दमन-दीव व दानह के तत्कालीन प्रशासक पर सीबीआई का सिकंजा। पुडुचेरी मेडिकल घोटाले में आईएएस अधिकारियों का नाम।

दमन-दीव व दानह के तत्कालीन प्रशासक पर सीबीआई का सिकंजा। पुडुचेरी मेडिकल घोटाले में आईएएस अधिकारियों का नाम। | Kranti Bhaskar
narendra kumar ias daman

पुडुचेरी मेडिकल कालेज प्रवेश घोटाले में दो आइएएस अफसर लपेटे में आ गए हैं। सीबीआइ ने मेडिकल के स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के दाखिले में कथित अनियमितताओं के संबंध में दो आइएएस अफसरों पुडुचेरी के स्वास्थ्य सचिव बीआर बाबू और केंद्रीय प्रवेश समिति (सीईएनटीएसी) के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है।

बताया जाता है कि यह वही नरेंद्र कुमार है जिन पर दमन-दीव व दानह विधुत विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने तथा भ्रष्टाचार में अधिकारियों के साथ भागीदारी रखने के कई आरोप लगे थे।

एफआइआर में 11 सरकारी अधिकारियों के अलावा तीन निजी मेडिकल कॉलेज के प्रशासकों और चार डीम्ड मेडिकल विश्वविद्यालयों के अफसरों को भी आरोपी बनाया गया है।

सीबीआइ एफआइआर के अनुसार, आरोपी अधिकारियों ने वास्तविक अभ्यर्थियों के साथ धोखाधड़ी की। काउंसिलिंग के दौरान इन छात्रों को केंद्रीय प्रवेश समिति ने अस्थायी प्रवेश प्रमाणपत्र दिया था, लेकिन बाद में उन्हें आवंटित सीटें देने से इन्कार कर दिया गया।

सीबीआइ का आरोप है कि सरकारी कर्मचारियों ने प्रवेश प्रक्रिया 2017 में अपने पद का दुरुपयोग किया, निजी अस्पताल के अधिकारियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा और असली उम्मीदवारों के साथ बेईमानी की। एफआइआर में कहा गया है कि ज्यादा शुल्क लेकर अपात्र उम्मीदवारों को प्रवेश दे दिया गया। उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधन की मदद की। इसके कारण 96 योग्य छात्रों को प्रवेश नहीं मिल सका।

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने स्नातकोत्तर मेडिकल कोर्स में प्रवेश में कथित अनियमितताओं के संबंध में दो आइएएस अधिकारी और 11 सरकारी अधिकारी तथा निजी मेडिकल काॅलेज प्रशासकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इन आइएएस अधिकारियों में पुडुचेरी के स्वास्थ्य सचिव बीआर बाबू और केंद्रीय प्रवेश समिति के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार हैं. बाबू और कुमार के अलावा, सीबीआइ द्वारा पुडुचेरी के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशक रमन, प्रवेश समिति के संयोजक वी गोविंदराज, संयुक्त संयोजक के पाजनिरादजा और संयोजक जोनाथन डेनियल के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. तीन स्ववित्तपोषित मेडिकल काॅलेजों और चार मानद मेडिकल विश्वविद्यालयों के अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है.

सीबीआइ प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी अधिकारियों ने उन मासूम छात्रों के साथ धोखाधड़ी की जिन्हें केंद्रीकृत प्रवेश समिति द्वारा काउंसिलिंग के दौरान अस्थायी प्रवेश प्रमाणपत्र जारी किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें आवंटित सीटें देने से इनकार किया गया. सीबीआइ का आरोप है कि लोक सेवकों ने निजी अस्पताल के अधिकारियों के साथ आपराधिक साजिश रचते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया और छात्रों से 2017 की प्रवेश प्रक्रिया में धोखाधड़ी की.

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इसमें दावा किया गया कि साजिश के तहत, निजी मेडिकल काॅलेजों ने इन छात्रों को प्रवेश नहीं दिया और इनकी जगह बहुत ज्यादा शुल्क देनेवाले अयोग्य छात्रों को प्रवेश दे दिया. आरोप है कि लोक सेवक उचित प्रवेश प्रक्रियाओं का पालन करने में नाकाम रहे और उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करके मेडिकल काॅलेजों के प्रबंधन की मदद की. सीबीआइ प्राथमिकी के अनुसार, 96 योग्य छात्र साजिश के कारण प्रवेश नहीं ले सके.

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि काॅलेजों ने 40 से 50 लाख रुपये की फीस लेकर प्रवेश समिति द्वारा प्रायोजित नहीं किये गये छात्रों का प्रवेश ले लिया. सीबीआइ प्राथमिकी में कहा गया कि पुडुचेरी में मेडकिल काॅलेजों में चिकित्सा की 318 स्नातकोत्तर और डिप्लोमा सीटें हैं जिसमें से 162 सरकारी कोटे के अधीन हैं, जबकि 156 प्रबंधन सीटें हैं.