जैकलीन हों या राहुल गांधी, ED की घंटो तक चलने वाली पूछताछ का क्या है प्रोसेस

जैकलीन हों या राहुल गांधी, ED की घंटो तक चलने वाली पूछताछ का क्या है प्रोसेस

कांग्रेस नेता और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से इसी साल जून के महीने नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की लंबी पूछताछ चली। ED ने उनसे घंटो तक पूछताछ की। शिवसेना नेता संजय राउत और दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन से भी ईडी ने लंबी पूछताछ की थी। बॉलिवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीज से भी दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सात घंटे पूछताछ की। ईडी पिछले साल जैकलीन से कई घंटे की पूछताछ कर चुकी है। इतने देर तक पूछताछ का आखिर प्रोसेस क्या होता है। कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि ईडी की पूछताछ घंटों, दिनों और हफ्तों तक चलती है।

ED के पास क्या हैं अधिकार
ईडी पिछले कुछ समय से काफी सुर्खियों में है। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, शिवसेना सांसद संजय राउत, दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन और पिछले दिनों बंगाल में अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों पर ईडी ने छापा मारा। यदि ईडी के पास शक्तियों की बात की जाए तो एजेंसी को आर्थिक मामलों की जांच, कुर्की, जब्ती के साथ ही गिरफ्तारी का भी अधिकार प्राप्त है। नीरव मोदी, विजय माल्या केस में देखने को मिला कि ईडी ने उनकी संपत्ति कुर्क की। ED का मुख्यालय राजधानी दिल्ली में है। साथ ही 5 जोन में इसके कार्यक्षेत्र को बांटा गया है। पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी, दक्षिणी और मध्य क्षेत्र। एजेंसी के चीफ को प्रवर्तन निदेशक कहा जाता है।

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थाने को देनी होती है सूचना, फौरन एक्शन की छूट
ED देश की एकमात्र केंद्रीय एजेंसी है, जिसे राजनेताओं, सरकारी पदाधिकारियों, फिल्मी हस्तियों और बिजनेसमैन को बुलाने या मुकदमा चलाने के लिए सरकार से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। इसके पास पीएमएलए के तहत बिना किसी दोषसिद्धि के भी संपत्ति कुर्क करने की शक्ति है। गिरफ्तार होने पर जमानत मिलना बहुत मुश्किल है। सीबीआई जैसी एजेंसी को अमूमन केंद्र सरकार या फिर अदालत का आदेश मिलने पर किसी खास मामले की जांच के लिए संबंधित सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है लेकिन ईडी के मामले में ऐसा नहीं है। देश के किसी भी थाने में एक करोड़ या उससे ज्यादा की हेराफेरी का मामला दर्ज होने पर पुलिस उसकी जानकारी ईडी को देती है।

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वही ख़बर है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टीआरपी घोटाले को लेकर कोर्ट में दाखिल अपने आरोपपत्र में रिपब्लिक टीवी को क्लीन चिट दे दी है। ईडी की रिपब्लिक टीवी को यह क्लीन चिट ऐसे समय आई है जब देश में टीवी चैनलों द्वारा फैलाई जा रही हेट स्पीच (नफरती भाषा) पर बहस कर रहा है। रिपब्लिक टीवी पर खासकर अर्नब गोस्वामी के शो में होने वाली बहसों पर विवाद होते रहे हैं। अभी बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच के लिए टीवी एंकरों को जिम्मेदार ठहराते हुए सरकार को भी फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार इस मामले में मूक दर्शक बनी हुई है।

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खेर कुल मिलकर छापे मारने में महारथ हासिल कर चुकी ईडी को अब तक के सभी मामलों में एक प्रोग्रेस रिपोर्ट जारी करनी चाहिए ताकि पता चल सके कि एएम जनता के टैक्स के पैसे से प्रतिमाह समय पर वेतन लेने वाले अधिकारी ठीक तरह से अपना काम कर रहे है या नहीं।