राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के सात दशक पूरे

जोधपुर। राज्य में न्याय के सर्वोच्च मंदिर राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के गुरुवार को 70 वर्ष पूर्ण हो गए है। आज ही के दिन 29 अगस्त 1949 को तत्कालीन राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना की गयी थी। स्थापना के साथ ही 29 अगस्त को ही मुख्य न्यायाधीश कमलकांत वर्मा सहित कुल 12 जजो को जोधपुर में शपथ दिलायी गई। जस्टिस कमलकांत वर्मा इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस थे।

15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने के बावजूद 20 रियासतों के राजपूताना और ब्रिटिश राज सहित मत्स्य राज्य को एक करने के प्रयास किए जा रहे थे। सरदार पटेल के प्रयासों से 30 मार्च 1949 को राजस्थान राज्य की स्थापना हुई लेकिन मत्स्य राज्य 15 मई 1949 को शामिल हुआ। इसके साथ ही जयपुर को राजनीतिक राजधानी तथा जोधपुर को न्यायिक राजधानी बनाने की घोषणा की गई। उदयपुर के महाराणा को महाराज प्रमुख तथा जयपुर के राजा सवाई मानसिंह को राजप्रमुख घोषित किया गया। राज्यों के बीच किए गए इस पहचान के समझौते के चलते जयपुर में स्थापित हाईकोर्ट को जोधपुर में स्थापित किया गया।

आजादी के बाद जब राजस्थान राज्य का पुर्नगठन हुआ तो रियासतों में बटे हाईकोर्ट को भी एकीकृत कर दिया गया। यूं तो राजस्थान का पहला हाईकोर्ट 1948 में उदयपुर में बना था। जिसमें 5 जज सुनवाई करते थे लेकिन 30 मार्च 1949 को वृहद राजस्थान के अस्तित्व में आने के साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट का भी पुर्नगठन किया गया। जोधपुर को न्यायिक राजधानी बनाते हुए 29 अगस्त 1949 को हाईकोर्ट की स्थापना की गयी। इलाहाबाद हाईकोर्ट से रिटायर्ड हो चुके और उदयपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कमलकांत वर्मा को ही मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने और योग्यता अनुसार उम्र ज्यादा होने के चलते जस्टिस वर्मा को हटा दिया गया। 1949 से लेकर 1952 तक जोधपुर में हाईकोर्ट की मुख्यपीठ के साथ साथ जयपुर, उदयपुर और कोटा में बैंच कार्यरत थी।धीरे-धीरे कोटा, उदयपुर की बैंच को समाप्त कर दिया गया। 1958 में तत्कालिन चीफ जस्टिस के एन वांचू ने जयपुर बैंच को भी समाप्त कर दिया और इस तरह 31 जनवरी 1977 तक जोधपुर में ही राजस्थान हाईकोर्ट रहा। लंबे समय तक चले संघर्ष के बाद आखिकार 1977 में जयपुर बैंच को फिर से स्थापित किया गया।

29 अगस्त 1949 को जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट का उद्घाटन :- राजप्रमुख सवाई मानसिंह ने 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच का उद्घाटन किया और इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज कमलकांत वर्मा को मुख्य न्यायाधीश की शपथ दिलाई गई जबकि अन्य रियासतों को प्रतिनिधित्व देते हुए जोधपुर के नवल किशोर व अमरसिंह जसोल, जयपुर के केएल बाफना व इब्राहिम,उदयपुर के जेएस राणावत और सार्दुलसिंह मेहता, बूंदी के डीएस दवे, बीकानेर के त्रिलोक दत्त, अलवर के आनंद नारायण कौल, भरतपुर के केके शर्मा और कोटा के खेमचंद गुप्ता को हाईकोर्ट जज की शपथ दिलाई गई।

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