई है लेकिन जवाब तो वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास ही होगा क्यो की उसी को पता है की नोटिफिकेशन की अवमानना करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्यवाही होनी चाहिए तथा नोटिफिकेशन के अनुसार अयोग्य अधिकारी द्वारा जारी कनसंट का क्या औचित्य होना चाहिए, इस मामले में खेमानी डिस्टलरी के कनसंट तथा पर्यावरण मंजूरी के लिए रखी गई जन सुनवाई की बात इस लिए भी की जा रही है क्यो की यह इकाई रेड केटेगीरी में आती है तथा इस इकाई के प्रदूषण से दमण की जनता अत्यधिक परेशान रही है। अब ऐसे में अयोग्य अधिकारी द्वारा इस इकाई की फाइले पास होना, अपने आप में किसी क्षडियंत्र से कम नहीं दिखाई देता।

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इतना ही नहीं पूर्व में खेमानी डिस्टलरी तथा रॉयल डिस्टलरी कई वर्षो तक वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा पर्यावरण संबन्धित नियमो की अनदेखी करती रही है तथा कई वर्षों से पीसीसी कनसंट रिनयू किए बिना शराब उत्पादन करती रही, पूर्व में जब क्रांति भास्कर द्वारा उक्त मामले को उजागर किया गया तब क्रांति भास्कर की खबर पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति के तत्कालीन सदस्य सचिव के निर्देशों पर उक्त इकाई को क्लोज़र देकर इकाई की बिजली काट दी गई थी। लेकिन क्लोज़र मिलने के कुछ ही दिनों बाद इकाई ने पुनः उत्पादन आरंभ करने हेतु स्थानीय प्रशासन से अनुमति प्राप्त कर ली।

  • पर्यावरण मंजूरी देने से पहले वन एवं पर्यावरण मंत्रालय अवश्य इस मामले पर भी ध्यान दे।

फिलवक्त इकाई ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से जो पर्यावरण मंजूरी मांगी है उस पर्यावरण मंजूरी को देने से पहले, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को चाहिए कि वह इस मामले में सवय जांच कर पता लगाए की इस इकाई द्वारा पूर्व में कितनी बार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा बनाए गए नियमो को धतता बताया, तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा पिछले 10 वर्षों में खेमानी डिस्टलरी तथा रॉयल डिस्टलरी को जारी निर्देशों की कितनी बार अवहेलना हुई साथ ही साथ दमण-दीव पीसीसी द्वारा इस इकाई के संबंध लिए गए फेसले और रखी गई मीटिंगे तमाम फाइले भी यदि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी दिल्ली मंगवाकर उनकी जांच करे तो उन्हे यह अवश्य पता चल जाएगा की जिस समस्या से पूरा विश्व जुंझ रहा है उस समस्या को सवय दमण-दीव पीसीसी इजात किए हुए है।

वैसे केवल यह एक विभाग या एक मामला नहीं है जिसमे प्रशासन द्वारा जारी आदेशों पर सवाल उठे हो, दमण-दीव व दानह प्रशासन द्वारा अन्य विभागो के संबंध में लिए गए कई फेसले तथा जारी आदेश भी सवालो के घेरे में देखे गए है, अब ऐसा भी नहीं है की इन तमाम मामलो की जानकारी केवल क्रांति भास्कर के पास ही है लेकिन यह और बात है की जिनके पास उक्त तमाम मामलो की जानकारी है वह खामोश रहकर तमाशा देखने के लिए केवल इस लिए विवश देखे गए क्यो की उन्हे प्रशासन के कोप तथा क्षडियंत्रों से भय लगता है।

ऐसा इस लिए क्यो की इस वक्त दमण-दीव व दानह की जनता के सामने प्रशासन कि एक छवि कुछ ऐसी भी है की जो भी उक्त प्रशासन की कारगुजारियों को जनता के सामने रखेगा, उसे प्रशासन के कोप और क्षडियंत्र का शिकार होना पड़ेगा, अब प्रशासन की ऐसी छवि क्यो है यह तो प्रशासन के वरीय अधिकारी सवय पता लगाए। लेकिन ताज्जुब की बात है की भयभीत रहकर खामोशी से तमाशा देखने वाले अब भी जनता से यही उम्मीद रखते है कि उन्हे ईमानदार समाजसेवी तथा ईमानदार पत्रकार का तगमा मिलेगा, खेर क्रांति भास्कर, प्रशासन की मनमानी पर पहले भी कई बड़े खुलासे कर चुकी है और आगे भी क्रांति भास्कर जन-हित में पत्रकारिता करने के लिए प्रतिबद्ध है क्रांति भास्कर प्रशासन के कोप और क्षडियंत्र से नहीं डरती, क्रांति भास्कर के साथ जनता का विश्वास भी है और भारतीय प्रेस परिषद का पता भी।  शेष फिर।