जोधपुर के स्कूल पाँच सितारा होटल से कम नहीं, प्राइमेरी क्लास की फीस भी लाखो में!

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जब गुजरात में स्कूल फ़ीस 27000 से अधिक नहीं ले सकते तो फिर जोधपुर में क्यो लाखों की फ़ीस वसूल रहे है स्कूल प्रबंधन? | Kranti Bhaskar image 1
Bodhi International School

वैसे तो आम तौर पर शिक्षा को सेवा ही कहां जाता है लेकिन अभिभावकों की बढ़ती परेशानी और शिक्षा के नाम पर लाखों की फीस तथा मची-लूट को देखकर अब इसे सेवा कहना शायद सेवा शब्द को शर्मिंदा करना होगा, ऐसा इस ली कहा जा रहा है क्यो कि सेवा के नाम पर जिस प्रकार की वसूली अभिभावकों से की जा रही है वैसी वसूली अब तक किसी और सेवा में देखने को नहीं मिलती!

  • शिक्षा देने के दो मुख्य कारण, गारंटी एक की भी नहीं।

अगर आम जनता की माने तो बच्चो को अच्छी शिक्षा देने के दो मुख्य कारण बताए जाते है एक तो यह की वह अच्छी शिक्षा ग्रहण कर समाज में अपना एक मुकाम हासिल कर सके और दूसरा यह की अच्छी शिक्षा से उन्हे अच्छा रोजगार मिल सके, लेकिन शिक्षा का कोई भी संस्थान एवं स्कूल इन दोनों प्रमुख मामलो में किसी तरह की गारंटी देने को तैयार नहीं दिखाई देता।

  • अभिभावक कृप्या ध्यान दे, फीस से शिक्षा का कोई नाता नहीं!
  • गुजरात में, स्कूल चाहे कितना भी शानदार या आलीशान क्यो ना हो सालाना फ़ीस 27000 से अधिक नहीं ली जा सकती।   

वेसे इस मामले में अच्छी शिक्षा शब्द इस लिए प्रयोग किया गया है क्यो की शिक्षा देने वाले संस्थान अच्छी शिक्षा का दावा कर अभिभावकों से मनचाही फीस वसूते है, जबकि वास्तविकता तो यह है की फीस से शिक्षा का कोई नाता नहीं दिखाई देता, जिन विषयो का अध्यन अधिक फीस वसूले वाले स्कूल कराते है, कम फीस लेने वाले स्कूल भी उनही विषयो का अध्यन कराते है। यदि किसी तरह से एक बार यह मान भी लिया जाए की अधिक फीस लेने वाली स्कुले ही बेहतर शिक्षा दे सकती है तो फिर क्या यह भी मान लिया जाए की कम फीस लेने वाले स्कूल अच्छी शिक्षा नहीं देते? जनता एवं सरकार दोनों को इस मामले में विचार करने की आवश्यकता है।

  • जब गुजरात में स्कूल फ़ीस 27000 से अधिक नहीं ले सकते तो फिर जोधपुर में क्यो लाखों की फ़ीस वसूल रहे है स्कूल प्रबंधन?
  • राजस्थान सरकार की नाकामी का ठीकरा, जोधपुर के अभिभावकों के सिर पर!
  • गुजरात में स्कूल फीस पर लिए गए फेसले की मांग अब जोधपुर में भी।

वैसे शिक्षा और शिक्षा के नाम पर मची-लूट से अभिभावकों को निजात दिलाने के लिए गुजरात सरकार ने कड़े कदम उठाए और विधानसभा में नया कानुन बनाया, जिसके अनुसार सभी प्राइवेट स्कूलों के लिए फीस की सीमा तय की गई, स्कूल फ़ीस के संबंध में गुजरात सरकार द्वारा बनाए गए नए कानून के मुताबिक प्राइमरी स्कूल के लिए अधि‍कतम फीस 15,000 रुपये, सेकंडरी स्कूल के लिए 25,000 रुपये और हायर सेकंडरी स्कूल के लिए 27,000 रुपये से अधिक सालाना फीस नहीं वसूली जा सकती।

प्राइवेट स्कूल कोर्ट गए तो लगा डबल झटका!

जब गुजरात सरकार ने स्कूल फीस को लेकर कानून बनाया तो इसी कानुन के खिलाफ गुजरात के प्राइवेट स्कूलों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। यही नहीं, कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को ये भी आदेश दिया है कि जिन स्कूल ने 2017-18 के शिक्षा सत्र में ज्यादा फीस ली उनकेा अभि‍भावकों को फीस लौटानी होगी, जो स्कूल इस कानून का पालन नहीं करेंगे, उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।

यह मांग अब राजस्थान में भी!

