सात दिवसीय नि:शुल्क साफा बांधों प्रशिक्षण शिविर संपन्न, जोधपुरी साफा विश्व में जोधपुर की ओळखाण: सूर्यकांता व्यास

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जोधपुर। सूरसागर विधायक सूर्यकांता व्यास ने कहा कि जोधपुरी साफा विश्व में जोधपुर की खास ओळखाण रखता है। साफा बांधना यूं भी हमारी गौरवशाली संस्कृति का हिस्सा रहा है, हालांकि अब इसका चलन शादी समारोह तथा विशेष अवसर तक सिमट गया है, यही वजह है कि सौ में से बामुश्किल दस लोग भी साफा बांधना नहीं जानते। वे रविवार को भूतनाथ महादेव मंदिर के प्रांगण में मारवाड़ सोशियल मीडिया सहयोग संस्थान के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय नि:शुल्क साफा बांधों प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थी।

विधायक व्यास ने संस्थान द्वारा लगातार दूसरे वर्ष आयोजित शिविर को अनुकरणीय बताते हुए प्रतिभागियों को निरंतर अभ्यास करने तथा अन्य लोगों को भी साफा बांधना सिखाने का आग्रह किया। विशिष्ट अतिथि विख्यात इतिहासविद व राजस्थानी साहित्यकार डॉ. जहूर खां मेहर ने साफा, पाग, पगड़ी व पोतिये के सांस्कृतिक व एेतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कई एेतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया। विशिष्ट अतिथि जनसंपर्क निदेशालय के पूर्व उपनिदेशक आनंदराज व्यास ने कहा कि जोधपुरी कोट की तरह ही जोधपुरी साफे की विशिष्ट पहचान है लेकिन विशेष अवसरों पर साफा बांधने वाले को ढूंढऩा पड़ता है। इस तरह के शिविर युवाओं को फिर परंपरा से जोड़ेंगे। उत्कर्ष संस्थान के एमडी निर्मल गहलोत ने मारवाड़ सोशियल सहयोग संस्थान के इस प्रयास को स्तुत्य बताया तथा प्रतिभागियों से निरंतर अभ्यास में बने रहने का आह्वान किया। वरिष्ठ पत्रकार दिनेश जोशी तथा नारायण कल्ला ने भी विचार व्यक्त किए।

35 लोगों को हुआ सम्मान

समारोह में बुजुर्ग, युवा, महिला व बालिका वर्ग में श्रेष्ठ साफा बांधने वालों सहित कुल 35 प्रतिभागियों, समाजसेवियों तथा संस्थान के सहयोगियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। शिविर में आरजे रैक्स, नीलम मूंदड़ा, अपर्णा मोदी, अरू व्यास, सुमित जोशी, योगेंद्र पुरोहित, रमेश सिसोदिया, सद्दीक, रवि पुरोहित व मनीष जोशी का सम्मान किया गया। प्रारंभ में अतिथियों का पुष्पहार, साफा बांधकर तथा स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन बसंत कल्ला ने किया। संस्थान के सचिव आनंद जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।  मुख्य प्रशिक्षक मनोज बोहरा के साथ सुनील पुरोहित, रमेश सिसोदिया, राहुल बोड़ा, शेरसिंह साफा, मनीष जोशी व कन्हैयालाल पुरोहित ने सहयोग किया। शिविर में सौ से अधिक बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं व बालिकाओं ने जोश के साथ भागीदारी निभाई। कुछ शिविरार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने साफा बांधना सीखकर वैवाहिक सीजन में इसे प्रोफेशन रूप में भी आजमाया।