दमन में हो रही हफ्ता-वसूली पर बड़ा खुलासा…

संघ प्रदेश दमन की सबसे बड़ी समस्या है डर के दम पर चल रही वसूली। यह एक ऐसी समस्या है जिसका हल अब तक कोई सरकार या कोई प्रशासन नहीं निकाल सकी, इस डर का हल अब तक नहीं निकला इसका दोष जितना प्रशसान का है उतना ही उन उधोग्पतियों, ठेकेदारो और कारोबारियों का भी है, जो करोड़ो के निवेश के बाद भी यहां के चंद वसूलीबाज़ नेताओं की गीदड़-भापकियों से इतना भयभीत हो जाते है की प्रशासन से शिकायत तक नहीं करते।

आकाओं का तुगलकी फरमान…  

वसूली की शुरुआत उसी वक्त से होना शुरू हो जाती है जब कोई इकाई अपने नए निवेश के साथ नए कारोबार को आरंभ करती है, इतना ही नहीं उक्त इकाई से संबन्धित किसी भी प्रकार की लेन-देन या कारोबार में भी यदि वसूलिकर्ताओं को मलाई दिखाई दे, तो वह उसमे दखल देने से भी पीछे नहीं हटते, बे-हिचक इकाई के आका को तुगलकी फरमान दे दिया जाता है की यह कारोबार या इस कारोबार की लेन-देन हमारा ख़ास आदमीकरेगा।

पड़ोसी भी यही सहाल देते है….

आम तौर पर इकाई उक्त क्षेत्र में चल रही इस प्रकार की वसूली और दादागिरी के बारे में अपने आस-के पड़ोस से पूछती है की यह सब क्या है और ऐसा क्यो हो रहा है, आस पड़ोस वाले उक्त मामले में यही सलाह देते है की यह तो यहा सालो से चला आ रहा है यह यहा के गुंडे है अगर यहां कारोबार करना है तो बतौर सुविधा-शुल्क समझकर, इन्हे बोटी डालनी ही पड़ेगी, हम सभी इनको हड्डी का टुकड़ा देते है अब तुम्हारा नाम भी इनकी लिस्ट में शाम हो गया, बेहतर है की तुम भी इनकी शर्ते मान लो, साथ ही साथ शिकायत ना करने की हिदायत भी दे दी जाती है, व्यापारी और कारोबारी अन्य पछड़े में पड़ने से बचने के लिए इनके तुगलकी फरमान को आखिरकार मान ही लेता है

किस किस प्रकार की वसूली होती जरा इस पर भी ध्यान दे…

इकाई पर वसूली की शुरुआत होती है इकाई द्वारा दिए गए ठेको के जरिए, इकाई को अपनी इकाई चलाने के लिए प्रतिमाह श्रमिकों की आवश्यकता होती है और प्रतिमाह इकाई का स्क्रेप ( भंगार) इकाई को बेचना होता है। आखिरकार वसूलीकरने वाली टीम का सरदार तय कर लेता है की किस को लेबर सप्लाई का काम दिलाना है और किसको स्क्रेप ( भंगार) उठाने का, इन दोनों कार्यों से होने वाली आम्दानी में वसूलीकरने वाली टीम के सरदार का हिस्सा होता है जो वह अपने हिसाब से वसूलता है।

हालांकि इसके अलावे भी पानी सप्लाई, गाड़ी सप्लाई, रेती सप्लाई, जैसे कई अन्य कार्य है जिनके लिए तुगलकी फरमान चलता है, लेकिन सबसे मुख्य और मलाईदार कार्य लेबर सप्लाई और स्क्रेप का बताया जाता है जो किसी कीमत पर वसूलिकर्ता अपने हाथ से जाने नहीं देते।   

वसूलिकर्ताओं ने बांट लिया दमन देखती रही प्रशासन…

यह कैसी विडम्बना है की आज वसूलिकर्ताओं ने दमन के अलग अलग क्षेत्रो को अपने हिसाब से अपने मतलब के लिए अगल अलग हिस्सो में बांट दिया है। संध प्रदेश दमन में जिस तरह की जबरन वसूली चली आ रही है उस पर रोक लगाना प्रशसन के लिए काफी मुश्किल है, मुश्किल इस लिए क्यो की जब तक उधोग्पतियों, ठेकदारों तथा जनता को इस बात का विश्वास नहीं हो जाता की प्रशासन निष्पक्ष उन वसूलिकर्ताओं पर ठोस कार्यवाही करेगी तब तक उधोगजगत तथा जनता से इस मामले में प्रशासन को उन वसूलिकर्ताओं के बारे में शिकायत मिलना भी काफी मुश्किल दिखाई देता है।

वसूलिकर्ताओं के अनुसार कोनसा क्षेत्र किसका है इस पर क्रांति भास्कर की तहक़ीक़ात जारी है इस मामले की तह तक जाकर क्रांति भास्कर उन तमाम वसूलिकर्ताओं को बे-नकाब करेगी जो सफ़ेद चोला पहनकर जनता को छलने का काम कर रहे है। 

वैसे आपको बता देते है कि बाज़ार में लने वाले नामों में सुरेश पटेल उर्फ सूखा, जिग्नेश पटेल उर्फ जिगगु तथा तनोज पटेल, यह तीन नाम है जो सबसे अधिक चर्चित है लेकिन फिलहाल इस मामले से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों पर क्रांति भास्कर की खोज-बीन जारी है, क्रांति भास्कर इनके क्षेत्र के अनुसार और ख़ोज-बीन कर जानकारियाँ बटोर रही है, ख़ोज-बीन पूरी होने पर इस मामले में जनता तथा प्रशासन के सामने पूरा खुलासा करेगी क्रांति भास्कर। शेष फिर।

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