जेएनवीयू में छात्रों और संविदाकर्मियों ने किया प्रदर्शन, दो घंटा देरी से शुरू हुई सिंडिकेट बैठक

जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय में शुक्रवार को सिंडिकेट की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान बैठक स्थल के बाहर छात्रों और संविदाकर्मियों ने अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने वहां विवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। इससे वहां काफी देर तक माहौल गरम रहा। प्रदर्शन के चलते 2 घंटे विलंब से सिंडिकेट की बैठक शुरू हुई। इस दौरान लोहावट विधायक एवं सिंडीकेट सदस्य कृष्णाराम सहित अन्य सदस्य दो घंटे तक बैठक के शुरू होने का इंतजार करते रहे।

जेएनवीयू में शुक्रवार को विभिन्न मुद्दों को लेकर कार्यवाहक कुलपति कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीआर चौधरी की अध्यक्षता में सिंडिकेट की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विवि संबंधी कई प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इस दौरान बैठक स्थल के बाहर विवि में ठेका कर्मियों पर लगे युवकों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि करीब तीन महीनों से ज्यादा समय से उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है। वे यहां कई सालों से कार्यरत है। इसके बावजूद उनका वेतन भी स्थायी है। वेतन में बढ़ोतरी और बकाया वेतन की मांगों को लेकर उन्होंने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इन संविदाकर्मियों ने एक दिन पहले भी केंद्रीय कार्यालय में प्रदर्शन किया था। कर्मचारी संघ व सहायक कर्मचारी संघ अध्यक्ष महेंद्र चारण व किशन गुजर ने भी ठेकाकर्मचारियो को जल्द वेतन भुगतान करने व वर्तमान में कार्यरत ठेकाकर्मचारियों को यथावत रखने के लिए भी विवि प्रशासन पर दबाव बनाया।

वहीं छात्रसंघ अध्यक्ष रविंद्रसिंह भाटी के नेतृत्व में भी यहां प्रदर्शन किया गया। उन्होंने छात्रों के साथ मिलकर विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि विवि में प्रशासन अपनी मनमर्जी कर रहा है। छात्र समस्याआें की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रह है। स्थायी कुलपति के अभाव में सारे कार्य अटक गए है। कुलसचिव छात्रहितों को नजर अंदाज कर रहे है। छात्रसंघ अध्यक्ष रविंद्र सिंह भाटी ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अन्य छात्रों के साथ कुलपति कक्ष में कुलपति का घेराव किया। मुख्य मांगों में विवि में प्रवेश से वंचित रहने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश लिंक को पुन: बढ़ी हुई सीटों के साथ शुरू करने के लिए दबाव बनाया। लंबी चर्चा के बाद प्रवेश लिंक को पुन: शुरू करने के साथ ही अधिकांश मांगों पर सहमति बनी।

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