नई पीढ़ी को कार देने से पहले दीजिए संस्कार: संत चंद्रप्रभ

जोधपुर। संत चंद्रप्रभ महाराज ने कहा कि बेहतर विश्व के लिए हमें शिक्षा के साथ साथ संस्कार निर्माण पर भी ध्यान देना होगा। यद्यपि शिक्षा विकास की नींव है। पिछले 50 सालों में शिक्षा के कारण जो विकास हुआ है वह हजारों वर्षों के इतिहास में भी नहीं हुआ लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि केवल शिक्षा पर जोर देंगे तो यह दुनिया आगे चलकर पंगु बन जाएगी। रिश्तों में दिनों दिन आ रही टूटन, पति-पत्नी के बीच बढ़ते तलाक, भाई-भाई में तकरार, माता पिता की सेवा के प्रति उदासीनता संस्कारों की कमी का ही परिणाम है। घर के बाहर खड़ी कार हमारी समृद्धि की पहचान है, पर घर के अंदर के संस्कार हमारी कुलीनता की परिचायक है। हमने बच्चों को कार नहीं दी तो वे दो दिन रोएंगे और संस्कार न दिए तो वे जिंदगी भर रोएंगे और हमें भी रुलाएंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल किताबी कीड़ा न बनाएं वरन उन्हें अच्छे मूल्य और अच्छे संस्कार भी देवें ताकि हम उन पर सदा गौरव कर सकें। संतप्रवर शुक्रवार को गांधी मैदान में चल रही प्रवचनमाला के तहत नई पीढ़ी को कैसे दें सही संस्कार विषय पर शहरवासियों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सुंदर मकान का निर्माण पत्थरों से होता है, सुंदर शहर का निर्माण पेड़ों से होता है, पर सुंदर मानव जाति का निर्माण नई पीढ़ी को संस्कारित करने से होगा। अगर हमने बच्चों को भाग्य के भरोसे छोड़ दिया तो बुढ़ापे में हमारे भाग्य का खराब होना तय है। संतप्रवर ने कहा कि राष्ट्रपति के लिए राष्ट्र का संचालन करना सरल है, पर अपने बच्चे का निर्माण करना कठिन है। अगर आप 100 विद्यालय बनाने का पुण्य प्राप्त करना चाहते हैं तो किसी एक बच्चे को संस्कारित बना दीजिए। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि अपने बच्चों को उन विद्यालयों में पढ़ाएं जहां ऊंची शिक्षा के साथ ऊंचे संस्कार भी दिए जाते हैं, नहीं तो वह पैसा कमाना तो सीख जाएगा, पर परिवार का पालन पोषण करना सीख नहीं पाएगा। उन्होंने माता-पिता से कहा कि आप बच्चों को महंगी बाइक दें, मोबाइल दें, रुपए दें, पर उससे पहले उसका सदुपयोग करने की सीख भी देवें। बच्चों को केवल जन्म देने वाले माता-पिता सामान्य दर्जे के होते हैं, संपति देने वाले मध्यम दर्जे के होते हैं, उन्हें गलत प्रवृत्तियों से जोडऩे वाले अधम दर्जे के होते हैं, पर बच्चों को शिक्षा, संपत्ति के साथ साथ ऊंचे संस्कार देने वाले माता-पिता उत्तम दर्जे के होते हैं। उन्होंने कहा कि आज के जमाने में पुरानी पीढ़ी के पास अच्छे संस्कार है और नई पीढ़ी के पास अच्छी शिक्षा है। अगर दोनों आपस में तालमेल बिठाकर चले तो नए युग का निर्माण हो सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को घर का गमला मत बनाइए कि कोई पानी देने वाला न मिले तो वे सूख जाएँ वरन बच्चों को जंगल का पौधा बनाएं ताकि कोई पानी देने वाला न हो तो भी अपने बलबूते खड़े रह सकें।

प्रवचन के दौरान चातुर्मास लाभार्थी सुखराज मेहता परिवार द्वारा श्रीमती नीलम मेहता के जन्मदिवस पर पारस ब्लड बैंक को ब्लड टेस्ट करने के लिए आधुनिक मशीन समर्पित की गई जिससे रक्त की संपूर्ण जांच मात्र 35 मिनट में हो जाएगी। इस कार्य के लिए मेहता परिवार का अभिनंदन विधायक मनीषा पंवार, महापौर घनश्याम ओझा, समाजसेवी घेवर चंद कानूगो द्वारा किया गया। कार्यक्रम में नीलम मेहता ने मानव सेवा संस्थान को माननीय कल्याण से जुड़े सेवा कार्य करने के लिए 51 हजार का चेक समर्पित किया। कार्यक्रम में मंच संचालन अशोक पारख ने किया।

 

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