कांग्रेस में रहकर कांग्रेस का झण्डा उठाने से घबराने वाला मोहन डेलकर अब आदिवासी विकास संगठन का सहारा लेकर आदिवासी एकता को खंडित करने की नाकाम कोशिश कर रहा है : दानह भाजपा।

विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी नेता तथा भाजपा सांसद नट्टू पटेल द्वारा आदिवासियो की हितो की बात करते हुए आदिवासी भवन को मोहन डेलकर के कब्जे से छुड़ाने की बात कही गई थी। विश्व आदिवासी दिवस पर भाजपा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया था की दानह कांग्रेस प्रमुख मोहन डेलकर ने आदिवासी समाज के लोगो के साथ धोका किया है। प्रदेश में आदिवासी समाज के लोगो के लिए प्रशासन ने आदिवासी भवन का निर्माण किया,परन्तु मोहन डेलकर आदिवासी भवन पर अवैध कब्जा कर आदिवासी भाइयो के साथ अन्याय कर रहा है।  भवन मे एक भी दुकान आदिवासी भाइयों की नहीं है, वहा उनका निजी कार्यालय, CPF का कार्यालय, बैंक इत्यादि दुकानों का भण्डार है। उन्होने कहा की हम जल्द ही आदिवासी भवन को मोहन डेलकर के कब्जे से आज़ाद कराने की प्रशासन से मांग करेंगे और जरुरत पड़ी तो आंदोलन भी करेंगे ।

विश्व आदिवासी दिवस पर भाजपा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के बाद, आदिवासी विकास संगठन ने भी आनन –फानन में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी उक्त प्रेस विज्ञप्ति में बताया की दानह के जनमान्य आदिवासी सांसद अपना मानसिक संतुलन खो बैठे है इसके अलावे और भी कई आरोप लगाए गए।

दानह आदिवासी विकास संगठन की अजीबो-गरीब राजनीति को देखते हुए दानह भाजपा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि दादरा नगर हवेली के आदिवासी नेता नटुभाई पटेल है ना कि आदिवासी विकास संगठन। दानह की जनतातथा दानह के आदिवासियो ने अपना प्रतिनिधि नट्टूभाई पटेल को चुना है लेकिन लगता है आदिवासी विकास संगठन को यह पता ही नहीं की वह जिस जनप्रतिनिधि को अपमानित कर रहे है वह सवय आदिवासी समाज तथा जनता द्वारा चुना हुआ एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि है।

  • मोहन डेलकर ने आदिवासी समाज के लोगो के साथ धोका किया है: दानह भाजपा।
  • आदिवासी भवन को मोहन डेलकर के कब्जे से आजाद करवाने हेतु, दानह भाजपा करेगा प्रशासन से मांग।

दानह भाजपा ने प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया कि आदिवासी भवन पर अवैध कब्जा कर बैठे भूतपूर्व कांग्रेस सांसद और वर्तमान दादरा नगर हवेली कांग्रेस अध्यक्ष के कारनामे जब जनता के सामने आ रहे है तो उनकी बौखलाहट का स्तर भी बढ़ रहा है। शायद इसी बोखलाहट के चलते मोहन डेलकर यह भूल गए की आदिवासी विकास संगठन के सहारे दानह के जिस नेता पर आरोप लगा रहे है वह सवय आदिवासी समाज से है।