अब स्कूल फीस मामले में, गुजरात सरकार द्वारा लिए गए फैसले के बाद, राजस्थान की जनता द्वारा भी यह मांग हो रही है की जल्द से जल्द राजस्थान सरकार भी गुजरात की तर्ज पर स्कूल फीस के नाम पर चली आ रही लूट पर अंकुश लगाने के लिए गुजरात सरकार द्वारा बनाए गए कानून की तरह राजस्थान में भी नया कानून बनाए।

जोधपुर के स्कूल पाँच सितारा होटल से कम नहीं!

वेसे राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित कुछ एक स्कूलो की फीस की जानकारी क्रांति भास्कर की टिम ने बटोरी है मिली जानकारी को देख कर यही लगता है की जोधपुर में शिक्षा मंदिर के नाम शिक्षा के वो-शॉपिंग मोल चल रहे है जिनमे प्रवेश का अधिकारी केवल पूंजीपतियों को है क्यो की जितनी फीस स्कूल मांग रहे है उतनी फीस देना आम आदमी के लिए लोहे के चने चबाने के बराबर दिखाई पड़ता है। इतना ही नहीं शिक्षा संबन्धित मामलो मे बने नियम अधिनियम को ताख पर रख लाखों की फीस वसूलने वाले स्कूल अब यह भी तय करने लग गए है की बच्चा स्कूल में प्रवेश लेने लायक है या नहीं।

लाखों की फीस देने के बाद भी प्रवेश की गारंटी नहीं, बच्चे के साथ साथ अभिभावकों का भी इंटरव्यू लिया जाता है।

स्कूल में प्रवेश से पहले तथा लाखों की फीस तय करने के बाद स्कूल प्रबंधन कहता है की वह बच्चे तथा अभिभावकों का इंटरव्यू लेगा और तय करेगा की उनका बच्चा इस स्कूल में प्रवेश पाने योग्य है या नहीं अब इसे शिक्षा संबन्धित नियमो की अनदेखी समझे या शिक्षा का अपनाम यह तो जनता एवं सरकार सवय तय करे तो ही बेहतर होगा।

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फ़ीस पूरी लेंगे, गारंटी कुछ नहीं देंगे!

अब जिन स्कूलो की फीस की जानकारी क्रांति भास्कर ने हांसील की है उन स्कूलो एवं फीस की बात करते है। अब तक जोधपुर के केवल 4 स्कूलो की जानकारी क्रांति भास्कर को मिली है उन स्कूलो में सबसे अधिक फीस वसूलने वाली स्कूलो में सबसे ऊपर राजमाता कृष्णकुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल है जिसकी सालाना फीस लगभग 187450 है और वह भी नर्सरी क्लास के लिए, वही बोधी-इंटरनेशल स्कूल की सालाना फीस 148000 है वह भी नर्सरी / प्राइमेरी क्लास के लिए, लकी इंटरनेशन स्कूल में प्राइमेरी के-जी की सालाना फ़ीस 128500 है एवं दिल्ली पब्लिक स्कूल की सालाना फीस 82350 प्राइमेरी क्लास के लिए। अब इतनी फीस वसूलने वाली स्कूलो को यदि पाँच-सितारा होटल ना कहा जाए तो फिर क्या कहां जाए? यह सवाल भलेही सीधा लगता है लेकिन इसका जवाब शायद स्कूल प्रबंधन कभी ना दे पाए।

लाखो की फीस लेंगे लेकिन रोजगार की गारंटी नहीं देंगे!

इस देश के प्रत्येक नागरिग को शिक्षा का अधिकार है सभी शिक्षा संस्थान अच्छी शिक्षा देने का दावा और वादा करते है लगभग सभी संस्थानो में एक ही प्रकार की शिक्षा दी जाती है कोई स्कूल यह दावा नहीं कर सकता की उसकी शिक्षा से बच्चा अवश्य बड़ा अधिकारी या बड़ा व्यापारी बनेगा ना ही यह दावा कर सकता है की उसे अवश्य रोजगार इलेगा, फिर स्कूल फीस में इतनी बड़ी रकम वसूलने का कारण क्या है यह भी अब सवय स्कूल प्रशासन को बताना चाहिए और राजस्थान सरकार को स्कूल फीस की रकम पर लगाम लगाने के लिए नए नियम बानने चाहिए जिससे की अभिभावकों को राहत मिल सके। शेष फिर।

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