223 करोड़ के एफडी घोटाले में दिल्ली सरकार के वन अधिकार पर मुकदमा दर्ज..

केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग में 223 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है। यह राशि बैंक ऑफ इंडिया की पहाड़गंज शाखा में एक वर्ष के लिए सावधि जमा के रूप में जमा की गई थी, लेकिन बाद में इसे एक डमी खाते में स्थानांतरित कर दिया गया। अब इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने प्राथमिकी दर्ज की है। सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिल्ली सरकार के वन और वन्यजीव विभाग ने रिज मैनेजमेंट बोर्ड फंड के नाम पर एफडीआर के उद्देश्य से बैंक ऑफ बड़ौदा की पहाड़गंज शाखा को 223 करोड़ रुपये का अधिशेष जारी किया। बीओबी के तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक एल ए खान ने पूरी राशि को डीयूएसआईबी (दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड) के नाम से पंजीकृत एक खाते में स्थानांतरित कर दिया, जो एक फर्जी खाता है।

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अधिकारी ने कहा, जांच में पता चला है कि दिल्ली सरकार के वन एवं वन्य जीव विभाग ने 223 करोड़ रुपये की राशि को बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ रिज मैनेजमेंट बोर्ड फंड के नाम से सावधि जमा योजना में एक साल की अवधि के लिए निवेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और उस राशि को भारतीय स्टेट बैंक, आई.पी. एस्टेट, नई दिल्ली में अपने बैंक खाते से स्थानांतरित कर दिया।

एक सूत्र ने कहा, “खान, तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर, बीओबी ने डीएफडब्ल्यू के 223 करोड़ रुपये की राशि इसी ब्रांच के अकांउन्ट नंबर 00980100028204 में ट्रांसफर कर दी। ये खाता दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड के नाम पर है, जो कि एक फर्जी अकाउंट है। जानकारी को वेरिफाई किया गया तो पता लगा दिल्ली सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ फारेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ ने फिक्स डिपॉजिट स्कीम जिसे रिज मैनेजमेंट बोर्ड फंड के नाम से 223 करोड़ रुपए का फंड अप्रूव किया और एक साल बाद बैंक ऑफ बड़ौदा, पहाड़गंज ब्रांच से एसबीआई आईपी एक्सटेंशन में ट्रांसफर कर लिया गया।”

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सीबीआई ने कहा कि अपनी प्रारंभिक जांच के आधार पर उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा के बैंक के सीनियर ब्रांच मैनेजर एलए खान समेत फारेस्ट और वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट दिल्ली सरकार के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी, 409, 420, 467, 468 और 471 के तहत धारा 13(2) 13(1)(ए) के साथ प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में आगे की जांच जारी है।