गृह राज्य मंत्री के निजी सचिव पर, हफ्ता लेने का आरोप!

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क्या गृह मंत्रालय को पता है की रॉयल डिस्टलरी व खेमानी डिस्टलरी के टैक्स चोरी मामले में, तत्कालीन प्रशासक सत्यगोपाल, तत्कालीन विकास आयुक्त पी-के गुप्ता, तत्कालीन आबकारी आयुक्त विकास आनंद पर, शराब माफिया अशोक खेमानी से प्रतिमाह तैतीस-तैतीस लाख रुपये लेने का आरोप लगा है… ?

लोक सभा चुनाव 2014 के बाद मोदी सरकार बनने के बाद प्रधान मंत्री मोदी ने केंद्रीय मंत्री तथा मंत्रियों के निजी सचिवों की नियुक्ति को लेकर काफी कड़े कदम उठाने का वादा भी किया और अपने तमाम मंत्रियों को इस बात की हिदायत भी दी गई की कैसे इस मामले में सावधानी बरती जाए।

लेकिन मोदी सरकार के गृह राज्य मंत्री श्री रिज्जु के निजी सचिव की यह जानकारी सामने आने के बाद लगता है की प्रधान मंत्री श्री मोदी के निर्देशों की परवाह उनके ही मंत्री नहीं कर रहे है व मोदी सरकार की छवि धूमिल करने वाले अधिकारियों को प्रमुख विभागों में नियुक्त कर उक्त विभागों की कार्यप्रणाली को तार-तार कर रहे है। या तो यहां ऊंचे मकान फीके पकवान वाली बात सार्थक होती नजर आ रही है।

मामला गृह राज्य मंत्री श्री रिज्जु के निजी सचिव विकास आनंद की नियुक्ति व उन पर लगे आरोपों से जुड़ा है। वर्तमान आई-ए-एस अधिकारी विकास आनंद गृह राज्य मंत्री श्री रिज्जु के निजी सचिव है। लेकिन पूर्व में उक्त आई-ए-एस अधिकारी संध प्रदेश दमन में बतौर सामाहर्ता एवं आबकारी आयुक्त की सेवा दमन में दे चुके है, तथा उक्त सेवा एवं सर्विस के दौरान उक्त आई-ए-एस अधिकारी की कार्यप्रणाली कैसे थी तथा उक्त अधिकारी पर कितने आरोप लगे है इस बात का आंकलन शायद मोदी सरकार के मंत्री श्री रिज्जु करना भूल गए, और यदि गृह राज्य मंत्री ने इस बात का अंकलन करने के उपरांत आई-ए-एस अधिकारी विकास आनंद को अपना निजी सचिव नियुक्त किया है तो शायद यह मोदी सरकार के वादों और चोकसी पर एक बड़ा सवाल है।

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वर्ष 2010 को दमन की रॉयल डिस्टलरी व खेमानी डिस्टलरी के मालिक व शराब माफिया अशोक खेमानी द्वारा न्ययालय में एक हलफ़नामा दायर किया गया, उस हलफ़नामा में अशोक खेमानी ने न्यायालय को बताया की उनसे दमन-दीव व दानह के तीन बड़े अधिकारी प्रतिमाह तैतीस-तैतीस लाख रुपये रिश्वत की मांग करते थे, तथा अशोक खेमानी उन तीनों अधिकारियों की मांग पूरी कर उन अधिकारियों को प्रतिमाह तैतीस-तैतीस लाख रुपये रिश्वत देते थे। इन तीन अधिकारियों में पहला नाम तत्कालीन प्रशासक सत्यगोपाल का है, दूसरा नाम तत्कालीन विकास आयुक्त पी-के गुप्ता का है, तथा तीसरा नाम तत्कालीन समाहर्ता व आबकारी आयुक्त विकास आनंद का है। जो इस वक्त केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री रिज्जु के निजी सचिव के तौर पर नियुक्त है। इस मामले में दायर इस हलफ़नामा के आलावे शराब की टैक्स चोरी मामले में एक तरफ सीबीआई की जांच चल रही है तो दूसरी तरफ प्रशासक की और किसी की जांच। लेकिन दोनों जांचे जांचाधीन बताई जा रही है।

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मंत्रियों के निजी सचिवों की नियुक्ति हेतु किए गए वादों पर सवाल उठा दिए इस मामले ने।

ऐसे में क्या केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री रिज्जु के बतौर निजी सचिव काम करने वाले आई-ए-एस अधिकारी विकास आनंद की इतने महत्वपूर्ण विभाग व पद पर नियुक्ति कितनी लाज़मी है यह तो मोदी सरकार को सोचना चाहिए। एक सवाल यह भी उठता है की उक्त अधिकारी ने अब तक किन किन क्षेत्रों में काम किया/अपनी सेवा दी और वहां ऐसे कितने मामले दबे हुए है जिनकी जांच लंबित है? और इन सब मामलों की जानकारी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री रिज्जु को क्यों नहीं है। क्या केंद्रीय मंत्री के इतने नजदीकी तथा महत्वपूर्ण पद पर बैठे होने के कारण उक्त अधिकारी पर लगे आरोपों में उक्त अधिकारी पर होने वाली जांच प्रभावित नहीं होगी? क्या मोदी सरकार को भी इस मामले की जानकारी है? और क्या गृह मंत्रालय में ऐसे आरोपी अधिकारियों की नियुक्ति न्यायोचित है, हो न हो इस मामले में उक्त अधिकारी द्वारा गृह मंत्रालय में भी गड़बड़ियों के सूत्र अवश्य जांच की प्रतीक्षा कर रहे होंगे।

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इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री रिज्जु को चाहिए की तात्कालिन उक्त मामले में संज्ञान लेकर उक्त अधिकारी को अपने निजी सचिव के पद से मुक्त कर उक्त अधिकारी के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करवाए।

संध प्रदेश दमन में बतौर समाहर्ता, तथा आबकारी आयुक्त की सेवा दे चुके आई-ए-एस अधिकारी विकास आनंद इस वक्त गृह मंत्रालय के गृह राज्यमंत्री श्री किरण रिजजु के निजी सचिव के पद पर है।

तत्कालीन आबकारी आयुक्त विकास आनंद पर खेमानी डिस्टलरी तथा रॉयल डिस्टलरी के मालिक अशोक खेमानी से प्रतिमाह तैतीस तैतीस लाख रुपये लेने का आरोप लगाया गया था, अशोक खेमानी द्वारा, न्यायालय में अपनी अर्जी में खेमानी ने किया इस का खुलासा।