नेताओं एवं भ्रष्ट अधिकारियों पर आयकर विभाग के अधिकारी मेहरबान क्यों? भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति की जानकारी बटोरने में नाकाम आयकर विभाग।

  • केवल बिल्डरों के पीछे आयकर का डंडा, बाकी उक्त विभाग पूरी तरह ठंडा!
  • बिल्डरों के यहां छापे मारी करने के बाद भी बिल्डरों की मनमानी पर कोई अंकुश नहीं,बिना ब्लेक मनी के यहां किसी को आसियाना नसीब नहीं।

आयकर विभाग एवं उक्त विभाग के अधिकारी वैसे तो काले धन और छापे-मारी को लेकर काफी सक्रिय देखे गए, लेकिन कई क्षेत्र एवं मामले ऐसे है जिनके सामने आते ही, उक्त विभाग के सभी अधिकारियों की कार्यप्रणाली शंका के घेरे में आजाती है।

उक्त विभाग की बात की कार्यप्रणाली को लेकर बात करे तो, बिल्डरएवं उधोगपतियों के यहां जमा काले धन को लेकर छापे-मारी करने में यह विभाग कहीं से पीछे नहीं, लेकिन बिल्डर एवं उघोगपतियों के यहां छापेमारी करने वाली यह विभाग, अधिकारियों और नेताओं यहां छापे मारी करने में क्यों चूक कर रही हैयह विचारणीय मामला है।

बताया जाता है दमन-दीव व दानह के साथ साथ वापी वलसाड के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के दम पर काफी काली कमाई जमा कर रखी है, हालांकि दमन-दीव दानह एवं वलसाड जिले के कई अधिकारी समय समय पर कभी जांच एजेंसियों तो कभी एंटी करप्शन ब्यूरो के हत्थे भी चढ़े है। कई मामलों में तो स्वयम सीबीआई ने इनके भ्रष्टाचार की पोल खोली है। ऐसे में उक्त भ्रष्ट अधिकारियों के यहां आयकर विभाग के अधिकारी छापे-मारी करने में क्यों चूक जाते है, यह तो उक्त विभाग के अधिकारी जाने। लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों पर आयकर विभाग की यह महरबानी विचारणीय है वहीं उक्त विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली शंका के दायरे में है। कई मामलों में क्रांति भास्कर ने अपनी खबरों के माध्यम से आयकर विभाग के अधिकारियों की नींद खोलने के प्रयत्न भी किए, निराकरण तो निकला निकला नहीं, नहीं आयकर विभाग के अधिकारियों ने कोई संज्ञान लिया। बल्कि आयकर विभाग सज्ञान ले, इस से पहले उक्त अधिकारियों को सीबीआई ने धर-दबोचा। यह मामला दमन लोक निर्माण विभाग के भ्रष्ट अभियन्ताओं का है, उक्त अभियन्ताओं की अवैध कमाई तथा भ्रष्टाचार को लेकर क्रांति भास्कर ने यहां कई खुलासे किए एवं आयकर विभाग को उक्त अधिकारियों के यहां छापे-मारी हेतु प्रेरित किया, वहीं उक्त विभाग नींद की झपकियों में मश्गूल्ल देखी गई।

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संध प्रदेश दमन-दीव व दानह के साथ साथ वलसाड जिले में कई अधियाकरियों द्वारा भ्रष्टाचार के दम पर बेतहा संपत्ति बताई जाती है, कई मामलों में बताया जाता है उक्त अधिकारियों ने अपने नजदीकी रिशतेदारों के नाम बड़े बड़े खारखने भी डाल रखे है, काइयों का भूमि में निवेश बताया जाता है, तो काइयों बिल्डिंगों में, लेकिन किसी मामले में आयकर विभाग द्वारा अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया। नहीं किसी प्रकार की जांच की शुरुआत देखी गई। आखिरकार उक्त विभाग के अधिकारी केसी रिश्तेदारी निभा रहे है, यह सोचने वाली बात है।

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और जहां तक बिल्डरों के यहां छापे-मारी करने की बात है, तो आयकर विभाग के अधिकारी छापे-मारी में काला धन तो पकड़ लेते है, लेकिन उक्त काले धन के लेन देन में शामिल रेकेट का पर्दाफास नहीं करते। आज भी यदि किसी बिल्डिंग में आम आदमी को अपने परिवार हेतु एक छोटा सा आसियाना लेना हो तो उसे बिल्डर को काला धन देना ही होगा, अन्यथा नहीं उसे फ्लेट मिलेगा नहीं जमीन, इस लेन-देन की बाते खुली किताब की तरह है, जो जग-जाहीर है, लेकिन उसके उपरांत भी काले धन का यह गोरख धंधा बढ़े धड्ड्ले से चलाया जा रहा है।

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आयकर विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि उक्त मामले में भ्रष्ट अधिकारियों पर अपनी पेनी नजर रखे, तथा जिन अधिकारियों के बारे में सर्वाधिक भ्रष्टाचार एवं अवैध काली कमाई जमा करने चर्चे है, उन अधिकारियों की जांच शुरू कर, भ्रष्टाचार पर अंकुश लागने के साथ साथ भारत में बढ़ते काले धन जैसे मामलों पर भी अंकुश लगाने का काम करे।