खड़गे ने राजस्थान से बनाई दूरी, गहलोत के खुले सपोर्ट के बाद भी क्या हैं नाराज?

कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव सुर्खियों में बना हुआ है। दो दिन बाद होने वाले मतदान के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर आमने-सामने हैं। कर्नाटक, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों का दौरा कर चुके मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर एक दिलचस्प बात यह है कि वे राजस्थान नहीं गए हैं। राजस्थान नहीं जाने के पीछे वजह मानी जा रही है कि वे अभी भी सितंबर के आखिरी में हुए विधायक की बैठक वाले मुद्दे को नहीं भूल पाए हैं, जिसके चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे नाराज हैं? हालांकि, इस कथित नाराजगी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुल कर खड़गे का समर्थन कर चुके हैं, लेकिन आने वाले दो दिनों में भी खड़गे के राजस्थान जाकर वोट मांगने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही। दोनों नेता (खड़गे और थरूर) फोन के जरिए जरूर अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर चुके हैं।

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गहलोत से क्यों नाराज हैं खड़गे? क्या है वह पूरा एपिसोड
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव घोषित हुए तब राहुल गांधी ने चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद गांधी परिवार के करीबी नेताओं में एक रहे अशोक गहलोत का चुनाव लड़ना तय हो गया। लेकिन पिछले महीने उनके करीबी विधायक शांति धारीवाल के घर हुई बैठक ने पूरा गेम बिगाड़ दिया। इसी पूरे एपिसोड से मल्लिकार्जुन खड़गे नाराज बताए जाते हैं।

खड़गे की नाराजगी दूर करने को गहलोत ने किया खुला सपोर्ट?
पिछले दिनों अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए खड़गे के नाम का खुला सपोर्ट कर दिया। इसके लिए उन्होंने चुनाव का प्रोटोकॉल तक तोड़ दिया, जिसके बाद कई नेता उनपर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। गहलोत ने कहा, ”मैं उम्मीद करता हूं जो भी डेलीगेट हैं वो भारी बहुमत से मल्लिकार्जुन खड़गे को कामयाब करेंगे। कामयाब होने के बाद में वो हम सबका मार्गदर्शन करेंगे व कांग्रेस मजबूत होकर प्रतिपक्ष के रूप में उभर कर सामने आएगी‌। यह मेरी सोच है, मेरी शुभकामनाएं है खड़गे साहब भारी मतों से कामयाब हों।” राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके जरिए गहलोत खड़गे की कथित नाराजगी को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं और यहां तक कि वह इसके लिए कांग्रेस की चुनाव गाइडलाइन के खिलाफ भी चले गए। दरअसल, गाइडलाइन के अनुसार, कोई भी नेता अपने पद पर रहते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार का प्रचार या समर्थन नहीं कर सकेगा। अगर कोई ऐसा करना चाहता है तो फिर उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना होगा।