अस्पतालों में बेड नहीं है, श्मशान में जगह नहीं है इसलिए कुत्तो के श्मशान में इंसानों का अंतिम संस्कार।

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प्रतिकात्मक फोटो

कोरोना काल में जनता के उन अधिकारियों का क्या हुआ जो उन्हे भारत के सविधान ने दिए। सबसे पहले बात करते है एक आम आदमी की मूलभूत जरूरतों की तो किसी भी व्यक्ति को जीने के लिए शुद्ध हवा, पानी और भोजन चाहिए। उसके बाद बात आती है स्वास्थ्य अधिकार, शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, मानव अधिकार जैसे अन्य अधिकारों की। भारत ही नहीं दुनिया के सभी देशों में जनता को अलग अलग प्रकार कि समस्याओं का सामना करना पड़ता है सरकार उन समस्याओं के समाधान के लिए जनता से टैक्स वसूलती है जनता समय पर टैक्स ना दे तो उन पर पेनल्टी लगाई जाती है लेकिन सरकार टैक्स लेकर समस्याओं का समाधान ना करें तो उन पर कोई पेनल्टी नहीं लगती, ऐसा क्यों है?

किस पर हत्या का मुकदमा चलाया जाएगा?
कोरोना कि वजह से जो लोग मर चुके है उनकी मौत का जिम्मेदार कौन है और जिनहे दवाएं नहीं मिल रही, अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे ऑक्सीज़न नहीं मिल रही या अन्य सेवाओं और सुविधाओं कि कमी से आने वाले समय में किसी कि जान चली गई तो उसकी मौत का जिम्मेदार मानकर किस पर हत्या का मुकदमा चलाया जाएगा? हादसे और हत्या दोनों में काफी अंतर है यह जनता जानती है लेकिन यदि किसी से किसी सेवा के बदले मनचाहा धन (टैक्स) वसूल किया गया हो और उसे वह सेवा और सुविधा नहीं मिल पा रही हो जिसके लिए उसने धन (टैक्स) दिया तो कानून के किसी पन्ने में तो इस तरह के मामले पर मुकदमा दर्ज करने की जानकारी होगी? या फिर सरकारों ने अपनी सुरक्षा के नाम पर मानव अधिकार का ही गला घोट दिया? सवाल कई है जो आपको किसी बड़े न्यूज चेनल, अखबार या वेबसाइट पर देखने को नहीं मिलेंगे क्यों कि जनता ने उन बड़े चेनलों, अखबारों और वेबसाइटों को इतने विज्ञापन दे दिए कि अब उनके पास उसी जनता के जरूरी सवाल दिखने का समय नहीं है ऐसा लगता है कि विज्ञापन के बोझ के तले वह सोध करने, खोज करने, सवाल करने और सच बताने कि परंपरा ही भूल गए।    

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शुद्ध हवा, शुद्ध जल, शुद्ध भोजन, यह तीनों जीवन के लिए संजीवनी है और इन तीनों के बिना स्वस्थ जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, लेकिन कोरोना काल से काफी पहले ही उद्योगों ने अपने लाभ के लिए इन तीनों मूलभूत संजीवनी को दूषित कर दिया। देश के विकास के नाम पर जंगल जलते रहे है वन कटते रहे, इमरते बनती गई, तालाब सिमटते गए।

शुद्ध हवा का अधिकार कहाँ है?
एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में वायु प्रदूषण की वजह से भारत में 16.7 लाख लोगों की मौत हुई है।  इतना ही नहीं वायु प्रदूषण अस्थमा का एक बड़ा कारण है। आज देश कोरोना से परेशान है अस्पतालों में ऑक्सीज़न की कमी से लोग मर रहे है। क्या उनकी जान जाने की वजह केवल कोरोना है अस्थमा और वायु प्रदूषण नहीं?

