केतन का छोटा भाई जिग्गु जल्द भाजपा में शामिल : सूत्र

संघ प्रदेश दमण-दीव कि राजनीति अब एक नया मोड़ लेती दिखाई दे रही है, अब इस नए मोड़ से दमण-दीव कि जनता को और उधोगों को कितना नुकसान होगा और कितना फाइदा, यह तो वक्त आने पर ही पता चलेगा। वैसे इस नए मोड़ के कुछ नए राजनीतिक मुशाफ़िरों को लगता है कि वह अब इस नए मोड़ के जरिए, अपनी वह महतव्कांशा पूरी कर पाएंगे, जिस पर एक लम्बे समय से मोदी सरकार ने ब्रेक लगा रखा है।

सूत्रों द्वारा जानकारी मिली है कि दमण-दीव कांग्रेस नेता केतन पटेल के छोटे भाई जिग्नेश पटेल उर्फ़ जिग्गु ( फिरौती ) भाजपा में शामिल होने कि तैयारी कर रहे है। वैसे भाजपा उन्हे स्वीकार करती है या नहीं, यह तो समय आने पर पता चलेगा। खेर फ़िलवक्त आपको बता दे कि यह वही जिग्नेश पटेल है जिनके पिता डाहया पटेल कांग्रेस से दमण-दीव के पूर्व सांसद रह चुके है, वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव हार चुके है इतना ही नहीं जिग्नेश पटेल के बड़े भाई केतन पटेल भी कांग्रेस से, 2014 और 2019 का चुनाव हार चुके है और पिछले कुछ समय में जिग्नेश पटेल के भाई केतन पटेल, पिता डाहया पटेल, माता चंचल पटेल पर कई अलग अलग मामले भी दर्ज़ हो चुके है। ऐसे में जिग्नेश पटेल के भाजपा में शामिल होने कि चर्चा, मानों जनता को कई सवाल करने के लिए खुला न्योता दे रही है।

केतन पटेल तलाश रहे है भाजपा के करीब जाने का रास्ता…

जिग्नेश पटेल इससे पहले कभी भी राजनीति में सक्रिय नहीं देखे गए, राजनीति में जिग्नेश पटेल कि सक्रियता जनता ने सिर्फ़ चुनावी मौसम में दिखी। अब ऐसे में अचानक जिग्नेश पटेल के भाजपा में शामिल होने कि चर्चा के पीछे कही डाहया और केतन कि सोची समझी राजनीतिक चाल तो नहीं? अब ऐसा इस लिए क्यो कि डाहया पटेल और केतन पटेल कांग्रेस के नेता है भाजपा का विरोध करते रहे है हालांकि जिग्नेश पटेल भी कांग्रेस के ही नेता है लेकिन जिग्नेश पटेल सक्रिय राजनीति में नहीं रहे इस लिए जिग्नेश पटेल द्वारा भाजपा का उतना विरोध भी देखने को नहीं मिला जितना डाहया और केतन द्वारा देखने को मिला। शायद यही कारण है जिसके चलते डाहया और केतन जिग्नेश को भाजपा में शामिल करवाना चाहते है। दूसरी और केतन पटेल को लेकर भी यह चर्चा है कि वह भी कांग्रेस का दामन छोड़ किसी ऐसी राजनीतिक पार्टी का दामन तलाश रहे है जो उन्हे भाजपा के करीब ले जाए, मतलब कि एनडीए का कोई दल। ताकि समय आने पर वह एनडीए के दल से भाजपा में छलांग लगा सके।

आयकर विभाग कि जांच में जिग्नेश पटेल का नाम भी शामिल।

जिग्नेश पटेल उर्फ़ जिग्गु अब भाजपा में शामिल होना क्यों चाहते है? तो इस सवाल का सीधा जवाब यह है कि जिग्गु पटेल के पिता अब सांसद नहीं है। वर्ष 2009 में जिग्नेश पटेल के पिता डाहया पटेल लोकसभा चुनाव हार गए, बड़े भाई केतन पटेल भी 201Income tax Dahyabhai V Patel family pdf image4 और 2019 लोकसभा चुनाव हार चुके है और जिग्नेश पटेल उर्फ़ जिग्गु के परिवार के सदस्यों पर कई मामले जांचाधीन है तो कई मामले न्यायालय में लंबित है। स्वय जिग्नेश पटेल उर्फ़ जिग्गु का नाम भी कई बार हफ़्ता वसूली जैसे मामलों में आता रहा है। केवल इतना ही नहीं आयकर विभाग भी केतन पटेल तथा केतन पटेल के परिवार के सदस्यों कि संपत्ति को लेकर एक लम्बे समय से जांच कर रहा है और आयकर विभाग कि जांच में जिग्नेश पटेल का नाम भी शामिल है। ( Income Tax Notice Copy Download  ) ऐसे में अब शायद उन्हे यह लगता है कि यदि वह भाजपा में शामिल हो गए तो अपने साथ साथ अपने परिवार के सदस्यों को भी संरक्षण दे सकेंगे और पुनः समाज सेवा के नाम पर अपना गोरख-धंधा निर्विरोध कर सकेंगे।

