नेत्र चिकित्सकों ने स्मार्ट फोन के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चर्चा की

33

जोधपुर। ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसायटी एवं राजस्थान ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में रेटिना की बीमारियों के उपचार पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

जोधपुर ऑप्थल्मिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. संजीव देसाई ने बताया कि संगोष्ठी के मुख्य वक्ता कोयम्बटूर के वरिष्ठ पर्दा रोग विशेषज्ञ तथा एमआई टू रेट केम नेत्र परीक्षण यंत्र के आविष्कारक डॉ. आशीष शर्मा थे। सोसायटी के सचिव डॉ. गुलाम अली कामदार ने बताया कि संगोष्ठी में 15 वक्ताओं ने रेटिना के अलग-अलग रोगों के आधुनिक उपचार व नए उपकरणों के बारे में जानकारी दी। इससे जोधपुर संभाग के सभी नेत्र विशेषज्ञों को नेत्र रोगों के उपचार में सुविधा मिलेगी। साथ ही रोगियों को उपचार के लिए शहर से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैतानसिंह राठौड़ ने कहा कि नई टेक्नोलॉजी यथा-स्मार्ट फोन के बढ़ते उपयोग से आंखों पर दुष्प्रभाव बढ़ रहा है। ऐसे में सोसायटी की जिम्मेवारी है कि जागरूकता के माध्यम से इस प्रकार की समस्याओं पर नियंत्रण किया जाएगा।

विशिष्ट अतिथि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बलवंत मंडा ने विभिन्न सरकारी योजनाओ के अंतर्गत आंखों की बीमारियों के उपचार के लिए हर संभव योगदान का आश्वासन दिया। मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश गर्ग व गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविन्द कल्ला ने मधुमेह की रोकथाम व इससे उत्पन्न नेत्र रोग डायबेटिक रेटिनोपैथी के सम्बन्ध पर चर्चा करते हुए डायबिटीज के मरीजों के खान पान व दिनचर्या पर ध्यान देने का सुझाव दिया। इस अवसर पर ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. पार्थ बिश्वास ने बताया कि 1930 में सोसायटी का गठन किया गया था। नेत्र रोगों के प्रति आमजन में जागरूकता पैदा करने, नई रिसर्च को विकसित करने के लिए गठित सोसायटी के वर्तमान में 22 हजार से अधिक सदस्य है। संगोष्टी में ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की सचिव डॉ. रजनी सिन्हा के अलावा जोधपुर संभाग के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. कविता भटनागर, डॉ. अरविन्द चौहान, डॉ. सुरेंद्र माथुर, डॉ. गजेश भार्गव, डॉ. महेंद्र पालीवाल व डॉ. अजीत जाखड़ सहित अनेक नेत्र चिकित्सक मौजूद थे। संचालन व आयोजन सचिव डॉ. विवेक सिंघल, डॉ. प्रवीण जैन व डॉ. साहिल भंडारी थे।

आंख का हर कोना अब मोबाइल में

कोयम्बटूर के वरिष्ठ पर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष शर्मा ने एम आई टू रेट केम नेत्र परीक्षण यंत्र का आविष्कारक किया है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के मेक-इन-इंडिया के सपने को साकार करते हुए डॉ. शर्मा ने एक बेहद सरल व कम खर्चीले यंत्र का अविष्कार किया है। जिसकी सहायता से आंख के परदे के हर एक कोने का चित्र मोबाइल फोन से लिया जा सकता है जिससे परदे के रोगो के निदान व उपचार में सहायता मिलेगी। ऐसे यंत्र आम तौर में लाखों रुपये मूल्य के होते हैं। लेकिन भारत में डॉ. शर्मा की ओर से ईजाद किया गया यह यंत्र बहुत ही सस्ता है तथा शीघ्र ही पेटेंटेड होने वाला हैं। उल्लेखनीय है कि समय पूर्व जन्मे नवजात शिशुओं का नेत्र रोग ( रेटिनोपैथी ऑफ प्री-मैच्युरिटी) अंधा कर देता है। इस यंत्र से ऐसे बच्चो का समय रहते समुचित परीक्षण व उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।