गुजरात विधानसभा चुनाव : BJP ने निकाली सत्ता विरोधी लहर की काट, आधे से ज्यादा चेहरे बदल सकती है पार्टी

गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ( BJP ) सत्ता विरोधी माहौल की काट के लिए आधे से ज्यादा चेहरों को बदल सकती है। इसके पहले बीते साल पार्टी ने पूरी सरकार को ही बदल दिया था। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का गृह राज्य होने की वजह से गुजरात भाजपा ( BJP ) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लगातार गुजरात के दौरे पर चुनावी तैयारियों को मजबूत कर रहा है। गुजरात में भाजपा बीते 27 साल से लगातार सत्ता में है। 
ऐसे में सत्ता विरोधी माहौल का होना स्वाभाविक भी है। बीते साल जब कोरोना महामारी को लेकर तमाम शिकायतें सामने आई थी, तो पार्टी ने बिना देर किए मुख्यमंत्री विजय रुपाणी समेत अपनी पूरी सरकार को ही बदल दिया था। ताकि जनता में सरकार के प्रति नाराजगी को खत्म किया जा सके। अब जबकि पार्टी को विधानसभा चुनाव में जाना है तब पार्टी हर क्षेत्र का व्यापक फीडबैक हासिल कर रही है। पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शहरी इलाकं की 39 में से 35 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं ग्रामीण इलाकों में पार्टी 143 में से 64 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी। ऐसे में पार्टी इस बार ग्रामीण इलाकों पर अलग से ध्यान दे रही है।

नए चेहरों के साथ जनता के बीच जाने की कोशिश

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भाजपा राज्य में आधे नए चेहरे उतार सकती है। पार्टी युवा चेहरों को मौका देगी पर अनुभवी को भी चुनाव मैदान में उतारेगी। सूत्रों के अनुसार, 75 वर्ष से ज्यादा उम्र का कोई प्रत्याशी नहीं होगा। पर अपवाद स्वरूप एक-दो स्थानों पर ऐसे प्रत्याशी हो सकते हैं। बीते चुनाव में भाजपा को 182 सदस्यीय विधानसभा में 99 सीटें मिली थी और बाद में दूसरे दलों के कुछ विधायक भी पार्टी में शामिल हुए। पार्टी की कोशिश नए चेहरों के साथ जनता में जाने की है ताकि जीत का प्रतिशत बढ़ सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद जुटा रहे हैं फीडबैक

प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और वह एक-एक क्षेत्र से पूरी तरह वाकिफ हैं। ऐसे में वह खुद भी हर क्षेत्र का फीडबैक जुटा रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा भी लगातार गुजरात के दौरे, संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूती देने में जुटे हुए हैं। हालांकि विपक्ष में कांग्रेस कमजोर है और आम आदमी पार्टी अभी दस्तक दे रही है। लेकिन भाजपा चुनावी चुनौती को किसी भी रूप से कमजोर नहीं मानती है।

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पार्टी की रणनीति मोदी के इर्द-गिर्द ही रहेगी

चुनाव में पार्टी की रणनीति प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे के इर्द-गिर्द ही रहेगी। नड्डा ने भी अपने हाल के दौरे में कार्यकर्ताओं के बीच साफ किया कि हमें अपने लक्ष्य से नहीं डिगना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो काम कर रहे हैं उसको लगातार आगे बढ़ाना है। प्रधानमंत्री मोदी दिन-रात एक करते हुए गुजरात समेत पूरे भारत का दुनिया में मान बढ़ा रहे हैं। उनके बताए रास्ते पर अपने-अपने क्षेत्र, प्रदेश और राष्ट्र के विकास में अपनी आहुति देनी है और आम लोगों के लिए काम करना है।

आम आदमी पार्टी का गुजरात प्लान

आम आदमी पार्टी गुजरात विधानसभा चुनाव को पूरे दमखम के साथ लड़ रही है। केजरीवाल गुजरात चुनाव में उसी रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिसके दम पर पहले दिल्ली और फिर पंजाब में सरकार बनाने में कामयाब रहे। AAP मॉडल के चार बड़े स्तंभ हैं- अच्छी शिक्षा, अच्छा स्वास्थ्य, मुफ्त बिजली और युवाओं को रोजगार। गुजरात विधानसभा चुनाव में केजरीवाल इसी ‘फ्रीबीज’ के इर्द-गिर्द चुनाव का एजेंडा सेट कर रहे हैं। किसानों की कर्जमाफी से लेकर मुफ्त बिजली और रोजगार तक की ‘गारंटी’ दे रहे हैं।

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आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज करते हुए चुनाव आयोग का दल बृहस्पतिवार से हिमाचल प्रदेश और गुजरात का दौरा करेगा और दोनों राज्यों में चुनाव तंत्र की तैयारी का आकलन करेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे बृहस्पतिवार से हिमाचल प्रदेश के तीन-दिवसीय दौरे पर होंगे। वे राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों से मिलकर तैयारियों की समीक्षा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि चुनाव सुचारू रूप से संपन्न हो सके। तैयारियों का जायजा लेने के लिए कुमार और पांडे के सोमवार को गुजरात दौरे पर जाने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभाओं का कार्यकाल क्रमशः आठ जनवरी 2023 और 23 फरवरी 2023 को समाप्त होगा और आयोग किसी सदन के पांच साल के कार्यकाल के समाप्त होने के छह महीने के भीतर कभी भी चुनाव करा सकता है।