फॉर्च्यून ग्रुप के लैंडमार्क प्रोजेक्ट में करोड़ों की टैक्स चोरी।

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Fortune Landmark
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फॉर्च्यून ग्रुप वापी के रियल स्टेट तथा कंस्ट्रक्सन कारोबार में एक बड़ा नाम है, फॉर्च्यून ग्रुप के वापी में 8, दमण में 9, सिलवासा में 1 ओर अंबाच में 1 प्रोजेक्ट निर्माणाधीन बताया जाता है, इन प्रोजेक्टो के अलावे अन्य कई प्रोजेक्टो का निर्माण भी पूर्व में फॉर्च्यून ग्रुप द्वारा पूर्ण किया जा चुका है, अब उक्त तमाम प्रोजेक्टो में फॉर्च्यून ग्रुप के बिल्डर तथा भागीदारों ने मिलकर, आम जनता को, ख़रीदारों को, आयकर विभाग को ओर सरकार को कितना चुना लगाया होगा इसका थोड़ा-बहोते अंदाजा तो आपको उक्त खबर से लग ही जाएगा।

वापी जीआईडीसी क्षेत्र में फॉर्च्यून ग्रुप का एक प्रोजेक्ट निर्माणाधीन है जिसका नाम है फॉर्च्यून लैंडमार्क। यह प्रोजेक्ट 309 दुकानों का प्रोजेक्ट है ओर बिल्डर इन दुकानों कि बिक्री में धड्ड्ले से काले धन कि लेन-देन कर रहा है। अब उक्त पूरे प्रोजेक्ट यानि 309 दुकानों में कुल कितने काले धन कि लेन-देन कि जा रही है ओर कि जाएगी, इसका अंदाजा आप ग्राउंड फ़्लोर पर बेची जाने वाली एक दुकान कि क़ीमत ओर उसके रजिस्ट्रेशन कि रकम से लगा लीजिए।

एक करोड़ 90 लाख में जमीन ख़रीदी, 2 करोड़ 80 लाख का उसी जमीन पर लोन लिया और बुकिंग का बोर्ड लगा दिया, क्या इसी को बिल्डर कहते है?

DOWNLOAD : 2 करोड़ 80 लाख का लोन PDF FILE

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जानकारी मिली है कि उक्त बिल्डर ग्राउंड फ़्लोर की दुकान, ख़रीदार को 16500 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट के हिसाब से यह कहकर बेच रहा है कि उक्त दुकान का रजिस्ट्रेशन 5700 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट के हिसाब से किया जाएगा। अब 5700 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट वाली दुकान को 16500 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट के भाव में बेच कर बिल्डर ओर ख़रीदार दोनों आयकर विभाग को कितना चुना लगा रहे है इसका हिसाब किताब लगाना आयकर अधिकारियों के बाए हाथ का खेल है। लेकिन जो जानकारी ओर आंकड़े सामने आ रहे है वह अवश्य ही होश उड़ाने वाले है क्यो कि इसी बिल्डर के कई प्रोजेक्टो में से एक प्रोजेक्ट चला में भी है जिसकी इमारत का नाम है फॉर्च्यून स्क्वेयर ओर इसी फॉर्च्यून स्क्वेयर, में आयकर विभाग के कार्यालय स्थित है।

कहीं आयकर विभाग के अधिकारी अपने मकान मालिक दर्शक शाह के साथ काले-धन की लेन-देन में शामिल तो नहीं?

बिल्डर दर्शक शाह ने आयकर विभाग को कार्यालय के लिए फॉर्च्यून स्क्वेयर में कई दुकानें किराए पर दे रखी है। बात साफ है आयकर विभाग के अधिकारी किराएदार है ओर दर्शक शाह मकान मालिक, इस लिए सवाल भी साफ है कि क्या कभी किराएदार बनने के बाद, आयकर विभाग के अधिकारियों ने दर्शक शाह के प्रोजेक्टो में होने वाली काले-धन कि लेन-देन पर संज्ञान लिया, क्या आयकर विभाग के अधिकारियों ने दर्शक शाह के प्रोजेक्टो पर छापे-मारी की, या फिर आयकर विभाग के अधिकारियों ने अपने मकान मालिक दर्शक शाह को कोई विशेष विशेष छूट दे रखी है? यह सवाल अवश्य आयकर विभाग को खलने वाला सवाल है लेकिन हक़ीक़त यही है कि फॉर्च्यून ग्रुप के प्रोजेक्टो में काले धन की लेन-देन को देखकर जनता कुछ ऐसे ही सवाल चौपालों पर कर रही है।

कुल कंस्ट्रक्सन 15665 स्क्वेयर मीटर, इस हिसाब से 5700 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट के दस्तावेज़ रजिस्ट्रेशन के हिसाब से कुल कितनी रकम होती है ओर 16500 रुपये से कुल कितनी रकम होती है इसका गुणा-भाग आयकर विभाग के अधिकारी स्वय कर के देख ले।

फॉर्च्यून स्क्वेयर में आयकर विभाग के कार्यालय से एक बात तो साफ़ है कि फॉर्च्यून ग्रुप के बिल्डर दर्शक शाह ओर भावेश शाह को वापी आयकर विभाग के सभी अधिकारी अच्छी तरह जानते होंगे ओर दर्शक शाह को लगता होगा कि आयकर विभाग तो स्वय उनका किराएदार है वह उनका क्या बिगाड़ लेगा?

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