23 करोड़ में बनने वाले ब्रिज का ठेका 35 करोड़ में….

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दानह: पत्रकार रणवीरसिंह।
सिलवासा लोक निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता शंकर भाई कितना कमीशन लेते है, और उस कमिसन की जानकारी सचिवालय में बैठे किस किस अधिकारी को है इसका खुलासा क्रांति भास्कर पहले ही कर चुका है, और इसी मामले में दानह सतर्कता विभाग ने जांच भी शुरू की है, जिसकी फाइल अभी तक अधीक्षक अभियंता संजय कुमार टेबल से हिली भी नहीं की एक और घोटाला सामने आ गया।

बताया जाता है की दमणगंगा नदी पर दूधनी-बिलदेरी को जोड़ने के लिए बनने वाले ब्रिज में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षक अभियनता संजय कुमार एवं अभियंता एस एस भोया ने बड़े घोटाले को अंजाम देने की योजना बनाई है! उक्त ब्रिज की एस्टिमेट कोस्ट 32,62,86,689/- बताई जाती है, हालांकि गुजरात में चल रहे एस-ओ-आर तथा दमन-दीव व दानह के डी-एस-आर के मुताबिक यह टेण्डर अधिकतम 23,81,89,243/- होना चाहिए था। इस मामले को देख कर लगता है की अधीक्षक अभियंता संजय कुमार था कार्यपालक अभियंता भोया ने लगभ 23 करोड़ की लागत वाला टेण्डर 32 करोड़ से अधिक राशि में दे दिया। अब क्या इन दोनों आंकड़ों में जो दस करोड़ के आस पास की असमानता है वह अधीक्षक अभियंता और भोया का हिस्सा है या कुछ और इसका जवाब तो प्रशासन को देना चाहिए।
अधिकतर टेण्डर के एस्टिमेट कोस्ट से कम दर एवं मूल्यांकन पर टेण्डर अदा किए जाते है लेकिन यहां माजरा कुछ और ही है, यहां तो टेंडर की एस्टिमेट कोस्ट भी धरी के धरी रह गई और अधिकारियों का लालच और भरष्टाचार इतना बढ़ गया की एस्टिमेट कोस्ट से भी लगभग प्रतिशत अधिक लागत यानि 35,72,83,924/- में दे दिया गया। यानि डी-एस-आर के एस्टिमेट कोस्ट से लगभग 3 करोड़ अधिक।
इस ब्रिज में लगभग 12 करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार किया जा रहा है एसा इस मामले को देखकर प्रतीत होता है, लेकिन घोटाला केवल टेण्डर की रकम का नहीं है, यहां के भ्रष्ट अधिकारियों ने नियमों को तरोड-मरोड़ बस अपना उल्लू सीधा करने का काम किया, बताया जाता है की इसी ब्रिज में भ्रष्टाचार करने के लिए एक और आधार तैयार किया गया, वह है टेंडर कंडीशन के मुताबिक सिमिलर वर्क किया हुआ प्रतिभागी ही भाग ले सकता था। इसमे भी एक ही कंपनी के पास सिमिलर वर्क का एक्सपीरियंस था, तो फिर भी एक दूसरी कंपनी से टेण्डर भरवाया गया जिसके पास सिमिलर वर्क एक्सपीरियंस नहीं था, इस लिए प्री-क्वालिफाइड बीड में टेण्डर सिंगल पार्टी हो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
क्यों की सिंगल बीड हने की सूरत में फर्स्ट कॉल होने की वजह से टेण्डर रद्द हो जाता।
इसलिए नियम की अनदेखी करके दुरसी पार्टी जो क्वालिफाइड नहीं थी उसको जबरन नियमों की अनदेखी करके क्वालिफाइड कराया गया और टेंडर अधिकतम कमीशन देने वाले को देने की कार्यवाही पूरी की गई!
अब इस पूरे मामले में प्रशासक इस मामले की जांच करवाएंगे, या फिर अब तक चली आ रही परंपरा के अनुसार संदीप कुमार इस मामले में अभी अपनी टांग बीच में डाल अधीक्षक अभियंता संजय तथा कार्यपालक अभियंता भोया का प्रशासक के साथ सेटलमेंट कारेंगे?

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