मोदी सरकार का बड़ा फैसला, जाने वाली है भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों की नौकरी

Modi government's big decision to go, job of corrupt government employees
Modi government's big decision to go, job of corrupt government employees

पहले 12 आयकर अधिकारियों को ओर फिर सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद विभाग के 15 अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त कर मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ़ सख्त कार्यवाही के संकेत दे दिए थे। अब मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार पर एक ओर बड़ा फ़ैसला ले लिया है।

केंद्र ने भ्रष्ट एवं नकारा कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं सभी विभागों से अपने कर्मियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा करने को कहा है. कार्मिक मंत्रालय ने केंद्र सरकार के सभी विभागों से प्रत्येक श्रेणी के कर्मचारियों को कामकाज की समीक्षा ‘पूरे नियम कायदे’ से करने के साथ यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारीके खिलाफ जबरन सेवानिवृत्ति की कार्रवाई में मनमानी न हो.

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कार्मिक मंत्रालय ने कहा है कि, “सभी मंत्रालयों/विभागों से आग्रह है कि वे सार्वजनिक उपक्रमों/बैंको और स्वायत्त संस्थानों समेत अपने प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले विभागों के कर्मचारियों के कामकाज की ‘कायदे कानून और सही भावना’ के अनुसार समीक्षा करें.”

अब प्रत्येक महीने देनी होगी रिपोर्ट
निर्देश के अनुसार सभी सरकारी संगठनों को प्रत्येक महीने की 15 तारीख को निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट देने को कहा गया है. इसकी शुरुआत 15 जुलाई 2019 से होगी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मूल नियम 56 (जे), (आई) और केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1972 के नियम 48 के तहत जारी कार्मिक मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों और केंद्र सरकार के विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी.

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अब कर्मचारियों पर गिरेगी गाज
ये नियम सरकार को जनहित में उस सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्त करने की अनुमति देता है, जिसकी ईमानदारी संदेहास्पद है और जो काम के मामले में कच्चे हैं. गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में जनहित में सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद विभाग के 15 अधिकारियों को समय से पहले सेनानिवृत्त किया. इस महीने की शुरुआत में भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 12 अधिकारियों को भी सेवा से बर्खास्त किया गया था.

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जिसकी ईमानदारी संदेहास्पद है उन्हे कभी भी नोकरी से निकाला जा सकता है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए गुरुवार को कहा था कि सार्वजनिक जीवन और सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार को हटाने का अभियान चलाया जाएगा।