  • भाजपा ने बताया कि आदिवासी विकास संगठन के मुखपत्र पर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर वर्तमान आदिवासी सांसद पर ज्ञान का अभाव और मानसिक संतुलन खोने का जो आरोप लगाया गया है उसके लिए उन्हे माफ़ी मांगनी होगी।  
  • आदिवासियो के विकास के लिए मात्र 40 रूपये पर किराए पर सरकार से ली गई जमीन में आदिवासियो को कोई स्थान नहीं।
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आदिवासी विकास संगठन को “आदिवासी भवन” की जमीन लोंग टर्म लीज पर दानह प्रशासन द्वारा कुछ शर्तो पर दी गई।  प्लॉट संख्या 351 जिसका क्षेत्रफल ४९०० स्क्वायर मीटर है उस जगह पर आदिवासी विकास संगठन द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। आज के समय में पुरे आदिवासी भवन कि जमीन सहित का बाजार भाव करोडो में है परन्तु आदिवासी भवन से किसी भी आदिवासी भाई को कोई लाभ नहीं है। दरअसल आदिवासी भवन के लिए सरकारी जमीन दानह प्रशासन द्वारा आदिवासी विकास संगठन को केवल इस शर्त पर दी गयी थी कि इससे आदिवासी समाज का भला होगा, उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा, उनके ठहरने की व्यवस्था की जाएगी, कम दामो पर उन्हें व्यवसाय के लिए दुकान मुहैया कराई जाएगी। लीज डीड की टर्म एंड कंडीशन कॉपी में साफ़ लिखा है प्रशासन से साल के 40 रूपये पर 99 साल के लिये लीस पर ली गई।

( SMC Notice : Click and Download ) आदिवासी भवन के लिए प्रशासन ने जमिन इस शर्त पर दि थी कि उस जमिन पर जो भवन का निर्माण किया जाएगा वह सिर्फ आदिवासीयों के उपयोग के लिए होगा .यहा पर दुधनी , मांदोनी जैसे दुर दराज के आदिवासी भाई आकर ठहर सकते है। भाजपा का कहना है कि  यहा कि दुकाने आदिवासीयों को रोजगार के लिए उपलब्ध होनी चाहिए चाहिए  जिससे उनको रोजगार मिले एवं आमदनी में वृद्धि हो। लेकिन उक्त भवन को ना सिर्फ़ अपने व्यक्तिगत व्यापारिक और धंधे के फ़ायदे के लिये उपयोग किया जा रहा है बल्कि अवैध निर्माण भी किया गया है।

  • सरकार को साल का मात्र 40 रुपए देना है और वहां की दुकानों से लाखों रुपए वसूले जाते हैं: दानह भाजपा।

आज वर्तमान समय मे आदिवासी भवन में बैंक ऑफ बड़ोदा की साखा चल रही है, एटीएम चल रहा है, मिली इलेक्ट्रॉनिक का शोरूम चल रहा, काफी सारी दूसरी दुकानें, जिम , और भूतपूर्व सांसद मोहन डेलकर की सेकुरिटी ओफ्फिस भी चल रही है लेकिन किसी गरीब आदिवासी भाई को वहां कोई भी लाभ नही मिला, फिर क्या औचित्य रहा इस इमारत के निर्माण का जिसमे जमीन सरकारी है, इमारत बनाने में पैसा जनता का लगा पर उसका उपयोग आज निजी जैसा हो रहा है इस भवन द्वारा आने वाला पैसा भी कहा और कितना खर्च होता है किसी को भी ज्ञात नही। उक्त भवन बनने के बाद अब तक उक्त भवन में दुकाने किसे आवंटित की गई, कितनी किराया राशि में की गई तथा उक्त किराया राशि का आदिवासी कल्याण के लिए क्या उपयोग हुआ इसका ब्योरा अगर आदिवासी जनता के सामने आए तो ही पता चलेगा की आदिवासी के नाम पर किसका कितना विकास हुआ? वही आदिवासी भवन पर होने वाली राजनीति और आदिवासी विकास संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञापत्ति को देखकर लगता है कि मोहन डेलकर शायद यह समझ बैठे है की दानह में केवल वही एक ऐसे आदिवासी है जिनहे अभी भी विकास की आवश्यकता है!

