सत्संग महाकुंभ के विशेषांक का विमोचन

जोधपुर। संत चंद्रप्रभ महाराज ने कहा कि हमारा आरोग्य मन, मस्तिष्क और पेट से जुड़ा है। नब्बे प्रतिशत रोगों का कारण हमारा पेट ही होता है। निर्मल विचार मन-मस्तिष्क को स्वस्थ रखते हैं और सात्विक आहार हमारे पेट को। हम जैसा अन्न खाते हैं वैसा ही हमारा तन-मन होता है। जो सीमित खाता है वह ज़्यादा जीता है। संत चंद्रप्रभ संबोधि धाम में आयोजित आरोग्य लाभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग जीने के लिए खाते हैं, कुछ खाने के लिए जीते हैं। वह भोगी है जो खाने के लिए जीता है पर जो जीने के लिए संयमित खाता है वह योगी है। रसोई घर हमारे स्वास्थ्य का नियंत्रण-कक्ष है। कृपया किचन में किच-किच मत कीजिए। अग्नि देव के इस मंगलगृह में घर के सब सदस्य मिलजुल कर भोजन बनाइए और फिर उसे प्रभु का प्रसाद मानकर ग्रहण कीजिए। स्वाद के लिए खाना अज्ञान है, जीने के लिए खाना बुद्धिमानी है, पर संयम की रक्षा के लिए खाना साधना है। होटल में खाने से बचिए। याद रखिए, जो होटल में खाते हैं उनको हॉस्पिटल में मरना पड़ता है। फिर भी होटल में खाना खाने का मन कर रहा हो तो जहां खाना बनता है वहां जाकर देखिए फिर आप कभी होटल में खाना खाने का नाम भी नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि भोजन हमेशा सीधी कमर बैठकर कीजिए। औरों को खिलाकर खाइए और मौनपूर्वक भोजन कीजिए। भोजन करते समय पेट को चौथाई खाली भी रखिए। कम खाइए और सुखी रहिए। एक बार योगी खाता है दो बार भोगी खाता है और बार-बार खाने वाला स्वत: रोगी हो जाता है। शादी-विवाह के भोज में ज़्यादा गरिष्ठ भोजन मत कीजिए। उसने भले ही 40 तरह के आइटम बनाए हों पर आप उसमें से 10 का ही उपयोग कीजिए। यह सोचने की बेवकूफी मत कीजिए कि पराया माल मिलना दुर्लभ है शरीर तो फिर भी मिल जाएगा। दोपहर के भोजन के बाद भले ही आराम कीजिए पर शाम को भोजन करके ज़रूर टहल लीजिए। जहां तक हो सके रात्रि-भोजन से बचिए आप जीवन में 100 बीमारियों से बचे रहेंगे।

इस अवसर पर गांधी मैदान में आयोजित हुए 52 दिवसीय सत्संग महाकुंभ के विशेषांक का विमोचन लाभार्थी सुखराज नीलम मेहता, संबोधि धाम के महामंत्री अशोक पारख, सचिव सरूप चंद बछावत, जुगल किशोर जांगिड़, देवेंद्र गेलड़ा, जेएल राठी, पवन मेहता, त्न नवरतन मानधना, जीवाराम जांगिड़ आदि ने किया। इस दौरान सेवा भारती जोधपुर के तत्वावधान में आयोजित 1251 कन्याओं के पूजन के पोस्टर का विमोचन किया गया।

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