जैव विविधता का संरक्षण जरूरी

जोधपुर। स्थानीय जैव विविधता संरक्षण की विभिन्न तकनीक विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन राज्य वन विभाग द्वारा शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी) के सभागार में किया गया।

इस अवसर पर राज्य वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एनसी जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि वनों का निर्माण झाडिय़ों, छोटे वृक्षों एवं बड़े वृक्षों के स्थान अनेक पादप एवं जन्तु प्रजातियों के संयोग से होता है तथा इसी से जैव विविधता बनती है। जैन ने पश्चिमी राजस्थान की जैव विविधता एवं उनको प्रभावित करने वाले कारकों को बताते हुए इनकी स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में उपयोगिता पर प्रकाश डाला। जैन ने प्रतिभागियों से पश्चिमी राजस्थान की जैव विविधता को पहचानने एवं उनकी उपयोगिता पर जानकारी हासिल करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में आफरी के समूह समन्वयक (शोध) डॉ. इन्द्रदेव आर्य ने जैव विविधता के संरक्षण में आफरी की भूमिका एवं महत्व पर अपने व्याख्यान में आफरी द्वारा किए जा रहे विभिन्न शोध कार्यक्रमों की जानकारी दी। आफरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जी. सिंह ने पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण से पश्चिमी राजस्थान में जैव विविधता का संरक्षण पर अपने व्याख्यान में विभिन्न प्रजातियों एवं उनके आवास तथा लुप्त हो रही प्रजातियों के बारे में व्याख्यान दिया। आफरी की मुख्य तकनीकी अधिकारी संगीता त्रिपाठी ने अकाष्ठ वन उपज प्रजातियों एवं उनके मूल्य संवर्धन एवं उत्पादों पर व्याख्यान दिया।

काजरी के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. सुरेश पोयली ने राजस्थान राज्य एवं जैव विविधता का संरक्षण विषय पर व्याख्यान देते हुए क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न वनस्पतियों एवं उनके औषधीय तथा अन्य उपयोगों पर जानकारी दी। कार्यक्रम में आफरी के क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के बारे में प्रायोगिक जानकारी दी गई तथा पारिस्थितिकी जगत में संकटापन्न प्रजातियों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरूआत में अतिथियों को तुलसी के पौधे भेंट किए गए। उपवन संरक्षक शारदा प्रतापसिंह ने कार्यशाला की उपादेयता पर प्रकाश डाला तथा धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में वन संरक्षक हनुमानाराम, आफरी के वैज्ञानिक डॉ. यूके तोमर, डॉ. एनके बोहरा, उप वन संरक्षक रमेश मालपानी, सहायक वन संरक्षक विकास अरोड़ा, क्षेत्रीय वन अधिकारी नरपतसिंह, माणकलाल सुथार, पूनाराम आदि उपस्थित थे।

 

 

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