जबरदस्ती के विकास कार्य से अधिकारी माला-माल, जनता परेशान।

Silvassa
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पिछले कई सालों से सिलवासा को स्मार्ट सिटी बनाने की कोशिश की जा रही है, इस काम में सिलवासा नगर पालिका जी-जान से लगा हुआ है, क्यो कि जितना अधिक विकास होगा उतनी अधिक कमीशन-खोरी होगी? शायद इसी लिए जरूरत ना होने पर भी शहर की 80 प्रतिशत सड़के खोद दी गई है, जनता के मना करने के बाद भी जगह जगह जबरदस्ती पेवर ब्लॉक उखाड़े जा रहे है, पाइप लाइन, टेलीफोन लाइन, गटर लाइन और पता नहीं कितने प्रकार की लाइन बिछाई जा रही है। जिसकी वजह से शहर में इस समय अफरा-तफरी मची हुई है।

बीते तीन चार सालों से सिलवासा नगर पालिका, पेवर ब्लॉक उखाड़ो, पाइप लाइन डालो, अभियान चला रहा है और यह अभियान पता नहीं कितने सालों तक चलता रहेगा, इस जबरा-जबरी के विकास कार्य से भले-ही जनता को परेशानी हो, गड्ढो से दुर्घटना हो जाए, नपा अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को कोई फर्क नहीं पड़ता। इस मामले में कोई कुछ नहीं बोलता यहाँ तक की पूर्व सांसद नटु पटेल और वर्तमान सांसद मोहन डेलकर भी इस मामले में खामोश है, अब यह दोनों नेता चुप क्यो है यह किसी को नहीं पता, शायद यह लोग गुणा-भाग करने में लगे हुए है कि इस मामले में बोलने से फायदा है या चुप रहने से, अब ऐसा इस लिए कहा जा रहा है क्यो की अभी तक जनता ने नेताओं को, बिना फायदे के बोलते हुए नहीं देखा।

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इस संदर्भ में जनता कहती है कि नगर पालिका ने पूरे शहर को गड्ढे में तब्दील कर दिया है, अधिकारी मनमानी कर रहे है और जन प्रतिनिधि उनके हाथ की कठ-पुतली बने हुए है। जल्द ही मानसून आने वाला है और सिलवासा की अंदरूनी सड़के, नगर पालिका ने तोड़ रखी है अब सवाल यह है कि समय कम है तो नगर पालिका सारी सड़के कैसे बनाएगी, कैसे जगह जगह के गड्ढे भरेगी, बरसात में यह सड़के कीचड़मय हो जाएगी, लोग दना-दन गिरेंगे, दुर्घटनाए होंगी उसका जिम्मेदार कौन होगा? सिलवासा के वार्ड नंबर 1 दयात फलिया की खराब और टूटी-फूटी सडक का मामला हो या शहर के किसी भी वार्ड की खस्ता सड़क का मामला हो सभी जगह एक जैसा हाल है।

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लोगो की मांग है कि कम से कम बरसात तक खोदम-खोद रोक दिया जाए ओर सड़के अस्थाई तौर पर जैसी थी वैसी ही बना दी जाए तो शायद जनता भयंकर बरसात के जल जमाव और बरसाती आफत से बच सके। फिलहाल तो हालत ऐसे है कि सिलवासा नगर पालिका एक-दो हफ्ते में ना तो सड़क बना पाएगी, ना ही पाइप लाइन गटर लाइन बिछा पाएगी। अब ऐसे में जनता को मानसून में कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा यह तो मानसून आने पर ही पता चलेगा।