कल्पसूत्र लाभार्थी व अन्य का हुआ बहुमान

जोधपुर। जिस प्रकार नदी में गंगा नदी पर्वतों में मेरु पर्वत वृक्षों में कल्पवृक्ष मंत्रों में नवकार महामंत्र उसी प्रकार जैनों का सबसे बड़े सूत्रों में महान सूत्र- कल्पसूत्र है। यह उद्गार साध्वी प्रफुल्लप्रभा ने कल्पसूत्र  वाचन का शुभारंभ करते हुए नगर स्थित रत्नप्रभ धर्म क्रिया भवन में कहे।

उन्होंने कहा कि इस सूत्र में समस्त सूत्रों का सार समाया हुआ है एेसे सूत्रों का मन से श्रद्धा पूर्वक श्रवण करने से कई आत्मा तीर गई व तिरती रहेगी। साध्वी वैराग्यपूर्णा ने पयुर्षण पर्व को धर्म जागरण का पर्व व तपस्या को मुक्ति का मार्ग बताया। संघ प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया कि इससे पूर्व लाभार्थी परिवारों द्वारा पांच ज्ञान पूजा विभिन्न सभी भक्तों द्वारा पूजन कर जैनम जयति शासनम के जयकारों के साथ जैनों का महानतम महासूत्र कल्पसूत्र विधि विधान से श्रावक जगदीशचंद्र जैन खांटेड परिवार द्वारा साध्वीवृंद को बोहराया गया। साध्वी ने विधि विधान से कल्पसूत्र का वाचन शुरू किया गया। प्रवचन के दरमयान महावीर पालने का घर पर ले जाने का चढ़ावा लाभ श्रावक संपतराज कैलाशराज मेहता आरके होजरी परिवार द्वारा लिया गया। तपागछ संघ की आेर से कल्पसूत्र लाभार्थी परिवार का बहुमान व आगम समक्ष ज्ञान व प्रभू भक्ति की धूम मचाने वाले चंद्रेश व वैभव मेहता अन्य कलाकारों का भी अभिनंदन किया गया।

मनीष मेहता व विनायकिया ने बताया कि मूर्तिपूजक पर्युषण पर्व के पांचवे दिन प्रवचन के दरमयान 14 सपनाजी के चढ़ावे व साधर्मिक भक्ति के पश्चात महावीर जन्म वाचन का एक अनूठा अनुपम नजारा व महावीर स्वामी का पालना गाजे-बाजे  के साथ क्रिया भवन से वरघोड़ा निकाला जाएगा।

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