गजेन्द्र सिंह शेखावत को मिली जमानत, 30 जून को कोर्ट में पेश होने के आदेश। लंबे समय से कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर हुई थी जमानत जब्त।

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गजेन्द्र सिंह शेखावत को मिली जमानत, 30 जून को कोर्ट में पेश होने के आदेश। लंबे समय से कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर हुई थी जमानत जब्त। | Kranti Bhaskar
Gajendra Shekhawat Jodhpur

जोधपुर। केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण राज्य मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत सोमवार को महानगर मजिस्ट्रेट संख्या 8 की अदालत में एक विचाराधीन मामले में उपस्थित हुए और अपनी जमानत करवाई। मामले के अनुसार शेखावत पर पूर्व में जेएनवीयू छात्रसंघ अध्यक्ष रहते धारा 182 का मामला विचाराधीन है जिसमं उनके द्वारा लंबे समय से कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर जमानत जब्त कर ली गई थी। इस पर सोमवार को शेखावत इस मामले में महानगर मजिस्ट्रेट संख्या 8 की अदालत के पीठासीन अधिकारी वैदेही सिंह की अदालत में उपस्थित हुए और जमानत आवेदन प्रस्तुत किया। इस पर कोर्ट ने आवेदन को स्वीकार करते हुए शेखावत को जमानत प्रदान की। कोर्ट ने 10 हजार रुपए के मुचलके पर शेखावत की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इसी मामले को लेकर अब गजेंद्र शेखावत को 30 जून को फिर से व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।

दरअसल केंद्रीय राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत अपने कॉलेज के समय में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे थे। उसी समय में शेखावत ने किसी मामले को लेकर एक एफआईआर दर्ज करवाई थी जो फर्जी पाई गई थी। पुलिस ने इस मामले में झूठी एफआईआर दर्ज करवाने का दोषी मानते हुए शेखावत पर कार्रवाई शुरू कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आईपीसी की धारा 182 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। इसी मामले को लेकर शेखावत सोमवार को न्यायलय में पेश हुए। जहां से उन्हें 10 हज़ार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत स्वीकार कर ली गई। शेखावत को कोर्ट ने आदेश दिए है कि उन्हें अदालत में 30 जून को व्यक्तिगत रूप से पेश होना है।

यह है धारा 182

भारतीय दंड संहित की धारा 182 के अनुसार इस आशय से मिथ्या इत्तला देना व झूठी शिकायत करना कि लोक सेवक विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी दूसरे व्यक्ति को क्षति करने को करता हो। जो कोई किसी लोक सेवक को एेसी इत्तला देगा, जिसके मिथ्या होने का या तो उसे ज्ञान है या विश्वास है तथा एेसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग करे जिस उपयोग से किसी व्यक्ति को क्षति या क्षोभ हो। इस अपराध के लिए छह माह का कारावास या हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है या दोनों से दंडित किया जा सकता है।