  • कांग्रेस में रहकर कांग्रेस का झण्डा उठाने से घबराने वाला मोहन डेलकर अब आदिवासी विकास संगठन का सहारा लेकर आदिवासी एकता को खंडित करने की नाकाम कोशिश कर रहा है : दानह भाजपा।
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भाजपा का कहना है कि आज जो जनाधार खोने की बात कर रहे है उन्हें अपने अतीत को पुनः याद करना चाहिए कि किस तरह से उनसे तंग आकर जनता ने उन्हें बार बार हराया है जनाधार किसका खत्म है ये जनता जानती है. खुद की हार से हताश भूतपूर्व सांसद ने स्वयं कांग्रेस को पीछे रखकर केवल आदिवासी जनता को गुमराह करने के लिए अब आदिवाशी विकाश संगठन का सहारा ले लिया है वैसे इससे पहले भी मोहन डेलकर को कई बार दलबदलू नेता होने का तगमा मिल चुका है लेकिन इस बार बात कुछ और है इस बार तो जनता को यह तक नहीं पता की मोहन डेलकर कांग्रेस में है भी या नहीं क्यो कि पिछले लंबे समय से किसी ने कांग्रेस की प्रेस नोट में मोहन डेलकर के हस्ताक्षकर नहीं देखे अभी हाल ही लगे बड़े बड़े बोर्ड पर भी कांग्रेस का निशान नहीं मिला, पिछले लंबे समय से कुछ प्रबुद्ध लोग यह सवाल कर रहे है की मोहन डेलकर इस वक्त किस राजनीतिक दल में है क्या मोहन डेलकर को कांग्रेस का नाम लेने से भय लगता है या कांग्रेस के नाम पर राजनीति करने में उन्हे संकोच है? हो सकता है मोहन डेलकर को यह सवाल थोड़ा खले लेकिन इसके बाद भी जनता के सवालो से मुह मोड़ना मुनासिब नहीं।

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Sudhir Raman Pathak Sudhir Raman Pathak

भाजपा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज जिन्हें आदिवासी भाइयो की याद आयी है ये वही है जिन्होंने सालो तक प्रदेश में सांसद बन केवल आदिवासी भाइयो को ठगा।  ये वही भूतपूर्व सांसद है जिन्होंने आज से सालो पहले प्रदेश के जनता के करोड़ो रूपये गुजरात चुनाव में उड़ा दिया था वो पैसा किसका था इन्ही आदिवासी भाइयो के हितों का था, आदिवासी समाज के लिए आपके कार्य क्या थे वो आज जनता जान रही है।

अपने आप को अतिविशेष समझने वाले मोहन डेलकर को चाहिए की पहले वह आदिवासी भाइयो से मिलने वाले रास्ते में आने वाले सूट-बूट वाले दरबान हटाए उन्हे घंटो इंतजार करवाना बंद करे तथा तथा अपने विश्राम के लिए निश्चित किए गए समय सीमा में कटोती करे इसके बाद पता लगाए की कितने गरीब आदिवासी ऐसे है जो इनकी बड़ी कोठी और कोठी के बाहर खड़े पहरेदार देखकर ही लौट जाते है अगर मोहन डेलकर यह पता लगा ले तो हो सकता है उन्हे पूर्व में हुई हार का कारण भी पता चल जाए।

दानह भाजपा का कहना है कि मोहन डेलकर हमारे आदिवासी भाइयो को बरगलाने का कार्य बंद कर दे और आदिवासी भवन का सही उपयोग के लिए उसे अपने उपयोग से मुक्त कर दे।  इनमे हमारे आदिवासी भाइयो को हम दुकाने, प्रशिक्षण, ठहरने की व्यवस्था आदि उपलब्ध होते देखना चाहते है जिसके लिए ये बनाया गया था, एक बार पुनः  कहा जा रहा है क़ि  मोहन डेलकर अपने स्वेक्षा से आदिवासी भवन छोड़ दो  वरना इसपर एक उग्र आंदोलन करना पड़ा तो हम पीछे नही हटेंगे।