जोधपुर के ताज- मेहरानगढ़ किले की अनसुनी कहानी

जोधपुर। नीला शहर जोधपुर, जिसे ‘थार का द्वार’ भी कहा जाता है, मध्यकालीन युग से जुड़े कई किस्से-कहानियां पेश करता है। यहां हर घर, हर नुक्कड़ और हर पर्वत अपने आप में एक ऐतिहासिक प्रासंगिकता की कहानी दर्शाता है। ऐसी ही कई पहली कभी न सुनी गई कहानियों को जीवंत करते हुए, हिस्ट्री टी.वी. 18 का ‘ इंडिया: मार्वल्स एंड मिस्ट्रियस’ दर्शकों को सदियों पुराने काल में ले जाने के उद्देश्य से जोधपुर के ताज- मेहरानगढ़ किले की अनसुनी कहानी लेकर आ रहा है। यह कार्यकम 17 अक्टूूबर को रात 8 बजे दिखाया जाएगा जिसमे राव जोधा द्वारा निर्मित मेहरानगढ़ किले से जुड़े कई अनजाने तथ्यों के बारे में खुलासा होगा। राव जोधा द्वारा निर्मित इस किले से जुड़े कई अनजाने तथ्य उजागर किए जाएंगे। सामरिक महत्व को ध्यान में रखते हुए, ये किला राव जोधा द्वारा बेहद उपयुक्त स्थल पर बनवाया गया था जो शक्ति और प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया। जिन्होंने इस किले को देखा है, वे इस बात को बखूबी समझ सकते हैं कि एक अलग थलग और ऊपर उभरी हुई चट्टान में इस तरह की संरचना का निर्माण कितना मुश्किल रहा होगा। इस एपिसोड में न केवल इतने विशाल किले के निर्माण में आने वाली कठिनाइयों को दर्शाया गया है बल्कि कैसे रणनीतिक रूप से इसे बनवाया गया, ये भी दिखाया गया है जिसे देखकर दर्शक अचंभित हो जाएंगे। इस एपिसोड में एक ऐसे पांरपरिक समुदाय के बारे में गहराई से बताया गया है जिन्हें भारी सामान ढोने में विशेषज्ञता हासिल थी और जिन्होंने सैकड़ों टन चट्टानें उठाकर निर्माण स्थल तक पहुंचाई जिनका इस्तेमाल मेहरानगढ़ किले को बनाने के लिए किया गया। यह कार्यक्रम दर्शकों को प्राचीन दौर में लेकर जाएगा, कई अनजाने तथ्यों का खुलासा करेगा और भारत के कुछ सबसे अनोखे ऐतिहासिक स्थलों, उनके लोगों, इतिहास में उनके स्थान और उनकी कहानियों पर प्रकाश डालेगा।

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