दमण-दीव कि राजनीति में यह नामुमकिन भी हुआ मुमकिन।

संघ प्रदेश दमण-दीव कि राजनीति सदैव ही अन्य प्रदेशों कि राजनीति से अलग रही है। उक्त प्रदेश कि राजनीति और राजनेताओं को देखकर अक्सर लोग यह कहते रहे है कि यहाँ के नेताओं को जनता के विकास से कोई सरोकार नहीं, यहाँ के अधिकांश नेता सर्व प्रथम सवय का विकास चाहते है और सवय का विकास करते रहे है। वैसे इस प्रकार कि राजनीति पर, कुछ हद तक विराम लगा है, और यह विराम उस वक्त लगा जब केंद्र कि सत्ता में मोदी सरकार आई। देश में भाजपा कि सरकार बनने के बाद राजनीति में भी एक जबर्दस्त घुमाव, परिवर्तन देखने को मिला, लेकिन परिवर्तन इतना जबर्दस्त होगा यह तो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था।

आज आलम यह है कि कभी भाजपा का झण्डा लगाने वाले को पीटने वाले नेता आज भाजपा कि और टक-टकी लगाए बैठे है और किसी भी तरह भाजपा में शामिल होकर अपना तथा अपने परिवार का राजनीतिक अस्तित्व बचाना चाहते है। अब तक कई कांग्रेसी नेता भाजपा में शामिल हो चुके है तो कई कतार में खड़े है कि भाजपा उन्हे अंदर बुलाए और उन्हे भी भाजपा का चोला नसीब हो। अब जो शामिल होना चाहते है उन्हे भाजपा स्वीकार करें या ना करें यह तो भाजपा के नेताओं के निर्णय और नीति पर निर्भर करता है लेकिन भाजपा में शामिल होने कि ऐसी होड़ शायद ही पहले किसी ने देखी होगी जैसी अब दिखाई दे रही है। अभी कुछ समय पहले दमण में ज़ोरों से यह चर्चा चली थी कि डाहया पटेल के पुत्र जिग्नेश पटेल उर्फ जिगगु भाजपा में शामिल होने वाले है, इस चर्चा को काफी समय बीत चुका है लेकिन अभी भी लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या जिग्नेश पटेल को भाजपा में लेकर जिग्नेश पटेल और जिग्नेश पटेल के परिवार पर लगी भ्रष्टाचार कि कालिख को भाजपा साफ करेगी?

वैसे अभी कुछ दिनों पहले ही प्रधान मंत्री श्री मोदी का जन्म दिन था, इस जन्म दिन के अवसर पर दमण के कई क्षेत्रों में उन नेताओं ने भी श्री मोदी जी को जन्म दिवस कि बधाइयाँ बांटी जिनहोने कभी भी भाजपा कि नीतियों का समर्थन नहीं किया। दाबेल क्षेत्र में जिग्नेश पटेल ने भी पोस्टर लगवाकर मोदी जी को जन्म दिन कि बधाइयाँ दी। जनता यह सब देखकर सकते में है कि यह न मुमकिन मुमकिन कैसे हुआ? कभी भाजपा कार्यकर्ताओं को आंखे दिखाने वाले आज भाजपा के लिए पलके बिछाए बैठे है। अभी कुछ समय पहले ही लोक सभा चुनाव हुए है उन चुनावों में जिग्नेश पटेल के पिता डाहया पटेल तथा जिग्नेश पटेल के भाई, केतन पटेल ने भाजपा कि नीतियों और मोदी सरकार का कितना विरोध किया यह भी शायद जिग्नेश पटेल भूल गए है या फिर जिग्नेश पटेल यह समझ रहे है कि जनता और भाजपा दोनों को कुछ याद नहीं है। बड़े ताज्जुब कि बात है कि समय समय पर भाजपा और मोदी जी को कोसने वाले आज किसी भी तर्ज पर जाकर भाजपा का दामन थामना चाहते है और वह इसका कारण यह बताते है कि वह जनता का विकास करना चाहते है जैसे कि वह भाजपा में शामिल नहीं हुए विकास ही नहीं होगा!

वैसे उक्त मामले में दमण-दीव भाजपा के वरीय नेता का कहना है कि कांग्रेस के पूरे कुनबे में दीमक लगी देख अब कुछ एक नेता अपनी ऐशगाह आबाद रखने के लिए भाजपा कि शरण में आना चाहते है और वह यह समझते है कि उनके वह घर, भाजपा में शामिल होने से बच जाएंगे जो जनता के खून-पसीने कि कमाई और भ्रष्टाचार से बने है? तो यह बिलकुल गलत है। दमण-दीव के एक प्रबुद्ध नेता ने यह भी कहा कि दमण-दीव कि राजनीति में भी अब धीरे-धीरे भ्रष्टाचार अपनी जड़े फैला रहा है और उन जड़ों के माध्यम से कुछ लोग अपने स्वार्थ शिद्ध करना चाहते है लेकिन ऐसा होगा नहीं। भाजपा के शीर्ष नेताओं को सब पता है। भाजपा के साथ जनता है, और कुछ लोग उस जनता से अपनी बात मनवाने के लिए भाजपा का सहारा लेना चाहते है। ताकि जब वे भाजपा का चोला पहन जनता से रु-ब-रु हो तो उन्हे भाजपा के नाम पर जनता का समर्थन मिल सके। लेकिन भाजपा के शीर्ष नेता किसी भी ऐसे व्यक्ति या परिवार को स्वीकार नहीं करेगी जो भाजपा में सिर्फ इस लिए शामिल होना चाहता है ताकि उसकी ऐशगाह आबाद रह सके।

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