गुजरात में कांग्रेस को बड़ा झटका, सबसे सीनियर विधायक ने छोड़ी पार्टी; BJP में एंट्री

गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। मंगलवार को पार्टी के सीनियर लीडर और 10 बार के विधायक मोहन सिंह राठवा ने इस्तीफा दे दिया है।  बताया जा रहा है कि वह बीते कुछ दिनों से पार्टी से नाराज चल रहे थे। साथ ही खबर है कि राठवा जल्द बीजेपी में शामिल होंगे।

बता दें कि पिछले कई सालों से तीनों अहम पदों पर रहे हैं। 1989 में लोकसभा चुनाव रहने वाले नारन पूर्व रेल राज्य मंत्री रहे हैं। वहीं मोहनसिंह और सुखराम दोनों विपक्ष के नेता रहे हैं। हालांकि अब मोहन सिंह और नारन के बीच विवाद खड़ा हो गया है।

मोहन सिंह ने 2017 के चुनाव के बाद अपने फैसले की घोषणा कर दी थी। उन्होंने कहा था कि अब मैं युवाओं को मौका देना चाहता हूं। छोटा उदयपुर के सबसे वरिष्ठ और मौजूदा विधायक मोहन सिंह राठवा ने कहा था, ‘मैं अब चुनाव नहीं लड़ूंगा। नव युवाओं को मौका मिलना चाहिए। मैंने लगातार 11 बार चुनाव लड़ा, जिसमें से मैं 10 बार जीता हूं और जेतपुर पावी, बोडेली और छोटा उदयपुर तालुका के मतदाताओं ने मुझे सबसे अधिक बार जीताकर गुजरात विधानसभा में भेजा है। मैं अब 76 साल का हो गया हूं।

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गुजरात में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। 1 और 5 दिसंबर को राज्य में 182 सीटों पर मतदान होगा। 27 साल से सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबले का परिणाम क्या होगा यह तो 8 दिसंबर को वोटों की गिनती के बाद ही साफ होगा।

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सरपंच से शुरू हुआ था सियासी सफर

दिग्गज नेता मोहन सिंह राठवा के सियासी करियर की बात करें तो वे साल 1965 में सतुन ग्रुप ग्राम पंचायत के सरपंच निर्वाचित हुए थे. सरपंच निर्वाचित होने के साथ शुरू हुआ मोहन सिंह राठवा का सियासी सफर गुजरात विधानसभा तक पहुंचा. साल 1972 में मानेक तड़वी को हराकर जनता पार्टी के टिकट पर जैतपुर विधानसभा सीट से वे पहली बार विधायक निर्वाचित हुए.

साल 1975 की साल में  तत्कालीन वडोदरा जिले (अब छोटा उदयपुर ) की जैतपुर सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमन भाई पटेल को हराकर वे दूसरी बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए. चिमनभाई पटेल के खिलाफ मिली इस जीत ने मोहन सिंह राठवा के सियासी कद को गुजरात की सियासत में मजबूती से स्थापित कर दिया. वे बाबूभाई जशभाई पटेल के नेतृत्व वाली सरकार में मत्स्य पालन मंत्री बनाए गए. इसके बाद मोहन सिंह राठवा जनता पार्टी के टिकट पर साल 1980 और 1985 में विधायक बने.

मोहन सिंह राठवा 1990 के चुनाव में जनता दल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे और जीते. वे गुजरात सरकार में पंचायत और वन मंत्री बने. वे साल 1995  में छठी बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए. इसके बाद वे 1998, 2007, 2012 और 2017 में भी कांग्रेस के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए. गौरतलब है कि मोहन सिंह राठवा साल 1980 और 1985  में छोटा उदयपुर से जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार अमर सिंह राठवा के खिलाफ लोकसभा चुनाव भी लड़े थे लेकिन हार गए थे.

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2002 का चुनाव हार गए थे मोहन

मोहन सिंह राठवा का विजय रथ साल 2002 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के वेचात बारिया ने रोक दिया था. बीजेपी के वेचात ने गुजरात दंगों के बाद हुए चुनाव में मोहन सिंह राठवा को हरा दिया था. मोहन सिंह राठवा ने कुछ ही दिन पहले ये ऐलान किया था कि वे अब चुनावी राजनीति से दूर हो जाएंगे. इस बार चुनाव न लड़ने का ऐलान कर चुके मोहन सिंह राठवा अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिश में लगे थे. राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री नारण राठवा के बेटे संग्राम सिंह राठवा भी छोटा उदयपुर से टिकट की मांग कर रहे थे.