कई घूसखोरों पर चला कानून का डंडा, कई अधिकारी सलाखों के पीछे।

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नई दिल्ली अगर आप गलत तरीके से कमाई करते हैं तो एक न एक दिन आपको सलाखों के पीछे जाना ही पड़ेगा। 2019 में हुए घूसखोरी के मामले में चाईबासा जेल में बंद अलग-अलग सरकारी विभागों के पदाधिकारी इसके बड़े उदाहरण हैं। गिरफ्तार लोगों में सबसे ज्यादा 5 इंजीनियर हैं जबकि एक पुलिस पदाधिकारी व एक अधिवक्ता है।

दारोगा योगेंद्र राय ने दुकान की मरम्मत को मांगी थी 20 हजार घूस

जमशेदपुर के साकची थाना के दारोगा योगेन्द्र राय को 10 हजार रुपये घूस लेते एसीबी की टीम नें 23 दिसंबर 2019 को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

सड़क के लिए जेई दीपेश ने मांगी थी 4000 रुपये घूस

एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने चाईबासा सदर प्रखंड (पश्चिमी सिंहभूम) के सहायक अभियंता दीपेश कुमार सोनकर को 4000 रुपये घूस लेते पांच अक्टूबर 2019 गिरफ्तार किया था। दीपेश वर्तमान चाईबासा जेल में हैं।

बिजली विभाग के आलोक रंजन ने कनेक्शन व लोड बढ़ाने की एवज में मांगी थी रिश्वत

24 सितंबर को बिजली विभाग मनोहरपुर के एसडीओ आलोक रंजन को 20 हजार रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए। उन्होंने बिजली कनेक्शन को फिर से जोड़ने व लोड बढ़ाने के एवज में आवेदन करने वाले लाभुक जूलियस दास से घूस मांगी थी। निगरानी की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया और चाईबासा जेल भेजा था।

घूसखोर ईई सोनेलाल को मिली है छह साल सश्रम कारावास की सजा

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29 मार्च 2014 में एसीबी ने चाईबासा के कार्यपालक अभियंता सोनेलाल दास को उनके कार्यालय से जिला स्कूल मरम्मत के ठेकेदार अमलाटोला निवासी जितेंद्र चौबे से 80 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। फिलहाल सोनेलाल को छह साल सश्रम कारावास व एक लाख का जुर्माना भी लगाया है।

ईई मनोज विद्यार्थी ने पीसीसी सड़क के लिए मांगे थे 1 लाख 60 हजार

एंटी करप्शन ब्यूरो ने 20 जुलाई 2019 को लघु सिंचाई प्रमंडल चाईबासा के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार विद्यार्थी को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

जेई वर्मा के घर से एसीबी को मिले थे 2 करोड़ 45 लाख 44 हजार

14 नवंबर को मानगो स्थित आनंद बिहार कॉलोनी निवासी और सरायकेला जिले में पदस्थापित ग्रामीण विकास विभाग के जेई सुरेश वर्मा को 10 हजार रुपये घूस लेते पकड़ा गया था।

जेल में ये हैं बंद

चाईबासा जेल में वर्तमान में वकील समेत सात अधिकारी जेल में बंद हैं। इनमें साकची थाना के दारोगा योगेंद्र राय, मनोहरपुर में बिजली विभाग के एसडीओ आलोक रंजन, लघु सिंचाई प्रमंडल चाईबासा के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार विद्यार्थी, सरायकेला जिले में पदस्थापित ग्रामीण विकास विभाग के जेई सुरेश वर्मा, जमशेदपुर के वकील आलोक रंजन, भवन प्रमंडल चाईबासा के कार्यपालक अभियंता सोनेलाल दास और सदर प्रखंड (पश्चिमी सिंहभूम) के सहायक अभियंता दीपेश कुमार सोनकर शामिल हैं। वैसे यह मामला उन सब के लिए एक सबक है जो यह समझते है कि घूसखोरी जारी रखने के बाद भी उन्हे उनका बाल भी बांका नहीं होगा।

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पूरे परिवार को मिली भ्रष्टाचार कि सजा

वर्ष 2014 में भ्रष्टाचार पर एक अमह फेसला सामने आया था। राजस्थान कि एक स्पेशल कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए गए एक अफसर और उसके परिवार को छह-छह साल जेल और 25-25 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। अदालत ने सुरेंद्र शर्मा को भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) सपठित धारा 13(1)(ई) के तहत भ्रष्ट साधनों से काली कमाई का दोषी माना, जबकि उनकी पत्नी अरुणा, बेटे गौरव व बेटी गरिमा पर आईपीसी की धारा 109 के तहत भ्रष्टाचार के लिए उकसाने के आरोप साबित हुए। न्यायालय के इस फेसले कि जमकर सराहना हुई। लेकिन कुछ लोग आज भी भ्रष्टाचार करते हुए यही समझते है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता! दरअसल यह उनका वहम नहीं है हक़ीक़त यह है कि अधिकतर मामलों में रिश्वत कि मांग करने पर जनता शिकायत करने से ही परहेज कर लेती है क्यो कि आज भी जनता को यही लगता है कि रिश्वत मांगने वाले कि जरूर ऊपर तक सेटिंग होगी, लेकिन जनता को यह भी समझे कि जरूरत है कि न्यायालय से ऊपर कोई नहीं।