मोहन डेलकर को ले डूबा भीतरघात, चेले-चमचे और निजी सचिवों के मकडजाल से जनता परेशान!

मोहन डेलकर को ले डूबा भीतरघात, चेले-चमचे और निजी सचिवों के मकडजाल से जनता परेशान! | Kranti Bhaskar image 1
Mohan Delkar Silvassa

दानह कांग्रेस प्रमुख एवं पूर्व सांसद मोहन डेलकर एवं युवा कांग्रेस अध्यक्ष अभिनव डेलकर लगता है इन दिनों निजी सचिवो एवं चेले-चमचों के चंगुल में फस चुके हैं, बताया जाता है कि जनता को अपनी बात उन तक पहुंचाने हेतु, पहले डेलकर कार्यालय में पाल रखे निजी सचिवो एवं चेले-चमचों तक पहुंचानी पड़ती है यदि इसके बाद निजी सचिवो एवं चेले-चमचों से अनुमति मिले तो ही मोहन डेलकर एवं अभिनव डेलकर से मुलाक़ात संभव हो पाती है, इतना ही नहीं कांग्रेस कार्यालय में कुछ महानुभाव ऐसे भी बताए जाते हैं जो जनता की समस्या को, मोहन डेलकर तक जाने ही नहीं देते बल्कि सवय को मोहन डेलकर से भी ज्यादा पावरफुल बता कर कार्य में अड़चन डालने लग जाते हैं, अब इसे मोहन डेलकर द्वारा निजी सचिवो एवं चेले-चमचों को मिली खुली छूट समझा जाए या नहीं इसका फ़ैसला सवय मोहन डेलकर ही करे तो ठीक होगा लेकिन इसके लिए भी इस खबर का मोहन डेलकर तक पहुँचना आवश्यक है कही ऐसा ना हो जनता का रास्ता रोकने वाले इस खबर का रास्ता भी रोकने में कामियाब हो जाए।

वैसे इस वक्त दानह की जनता में यह चर्चा भी जोरों पर है कि, मोहन डेलकर के पुत्र एवं युवा कांग्रेस अध्यक्ष अभिनव डेलकर पूरी तरह से चेले-चमचों एवं निजी सचिवो के चंगुल में फस हुए बताए है, दानह की जनता का कहना है कि अभिनव डेलकर के पास कोई एक मारवाड़ी व्यक्ति है जिसके इसारे पर अभिनव डेलकर काम करते है इतना ही नहीं चर्चा यह भी है कि अभिनव डेलकर का घर से लेकर उनकी शारीरिक देखभाल का जिम्मा उसी मारवाड़ी व्यक्ति के पास है, इतना ही नहीं अभिनव डेलकर से कोई काम करवाना हो तो सबसे पहले उस मारवाड़ी भाई को खुश करना पड़ता है तभी जाकर काम संभव हो पाता है नही तो वह कार्य अधर में ही लटक जाता है।

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देखने वाली बात यह है कि, कार्यालय में बहुत से लोग मोहन डेलकर से मिलने आते है जिसमें ज्यादातर संख्या आदिवासियों की होती है परंतु उन लोगो को कार्यालय में बैठे चमचे लोगों के सवालों से गुजर कर एवं काफी दिक़्क़तों के बाद ही उन्हें मोहन डेलकर से मुलाकात संभव हो पाती है और वह भी तब जब सवय मोहन डेलकर उपस्थित हो! साफ तौर पे कहा जा सकता है कि मोहन डेलकर से मिलना अर्थात लोहे के चने चबाने जितना मुश्किल काम नहीं तो उससे कम भी नहीं!

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वैसे तो अभिनव डेलकर राजनीति का वो चेहरा बताया जाता है जिसे राजनीति विरासत में मिली है, लेकिन अपने पिता की तर्ज पर इस युवा नेता को चेले-चमचे भी विरासत में मिल जाएंगे यह भला किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा।

कांग्रेस पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष पद पर बैठकर युवाओं का नेतृत्व करना कोई सरल कार्य नही है लेकिन दर्जनों निजी सचिव एवं पहरेदार रखने वाले राजनेता जरा इस पर भी गौर करे कि, जब चुनाव आएंगे तब वोट मांगने के लिए जनता के पास यह सवय जाएंगे या वहा भी इनके चमने टांग-अड़ाएंगे, सोचना यह भी चाहिए की पूर्व में हुई हार का कारण कही चमचो का जनता से दुर्व्यवहार तो नहीं? लेकिन इन सब मामलो में सोचने के लिए पहले तो इन्हे निजी सचिवो एवं चमचो के चंगुल से बाहर निकालना पड़ेगा, तब जाकर युवाओं का सही तरीके से नेतृत्व कर पाएंगे,वरना कही ऐसा ना हो की जमीनी स्तर पर जनता की नाराज़गी से रूबरू होने से पहले ही पुनः जनता इन्हे सत्ता से दूर कर दे!

इस पूरे मामले पर यदि गौर किया जाए तो ऐसा प्रतीत होता है की सत्ता से दूर होने वाले मोहन डेलकर अब धीरे धीरे, अपने निजी सचिवो एवं चेले-चमचो की वजह से जनता एवं जनता की समस्याओं से भी दूर होते नजर आ रहे है। कही ऐसा तो नहीं की 2009 के लोक सभा चुनावो में हुई हार का कारण भी निजी सचिवो एवं चेले-चमचो की अड़ियलता हो, कारण जो भी इस मामले में अवश्य मोहन को सोचना चाहिए, क्यो की जनता जनर्धान है और जनर्धान के लिए पहरा बिठाए रखना ठीक बात नहीं, क्यो की यदि जनता जनर्धान नाराज़ हुई तो जनता की नाराज़गी कही आने वाले समय में पुनः सत्ता के गलियारो पर इन के लिए पहरा बैठाकर ना रख दे, वैसे तो यह समय पर निर्भर करता है की आने वाले समय क्या होगा लेकिन फिलवक्त की स्थितियों को दिख कर आंखे बंद करना क्रांति भास्कर को नहीं आता। शेष फिर।

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Mohanbhai Sanjibhai Delkar

इस फोटो में मोहन डेलकर के पास खड़े हुए व्यक्ति को भी गौर से देख लीजिए, यह वैसे तो विनोभाभावे सिविल अस्पताल में काम करता है और विनोभाभावे सिविल अस्पताल के अधीक्षक डाक्टर वी-के दास का काफी खास बताया जाता है लेकिन मोहन डेलकर एवं अभिनव डेलकर का यह कितना खास है इस की पूरी कहानी विस्तार से अवश्य पढ़िएगा, क्रांति भास्कर के आने वाले अंकों में। शेष फिर।