राजनीति में 24 कैरेट की गुंजाइश किसी दल में नहीं हैं

जयपुर। प्रदेश भाजपा में इन दिनों लीडरशिप को लेकर जंग चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पक्ष में कई नेता और समर्थक मुखर हो रहे हैं। भरतपुर और कोटा संभाग के साथ ही जयपुर संभाग के नेता भी राजे के पक्ष में मुखर हुए हैं। इस बीच प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने प्रदेश की लीडरशिप को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज राजस्थान की लीडरशिप का नेतृत्व राजस्थान की यूनिट नहीं करेगी, यह काम केंद्र को ही करना है। इसका मतलब सीधे—सीधे इस तरीके बयान पर केंद्र को सोचना है और संज्ञान में लेना है। केंद्रीय नेतृत्व इन बातों से अनभिज्ञ भी नहीं हैं।

ये भी पढ़ें-  अस्पतालों में बेड नहीं है, श्मशान में जगह नहीं है इसलिए कुत्तो के श्मशान में इंसानों का अंतिम संस्कार।

पूनियां ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम कैडर की पार्टी हैं, डिसीप्लेन की पार्टी हैं। अब पार्टी में इस तरह की छुटपुट घटनाएं सियासी होती हैं। राजनीति में 24 कैरेट की गुंजाइश किसी दल में नहीं हैं। लेकिन हमारी पार्टी कुछ अलग हैं। इस तरीके की कोई चीज आती है तो उसका पार्टी स्तर पर कोई समाधान जरूर होगा। उन्होंने कहा कि बयान और कामकाज की एक मर्यादा राजनीति आर पार्टी में बनी रहनी चाहिए। इसके लिए कोई कोड नहीं बना हुआ है। ना ही कोई संवैधानिक अड़चन है। यह सेल्फ डिसीप्लेन हैं और आदमी को मर्यादा में रहना चाहिए। दूसरा आज मैं कुछ गलत करता हूं कहता हूं तो वो रिकॉर्ड में है। केंद्र का नेतृत्व निश्चित रूप से इसे संज्ञान में लेता ही होगा।

ये भी पढ़ें-  जल्द राशन कार्ड से देश की किसी भी दुकान से ले सकेंगे अनाज

पार्टी में बढ़ रही दरार के उप चुनाव पर प्रभाव से पूनियां ने साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र अलग मिजाज के हैं। पार्टी वहां पूरी तैयारी कर रही है। इन बयानों का सीधे-सीधे कोई असर नहीं होगा। पार्टी में ना ही कोई विग्रह नहीं है। रही बात केंद्र की तो कुछ बातें केंद्र के संज्ञान में हैं और कुछ पूछेंगे तो बता देंगे।

ये भी पढ़ें-  दिल्ली मेट्रो बनी विश्व की पहली एकमात्र पूर्ण 'हरित मेट्रो प्रणाली'

कांग्रेस एक वंश की पार्टी है

पूनियां ने कहा कि इस तरीके से चर्चा को सियासी हवा दी गई हैं। हमारी पार्टी को कांग्रेस से कम्पेयर नहीं किया जा सकता हैं। उनके यहां जो विग्रह है वो जगजाहिर है। वो एक वंश की पार्टी है। वहां लोग गुलामों की तरह उछलते हैं। हमारी पार्टी आज से नहीं श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर अमित शाह, जेपी नड्डा तक पार्टी का एक निश्चित प्रोटाकॉल है। उसमें रहकर ही नेता और कार्यकर्ता काम करते है। जबकि वहां पीसीसी चीफ को हटाना पड़ा, आपस में मुकदमें दर्ज हुए। सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट में आज भी मामले चल रहे हैं।