सेहमा सेहमा सा रहता है एक इंसान ना जाने क्यों डर रहा है !
सब का पेट भरने वाला किसान आज मर रहा है !
कभी कर्जे से परेशान तो कभी सरकार से परेशान होकर !
आज ना जाने बेचारा क्यों आत्महत्या कर रहा है !
सबका पेट भरने वाला किसान आज मर रहा है !
कभी बिजली पानी से परेशान तो कभी ब्याज खोरो से परेशान !
कभी बच्चों की शादी को लेकर परेशान डरा डरा सा लग रहा है !
सबका पेट भरने वाला किसान आज मर रहा है !
संस्कृति बचा के रखी है जिसने भारतवर्ष की आज तक !
उस अंधी हो चुकी सरकार से कुछ तो कह रहा है !
सब का पेट भरने वाला किसान आज मर रहा है !
समय रहते हम सब बचा सकते हैं इस अन्नदाता को सभी !
क्या कुछ कर पाएंगे हम किसानों के लिए यह सवाल उठ रहा है !
सब का पेट भरने वाला किसान आज मर रहा है