मध्य क्षेत्र विधुत कंपनी से आरटीआई एक्ट, 2005 के माध्यम से प्राप्त जानकारी से खुलासा हुआ है कि, भोपाल गाँधी नगर जेल एवं जेल में बने आवासो हेतु एक ही बिजली का मीटर लगा हुआ है जिससे जेल को भी बिजली मिलती है और आवासीय मकानों को भी। मध्य क्षेत्र विधुत कंपनी का एक मात्र 33 केव्ही, कनेक्शन क्रमांक 0204904111 लगा हुआ है जो एक हाई टेंशन कनेक्शन है।
गाँधी नगर जेल भोपाल में जिनका महीने का बिल 38 लाख रुपए तक आ रहा है। एक तरफ तो बजट अभाव के चलते पूरे मध्य प्रदेश में ऐसी कितनी जेले है जहां सी.सी.टी.वी. कैमरे तक नहीं लग पा रहे है, वही जब से गाँधी नगर जेल बनी है, तब से आज दिनांक तक एक ही मीटर से जेल एवं आवासीय मकानो को बिजली प्रदाय की जा रही है, जो आम जनता के पैसो का दुरुपयोग ही है।
यह बड़े आश्चर्य की बात है कि, 15 साल से लगातार चल रहे इस भ्रष्टाचार का अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को ज्ञान नहीं हो पाया है? या ये भ्रष्टाचार मिलीभगत से चल रहा है जैसे – तू मेरा ख्याल रख, मैं तेरा रखता हूँ?
आम जनता के भरे हुए टैक्स का किस हद तक दुर्रूपयोग हो रहा है यह प्रमाण आपके सामने है। एसे भ्रष्टाचार पर सरकार को लगाम लगाना जरूरी है। ताकि जनता के टेक्स के पैसो का सदउपयोग हो सके। जहां एक ओर प्रदेश के नागरिक अपनी गाड़ी कमाई से बिजली का बिल भर रहे है वही कुछ गैर जिम्मेदार लोक सेवको के भ्रष्टाचार के कारण जेल विभाग के निवास का बिल का भार भी सरकारी खजाने पर पड़ रहा है।
क्या बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही नही बनती है की एसे भ्रष्टाचार के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही करें?
यह भ्रष्टाचार प्रकाश मे आने के बाद भी यदि विभाग के जिम्मेदार आला अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं करते है तो, यह माना ही जाएगा की यह भ्रष्टाचार बिजली विभाग और जेल विभाग की मिली भगत से ही चल रहा है?