घोटाले के भय से जोधपुर में बंद है केरोसिन वितरण, एफ-पी-एस को पूरा अनाज भी नहीं मिलता!

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जोधपुर : राज्य सरकार की ओर से हर महीने जोधपुर जिले को केरोसिन का आवंटन किया जा रहा है, लेकिन जोधपुर का रसद विभाग कार्यालय पिछले ९ महीनों से केरोसिन को हाथ तक नहीं लगा रहा है। कागज में ही केरोसिन आता है और रसद विभाग कागज में ही पूरे के पूरे केरोसिन को वापस सरकार को सुपुर्द कर देता है। रसद विभाग राज्य सरकार को यह कहने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा है कि उसे केरोसिन की जरुरत नहीं है, इसलिए जोधपुर का आवंटन बंद कर दें। इसकी पीछे वजह यह है कि रसद विभाग अब तक शहर व गांवों में गैस कनेक्शनों का सर्वे नहीं कर पाया है। जोधपुर में 2.49 लाख राशनकार्डों पर करीब 3.75 लाख गैस कनेक्शन हैं। केरोसिन में घोटाले के डर से रसद विभाग के अधिकारी झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बेहद गरीब परिवारों के चूल्हे पर भी लात मार रहा है। शहर में ही अकेले हुड़को कॉलोनी में 50 से अधिक परिवार हैं, जो स्टॉव पर खाना पकाते हैं। अब ये लोग लकड़ी और गोबर के भरोसे काम चला रहे हैं।

जुलाई में केरोसिन आवंटन पूरे प्रदेश में बंद कर दिया था

जोधपुर सहित पूरे प्रदेश में केरोसिन की कालाबाजारी की खबरें आने के बाद राज्य सरकार ने जुलाई 2017 में पूरे प्रदेश में केरोसिन आवंटन शून्य कर दिया था। पिछड़े जिलों के विरोध के बाद अगले महीने अगस्त में फिर से वितरण शुरू किया गया। जोधपुर जिले का केरोसिन कोटा घटाया गया, फिर भी हर महीने औसतन 4 लाख लीटर केरोसिन आ रहा है, लेकिन इसका वितरण नहीं हो रहा है। जिले में करीब 9 लाख राशन कार्ड है और 6.50 लाख परिवारों के पास गैस कनेक्शन हैं।

इस गबन का हिसाब अब तक नहीं मिला

जुलाई 2017 से पहले जोधपुर में हर महीने करीब सात लाख लीटर केरोसिन का आवंटन होता था। जोधपुर शहर की बात करें तो यहां रसद विभाग राशन की 270 दुकानों में से प्रत्येक दुकान को बराबर मात्रा में केरोसिन वितरण करता था जैसे शहर के सभी इलाकों में गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यापन करने वाले ही रह रहे हैं। शास्त्रीनगर और सरदारपुरा जैसे पॉश इलाकों के राशन डीलर्स को भी हर महीने 440 लीटर केरोसिन मिलता था और मसूरिया स्थित नट बस्ती और रातानाडा स्थित सांसी बस्ती के डीलर्स को भी 440 लीटर केरोसिन पहुंचता था। सूत्रों के मुताबिक शहर में केरोसिन के अधिकांश होलसेलर राशन डीलर्स को 10 रुपए के हिसाब से केरोसिन का भुगतान कर देते हैं और सीधे टैंकर को ही बाजार में बेच देते हैं। इस मामले की अब तक जांच नहीं हो पाई है। सरकार को इसकी भनक लगने के बाद केरोसिन का कोटा कम कर दिया है, लेकिन आवंटन अभी भी जारी है। कालाबाजारी और गेहूं घोटाले में पहले से फंसे अधिकारियों के डर से रसद विभाग केरोसीन का वितरण नहीं कर रहा है।

राशन दुकानों का बुरा हाल, कही माल गायब तो कही मालिक

कई एफपीएस की दुकाने ऐसी है जो सरकार की कमियो और अधिकारियों की कमाउनीति का खामियाजा उठा रही है, कई एफपीएस का कहना है की जितना माल गोदाम से निकलता है उतने माल का डाटा मशीन पर चढ़ा दिया जाता है लेकिन दुकान पर उतना माल पहुंचता ही नहीं, तो सवाल यह है की वह अनाज कहा जाता है किसे जाता है? इसके आलवे कई एफपीएस की दुकाने ऐसी भी है जिनके मालिक का नाम तो सही है लेकिन शायद डिजिटल इंडिया की किसी भूल के तहत उनके फर्जी मोबाइल नंबर ऑनलाइन उपडेट हो चुके है। राजस्थान सरकार को समय रहते इस मामले में जांच कर, गड़बड़िया करने वाले अधिकारियों को दंडित करने की आवश्यकता है।

पिछले 9 महीने में जोधपुर को मिला केरोसिन

महीना ——–आवंटन ——– वितरण

अगस्त 2017 —– 472 —–0

सितम्बर 2017 —–468—–0

अक्टूबर 2017 —–468 —–0

नवम्बर 2017 —–468—–0

दिसम्बर 2017 —–468 —– 0

जनवरी 2018 —–372 —–0

फरवरी 2018 —–348—–0

मार्च 2018 —– 312 —–0

(केरोसीन की मात्रा किलो लीटर में है।)

बंद नहीं करेंगे, वितरण करेंगे

हम केरोसिन वितरण बंद नहीं करना चाहते, केरोसिन आवंटन और वितरण की जांच कर जरुरतमंद को फिर से केरोसिन देंगे।

जिला रसद अधिकारी जोधपुर