शुद्ध जल का अधिकार कहाँ है?
शुद्ध हवा के बाद अब बात करते है शुद्ध जल की तो, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में हर साल जल प्रदूषण के कारण 4.6 मिलियन लोगों की मौत होती है। भारत में भी हर साल 3 लाख के करीब लोग जल प्रदूषण के कारण मर जाते हैं।

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जानकारों की माने तो उधोगिक इकाइयों से बिना डिस्चार्ज किए प्रदूषण जल को सीधे नदियों में प्रवाह कर देना जल प्रदूषण का एक बड़ा कारण है, आम आदमी में भी अपने अपने शहर, गाँव की नदियों में उधोगिक इकाइयों का प्रदूषित जल देखता है लेकिन सरकारी अधिकारियों की कमाउनीति के सामने आम आदमी की एक नहीं चलती।

भोजन का अधिकार कहाँ है?
अब यदि बात करें अशुद्ध भोजन की तो इस मामले में के स्पष्ट आंकड़े अब तक सामने नहीं आए क्यों की भोजन का आधार है हवा और पानी। शुद्ध हवा और शुद्ध पानी के बिना शुद्ध भोजन की उम्मीद बेमानी है। वैसे आपको यह जानकार काफी आश्चर्य होगा की यदि अशुद्ध भोजन भी मिल जाए तो कई लोगो की जान बच सकती है! ऐसा इस लिए कहा जा रहा है क्यों की वर्ष 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में भूखे लोगों की तादाद लगभग 20 करोड़ से ज्यादा है और भारत की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा हर दिन भूखा सोने मजबूर है। यह आंकड़े कितने शर्मिंदा करने वाले है, लेकिन सरकारें विकास का दावा करती है और जनता ऐसे मीडिया का सपोर्ट करती है जो सरकार के हाथों की कठपुतली बना हुआ है।

आज जनता को स्वास्थ्य अधिकार कि जरूरत है, चिकत्सा के अधिकार कि जरूरत है, ऑक्सीज़न अधिकार कि जरूरत है उचित मूल्य में दवा, एंबुलेंस और अन्य जीवन रक्षक सेवाओं के अधिकार कि जरूरत है।  

देश कि जनता कोरोना से परेशान है। आर्थिक स्थिति दिन ब दिन खराब होती जा रही है। पिछले कोरोना काल में सरकार ने 20 लाख करोड़ के पेकेज कि घोषणा कि थी उस पेकेज से जनता को क्या मिला यह पता लगाने के लिए जनता किससे जांच करवाए? ताज्जुब कि बात तो यह है कि आज भी बड़े बड़े उधोग चल रहे है वह अपने विकास के लिए वायु, जल में प्रदूषण घोल रहे है मरने वालों में उनके भी परिजन होंगे लेकिन लगता है सिक्को कि खनक ने उनकी चीख-पुख़ार पर अंकुश लगा दिया। खेर सरकार का दावा है कि वह लगातार काम कर रही है लेकिन फिर लगातार मरने वालों कि संख्या क्यों बढ़ रही? स्थति यह आ गई है कि शमशान कम पड़ रहे है इस लिए दिल्ली में कुत्तो के शमशान में अब इंसानों का अंतिम संस्कार करने के लिए 50 प्लेटफार्म बनाए जा रहे है।

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आज तो आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि विकास किसका हुआ? करोड़ों लोगो के टैक्स के पैसे कहा गए? तो इसका जवाब आप जानते है। आपके शहर में आज भी कही ना कहीं सड़क, इमारत या अन्य कोई विकास कार्य चल रहा होगा उसमे कितना भ्रष्टाचार हो रहा है यदि आप नहीं जानते, तो जानकारी जमा कर अपने टैक्स का पैसा बचा सकते है वही पैसा बचेगा तो स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ऐसी सेवाओं पर खर्च किया जा सकता जो जीवन के लिए जरूरी है। कुल मिलाकर यह कह सकते है कि जो हो चुका है उसे तो कोई बदल नहीं सकता लेकिन जो होने वाला है उसे अवश्य जनता बदल सकती है। शेष फिर।