कांट्रेक्टरों की लापरवाही से एक और मजदूर की जान खतरे में!

Sarla Silvassa
Sarla Silvassa

संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली की कंपनियों में आए दिन सेफ्टी सामग्री के अभाव में मजदूरों की मौत के मामले सामने आते रहे है। कभी ठेकदार की लापरवाही तो कभी इकाई प्रबंधन की दादागिरी तो कभी अधिकारियों की कमाऊनीति का शिकार होते हुए समय समय पर श्रमिकों को देखा गया है। अब श्रमिक संबन्धित समस्याओ से जुड़ा ऐसा ही एक मामला पिपरिया स्थित सरला कंपनी में देखने को मिला है।

बताया जाता है कि, लेबर कॉन्ट्रैक्टरों और कंपनी संचालकों की लापरवाही से लगातार श्रमिकों की जान जोखिम में देखी गई, सरला कंपनी के अधिकतर मामलों में लेबर कॉन्ट्रैक्टरों की लापरवाही सामने आती रही, सरला कंपनी में लेबर कॉन्ट्रैक्टरों की वजह से पहले भी घटनाएं हुई लेकिन कंपनी संचालक एवं श्रम विभाग के अधिकारी जोशी को मिलने वाले राजनीतिक जोश ने मामलो को नजरअंदाज कर दिया।

सरला कंपनी के लेबर कॉन्ट्रैक्टरों की संख्या कितनी है, अंदर कितने मजदुर काम करते है, श्रम विभाग के पास इसका भी पूरा रिकॉर्ड नहीं है। इकाइयो में हादसे होते हैं और मामले की जांच भी की जाती है। मजदूर के परिजनों से लेबर कॉन्ट्रैक्टर और कंपनी संचालक समझौता कर लेते हैं या फिर बिना किसी ठोस कार्रवाई के फाइल बंद हो जाती हैं। आलम यह रहता है की जो सुधार होना चाहिए वह नहीं होता और समझोते का दंश किसी और मजदूर को झेलना पड़ता है।

सेफ्टी सामग्री एवं ई.पी.एफसे वंचित सरला कंपनियों के मजदूरों पर क्यों नहीं पडती दानह प्रशासन की नजर

बताया जाता है कि अभी हाल ही में एक गैरजिम्मेदार लेबर कॉन्ट्रैक्टर के अंतर्गत कार्य करने वाले एक मजदुर, ड्यूटी के वक्त गिर कर गंभीर रूप से घायल हो गया है। जिसका सूरत के अस्पताल में इलाज चल रहा है। उक्त श्रमिक के साथ होने वाली दुर्घटना का ज़िम्मेवार किसे समझा जाए? क्या श्रम विभाग के अधिकारी ने मामले में ईमानदारी से जांच की? क्या श्रम अधिकारी जोशी में मामले में ठोस कार्यवाही की? या फिर इस मामले में बंद लिफ़ाफ़ा लेकर अपनी ऐशगाह आबाद की गई? सरला कंपनी में काम करने वाले अधिकतर मजदूरों का ई.पी.एफ नहीं काटा जाता है और अगर कोई मजदुर अपने हक की बात करता है तो उसे मारने-पीटने की धमकी दी जाती है है? अब जिनका पी-एफ कंपनी और ठेकदार मिलकर खा गए उसमे दानह श्रम विभाग के अधिकारियों का हिस्सा था या वापी पी-एफ कार्यालय में बैठे अधिकारियों का? यह तो जांच का विषय है। वैसे जिस तरह की चर्चाए हो रही है उसे देखकर तो यही लगता है की सरला कंपनी के लेबर कांट्रेक्टरों की मनमानी दिन प्रतिदिन बढती जा रही है।

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कार्य के दौरान अगर कोई मजदुर घायल या उसकी मृत्यु हो जाती है तो उसे उसके हक का मुआवजा भी नहीं मिलता है।

बताया जाता है कि, सामाजिक श्रमिक सुरक्षा योजना के तहत फैक्टरी में दुर्घटना में मौत पर ५ लाख रुपए और घायल को उसके घायल होने की प्रतिशतता के आधार पर सरकार मुआवजा देती है। कंपनी संचालक और लेबर कॉन्ट्रैक्टर को  भी मुआवजा देना होगा जो कि कर्मचारी की उम्र और उसकी सेलरी के हिसाब से देना होता है। इसके अलावा ई.पीए.फ व बीमा आदि से भी राशि उपलब्ध होती है। दुर्घटना किसी की गलती से भी हुई हो फैक्टरी एक्ट के तहत जुर्माना फैक्टरी मालिक और लेबर कॉन्ट्रैक्टर को ही भुगतना होगा।

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इस कंपनी में श्रमिकों से १२ घंटे कार्य करवाया जाता है किंतु उन्हें पगार ८ घंटे का ही दिया जाता है। नियमानुसार कंपनी में कार्यरत सभी श्रमिकों से ८ घंटा काम करवाना चाहिए, इन्हें सरकार द्वारा निर्धारित न्युनतम वेतन पी.एफ सहित तमाम सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए लेकिन सरला फाइबरर्स नामक कंपनी प्रबंधन द्वारा १००० में से लगभग ५०० से भी कम श्रमिकों को पीएफ की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसमें कंपनी प्रबंधन के साथ लेबर कांट्रैक्टरों की भी मिलीभगत है। इस कंपनी में प्रशासन द्वारा निर्धारित वेतन भी लेबर कांट्रैक्टरों द्वारा श्रमिकों को उपलब्ध नहीं कराई जाती है। सरला कंपनी का एक ही पीएफ अकाउंट है जिसके जरीए लघभग ५०० श्रमिकों को ही पीएफ नसीब होता है। इस कंपनी में लेबर कांट्रैक्टरों द्वारा श्रमिकों का जमकर शोषण जारी है। यह सब देखकर लगता है कि सरला कंपनी के लेबर कॉन्ट्रैक्टर यह समझ बैठे है कि वह कंपनी और प्रशासन को जेब में लेकर घूमते है तभी आधे से अधिक लेबरों का पी-एफ नहीं काटा जाता। दानह प्रशासन को चाहिए की मामले में तत्काल संज्ञान लेकर, जिस श्रमिक का इलाज़ सूरत के अस्पताल में चल रहे है उसे न्याय दिलाए और श्रमिकों का शोषण करने वाले ठेकेदारो तथा इकाई प्रबंधन पर कठोर कार्यवाही करें।

वही संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली में स्थित इकाइयो में काम कर रहे श्रमिकों के साथ अब तक कुल कितने हादसे हुए कुल कितनी दुर्घटनाए हुई तथा कुल कितने श्रमिकों ने अपनी जान गवाई? अब इस मामले की जानकारी भी श्रम विभाग के अधिकारी को डिजिटल इंडिया के तहत सार्वजनिक कर देनी चाहिए। शेष फिर।