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आपको बता दे कि कुछ माह पहले जिग्नेश पटेल उर्फ़ जिग्गु के बड़े भाई केतन पटेल के यहां सीबीआई छापा पड़ा था। सीबीआई कि एफआईआर में केतन पटेल कि पत्नी अमी पटेल का नाम भी दर्ज़ है।Ketan Patel CBI FIR RC0262017A0024 pdf image ( CBI FIR  ) इसके अलावे अभी कुछ माह पहले केतन पटेल पर तथा केतन पटेल कि माता चंचल पटेल पर बिज़ली चोरी का एक मामला भी दर्ज़ हुआ था। बिज़ली चोरी का मामला दर्ज़ होने के बाद, केतन पटेल पर दमण कि उधोगिक इकाइयों से हफ़्ता वसूली करने का मामला भी दर्ज़ हुआ था, हफ़्ता वसूली मामले में केतन पटेल कुछ दिनों तक फारार भी रहे, बादमे पुलिस ने केतन पटेल को मुंबई दे गिरफ्तार किया। इस मामले के बाद अभी कुछ समय पटेल केतन पटेल के पिता पर पानी चोरी का मामला दर्ज़ हुआ था।

दरअसल इतने मामले दर्ज़ होने के बाद यह तो तय है कि जिग्नेश पटेल पर भी आगे चलकर जांच कि आंच पहुँचने वाली है और शायद जिग्नेश पटेल को यह लगने लगा है कि मोदी सरकार कभी भी उनका नंबर लगा सकती है, कभी भी उनकी फाइल खोल सकती है, इस लिए जितना जल्दी हो सके, उतना जल्दी शाम-दाम-दण्ड-भेद के जरिए भाजपा में शामिल हो जाए, ताकि आगे चलकर उनके तथा उनके परिवार के सदस्यों पर उड़ने वाले कीचड़ को, मजबूरन भाजपा को अपने ऊपर उड़ता कीचड़ समझना पड़े और वह भाजपा का चोला पहनकर पुनः वही गुल खिलाए जिसके लिए वह यूपीए के दौर से कुप्रषिद्ध है।

Ketan Patel Daman Congress
गिरफ्तारी के बाद वायरल हुआ था यह फ़ोटो। 

वैसे दमण-दीव में आज कांग्रेस जिस परिसतिथी से जुंझ रही है उसके पीछे केतन पटेल और डाहया पटेल का बड़ा हाथ बताया जाता है। जिग्नेश पटेल और केतन पटेल की कुत्सित राजनीति, भाईगीरी और माफियागिरी ही है जिसके चलते दमण-दीव कांग्रेस, आज शिखर से धरातल पर आ गई। अब ऐसे में जिग्नेश पटेल के भाजपा में शामिल होने कि चर्चा कहीं भाजपा के लिए कालिख ना बन जाए। क्यो कि दूध से चाय बनती है, बिना दूध के भी चाय बनती है, लेकिन शराब से चाय नहीं बनती। अब अगर कोई शराब से चाय बनाने का प्रयत्न करे तो उसे क्या कहना चाहिए यह तो जनता भी जानती है और भाजपा के नेता भी। खेर वास्तव में समय आने पर राजनीति कौनसा मोड़ लेती है यह तो समय आने पर ही पता चलेगा।

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यह सब कहीं जादुई चिराग के मालिक तो नहीं?

आपने अलादीन के जादुई चिराग वाली कहानी तो जरूर सुनी होगी। लगता है दमण-दीव के कुछ एक नेताओं को ऐसा ही कोई चिराग ( वीडियो ) मिल गया है। जिसकी मदद से वह भाजपा अध्यक्ष गोपाल टंडेल से अपना मनचाहा काम करवा लेते है। कुछ समय पहले भाजपा नेता विशाल टंडेल का एक वीडियो सामने आया था उस वीडियो में विशाल टंडेल ठुमके लगा रहे थे।

टुकवाड़ा का बड़ा प्रोजेक्ट और काले धन का बड़ा घोटाला, पुराने नोटों की लेन-देन और वो भी करोड़ो में। | Kranti Bhaskar
Gopal Tandel – Daman

उक्त वीडियो सामने आने के बाद विशाल टंडेल से भाजपा उपाध्यक्ष का पद ले लिया गया था, लेकिन कुछ समय बाद विशाल टंडेल को पुनः भाजपा के शीर्ष नेताओं में शामिल कर लिया गया, यह कमाल किसी जादुई चिराग की मदद से ही हुआ होगा। शौकत मिठानी और मुकेश पटेल को डी-एम-सी अध्यक्ष बनाने के पीछे भी किसी ना किसी चिराग का हाथ हो सकता है। याद हो तो कुछ समय पहले भाजपा नेता मुकेश पटेल ने भी गोपाल टंडेल के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला था, बादमे उन्हे डी-एम-सी का अध्यक्ष चुन लिया गया। फिलवक्त दमण में जिग्नेश पटेल को लेकर भाजपा में शामिल होने कि चर्चा चल रही है यदि उस चर्चा में भाजपा अध्यक्ष गोपाल टंडेल कि रजामंदी शामिल है तो फिर इस में कोई दो-राय नहीं कि जिग्नेश पटेल के पास भी वही चिराग है जिसे घिसने से गोपाल टंडेल उसकी हर मुमकिन इच्छाओं को पूरा करने के लिए विवश हो जाते है। वैसे आप सोच रहे होंगे कि यह कौनसा चिराग है? तो समय आने पर इस पर से भी पर्दा उठ ही जाएगा। लेकिन इस सवाल से बड़ा सवाल यह है कि यह चिराग अब और किस किस के पास जाने वाला है और क्या क्या गुल खिलाने वाला है? क्या इसकी पूरी जानकारी भाजपा के शीर्ष नेताओं को है, क्या इसकी पूरी जानकारी दमण-दीव के प्रशासक प्रफुल पटेल को है? यदि उन्हे जानकारी नहीं है तो इस खबर के बाद हक़ीक़त जानने के लिए वह जांच शुरू कर दे। शेष फिर।