कोरोना काल में अवैध निर्माण को लेकर मिले नोटिस से दमण की जनता नाराज़, पूर्व सांसद के पास भी गए लोग

Charmi Parekh daman

दमण। लोक तंत्र में जनता को मालिक कहा गया है तो सरकारी अधिकारी को जनता का नोकर, फिर क्यों जब भी दण्ड की या प्रशासनिक कार्यवाही की बात आती है तो मालिक यानि जनता को दण्ड मिलता है ओर नोकर यानि सरकारी अधिकारी दण्ड से कार्यवाही से बच निकालने में कामियाब हो जाते है? यह सवाल आज के इस मामले के लिए बेहद जरूरी है।

मामला है दमण में हुए अवैध निर्माण का, मामला है उन चाल मालिको का जिनहोने अवैध निर्माण किया, मामला है उन सरकारी अधिकारियों का जो सालों से उन तमाम अवैध निर्माणों को दर्शक बने देखते रहे और अपनी अपनी ऐशगाह आबाद करते रहे।

संघ प्रदेश दमण में कुल कितने अवैध निर्माण है इसका सही आंकड़ा तो संबन्धित विभागों के पास है, लेकिन किस अवैध निर्माण का निर्माण किस सरकारी अधिकारी, तलाटी, मामलतदार, पंचायत सचिव तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के संरक्षण में हुआ इसकी जानकारी प्रशासन के पास क्यों नहीं है? और यदि प्रशासन के पास इस बात की जानकारी है तो फिर नोटिस केवल अवैध निर्माण करने वाली जनता को ही क्यों? क्या प्रशासन की नज़र में वह सरकारी अधिकारी दोषी नहीं जिनहोने जानते बुझते जनता को अवैध निर्माण करने दिए, क्या इस लिए पूर्व में उन तमाम अधिकारियों ने जनता से रिश्वत नहीं ली होगी? ऐसे कई सवाल है जिनके बारे में अब जनता चौपालों पर खुलेआम चर्चा कर रही है और इस चर्चा का मुख्य कारण है हालही में जनता को अवैध निर्माण से संबधित प्रशासन द्वारा मिले नोटिस।

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दमण के अलग अलग क्षेत्रों में अवैध निर्माण को लेकर, संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली एवं दमण-दीव प्लानिंग एवं डवलपमेंट अथॉरिटी ( Charmie Parekh, DANICS ) द्वारा जनता को सेकड़ों नोटिस मिलने की जानकारी मिली है। उनमे से कुछ एक नोटिस की प्रतिया जो क्रांति भास्कर टीम के हाथ लगी है उन सभी नोटिस में डवलपमेंट कंट्रोल रूल्स 2005 का हवाला दिया हुआ है। वैसे यदि किसी ने अवैध निर्माण किया है तो उस पर नियमानुसार अवश्य कार्यवाही होनी चाहिए, लेकिन प्रशासन को साथ ही साथ यह भी देखना चाहिए की उक्त अवैध निर्माण किस अधिकारी के कार्यकाल में हुए तथा उसकी इसमे क्या भूमिका एवं सहभागिता रही।

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सूत्रों की माने तो कुछ लोग नोटिस मिलने पर पूर्व सांसद डाहया पटेल के पास गए थे लेकिन डाहया पटेल ने यह कहकर उन्हे बाहर का रास्ता दिखा दिया की जिसे वोट दिया है उसके पास जाओ! अब जब पूर्व सांसद डाहया पटेल के पास लोग गए तो सांसद लालू पटेल ( Lalubhai Patel, ( M.P ) के पास भी गए होंगे, सांसद लालू पटेल ने लोगो का क्या कहा होगा? क्या यह तो नहीं कहा की प्रशासन तो पूर्व में उनके घर भी बुलडर चला चुकी है? सच पूछे तो जनता को अवैध निर्माण से संबन्धित नोटिस मिलने का इतना दुख नहीं है जितना प्रशासन की एक तरफ़ा जनता पर कार्यवाही करने का, ऐसा इस लिए कहा जा रहा है क्यों की जनता का कहना है यदि निर्माण अवैध है तो अधिकारियों ने इतने वर्षों तक अपना कर्तव्य ईमानदारी से क्यों नहीं निभाया, अवैध निर्माण में संबन्धित विभागों एवं विभागीय अधिकारियों ने बिजली के कनेकसन और पनि के कनेकसन कैसे उपलब्ध कराएं? क्या बिजली विभाग के अधिकारी दोषी नहीं है जिनहोने अवैध निर्माणों में बिजली कनेकसन जारी किए? सवाल कई है लेकिन जवाब लोक तंत्र में मालिक कहे जाने वाली जनता को मिलगा या नहीं यह तो आने वाला समय बताएगा।

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फिलवक्त उक्त पूरे मामले में जनता की मांग है की जिसे भी अवैध निर्माण से संबन्धित नोटिस मिला उस अवैध निर्माण में किस विभाग के किस अधिकारी की क्या भूमिका रही इसकी भी निष्पक्ष जांच हो और उन सभी संबन्धित विभागों के अधिकारियों पर भी नियमानुसार कार्यवाही हो जो अब तक दर्शक बने तमाशा देखते रहे।

जनता सब जानती है…

संघ प्रदेश दादरा नगर एवं दमण-दीव में किस अधिकारी ने कितना भ्रष्टाचार किया, कितनी काली कमाई की, किस नेता ने जनता को भरोसे में लेकर उनके वोटो के दम पर कितना धन कमाया, कितनी हफ़्ता वसूली की? जनता सब जानती है लेकिन चुप रहती है क्यों की उसे अपने और अपने परिवार का पेट पालना है, जनता को लगता है लोक तंत्र में उंसकी भूमिका और जिम्मेवारी केवल वोट देने की है, लेकिन यह सही नहीं है भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है की वह भारत की जनता द्वारा सरकार को दिए गए टैक्स के पैसे से होने वाले विकास पर अपनी पैनी नजरें रखे यदि उसे कही अनियमितता तथा भ्रष्टाचार दिखाई दे तो उसकी शिकायत करें। प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा दिया, लेकिन लगता है इसके बाद भी जनता नहीं समझी। जनता यह भी मानती है कि प्रशासक प्रफुल पटेल काफ़ी सख्त प्रशासक माने जाते है और उनके द्वारा लिए गए कई फैसले, निर्णय, कार्यवाही सालों तक याद रखे जाने योग्य है, लेकिन इसके बाद भी जनता प्रशासक से शिकायत करने से संकोच करती है सब कुछ जानते बुझते दर्शक बनी देखती रहती है और जब उस पर कार्यवाही होती है तो नेताओं कि चौखट खट-खटाती है लेकिन फिर भी उसके हाथ कुछ नहीं लगता। जनता को यदि बदलाव चाहिए तो सवय उसे भी बदलना होगा, यदि जनता को सहयोग चाहिए तो उसके लिए क्रांति भास्कर कि टीम जनता के साथ है, यदि जनता के पास जनहित से जुड़ी कोई ख़बर, समस्या तथा किसी विभाग एवं विभागीय अधिकारी के भ्रष्टाचार की जानकारी है तो वह क्रांति भास्कर से संपर्क कर सकता है क्रांति भास्कर उक्त खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित करेगी। क्रांति भास्कर सदैव जनहित में पत्रकारिता करती रही है और आगे भी जनहित में पत्रकारिता करने के लिए प्रतिबद्ध है। शेष फिर।