आरटीआई आवेदन पर प्राप्त जानकारी से ज्ञात हुआ है कि वर्ष 01.04.2019 से 31.03.2020 तक साइबर क्राइम पर लगभग 28542484 करोड़ रुपये खर्च किये गए है। प्राप्त जानकारी अनुसार वर्ष 2000 से आज दिनांक तक साइबर क्राइम में विचाराधीन शिकायतों की संख्या 2821 है। साइबर क्राइम पुलिस कोर्ट में 365 दिनों से ज्यादा समय होने पर भी जिन मामलो में चालान पेश करने में असमर्थ रही है, ऐसे मामलो की संख्या 167 है। महिलाओ की पुरुषो द्वारा बिना अनुमति उनकी फोटो कही और पोस्ट करने वाले मामलो की संख्या 2818 है। वर्तमान में मप्र साइबर क्राइम में एआईजी से लेकर आरक्षक तक कुल 241 अधिकारी पदस्त है, फिर भी बीते 10 वर्षो में विचाराधीन मामलो की संख्या 2821 है। पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल को चार पहिया वाहन 16, दो पहिया वाहन 18 इस तरह कुल 34 वाहन आवंटित किये गए है। एक वाहन 1564 टाटा सफारी 2012 एक महोदय के निवास कार्यालय में ड्यूटी के लिए भी दिया गया है। राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय की वाहन शाखा में उपलब्ध दो पहिया वाहनों की सूचि दिनांक 11.09.2020 की स्थिती में 0605 सुपर स्पेलेडर मोटर साइकिल 2010 मॉडल हॅस्टल भवन ड्यूटी 3687 सुपर स्पेलेडर मोटर साइकिल 2015 मॉडल महोदय के निवास कार्यालय ड्यूटी के लिए भी दिए गए है। मुख्यमंत्री पुलिस आवास योजना एवं हुडको योजना के अंतर्गत निर्मित 552 आवास गृह के आवंटन में से 30 मकान साइबर क्राइम को आवंटित है। इतनी सुविधा होने के बाद भी वर्ष 2000 से आज दिनांक तक 2821 शिकायते विचाराधीन है। साइबर क्राइम का गठन इसलिए किया गया था की साइबर क्राइम को रोका जा सके, परंतु साइबर क्राइम आम जनता का भरोसा लगातार खोता जा रहा है। शिकायत का निराकरण करने में असमर्थ साइबर क्राइम पुलिस पर, आम जनता के भरे हुए टैक्स से लगभग 28542484 करोड़ रुपये खर्च किऐ गए है। वर्ष 2000 से आज दिनांक तक 2821 शिकायते विचाराधीन है। वर्तमान कार्यप्रणाली से तो साइबर क्राइम में विचाराधीन शिकायतों की संख्या लगातार बढती रहेगी। क्या आम जनता के भरे हुए टैक्स के पैसे का साइबर क्राइम सदुपयोग कर रहा है अथवा दुरुपयोग? यह सरकार को निशित रूप से सोचना चाइए। क्योकि साइबर क्राइम पुलिस की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है? क्या साइबर क्राइम पुलिस ईमानदारी से कार्य कर रही है? क्या साइबर क्राइम आम जनता की परेशानी का निराकरण करने में असक्षम है? क्या साइबर क्राइम की स्वयं की कोई जवाबदारी नहीं है? क्या साइबर क्राइम सिर्फ मंत्रियो एवं वरिष्ट शासकीय अधिकारियो की शिकायतो पर ही कार्यवाही करने के लिए है? एसे कई सवाल आम जनता के समक्ष है। सरकार को इस ओर विशेष ध्यान देना चाइए। आज के डिजिटल युग में साइबर क्राइम के बढ़ते मामले चिंता का विषय है, परंतु उससे ज्यादा चिंता साइबर पुलिस की कार्यप्रणाली की है। यदि इस तरह से साइबर क्राइम के मामले पेंडिंग होते रहे तो एक समय एसा भी आएगा जब साइबर क्राइम पुलिस के पास शिकायत करना और नहीं करना एक समान हो जाएगा।