दमण के कई क्षेत्रों में लाइट चोरी करने और करवाने का खेल जारी…

दमण। संघ प्रदेश दमण के विधुत विभाग के अधिकारियों कि खराब कार्यप्रणाली देखकर लगता है उक्त विभाग के अधिकारियों ने नियमों को उच्च अधिकारियों के निर्देशों कि चट्टान के नीचे दबा दिया है। अब ऐसा इस लिए कहा जा रहा है क्यो कि दमण के कई क्षेत्रो में सालों से डोमेस्टिक लाइन से कमर्शियल उपयोग जारी है। कई मामलों में जनता द्वारा शिकायते भी कि जाती रही है लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा केवल उन मामलों में कार्यवाही देखने को मिली जिनमे उनकी सेटिंग नहीं हुई, या फिर जिनकी कार्यवाही के लिए सीधे ऊपर से आदेश निर्देश मिले हो। जहां अधिकारियों कि सेटिंग है और ऊपर उस सेटिंग कि जानकारी नहीं है वहा आज भी जनता को लाइट चोरी और अनियमितताओं पर शिकायत करने के बाद चक्कर कटवाए जाते है। जब लाइन-मेन से शिकायत कि जाती है तो लाइन-मेन कहता है कनिय अभियंता से ऊपर बात करो, कनिय अभियंता से शिकायत करने पर कनिय अभियंता कहते है सहायक अभियंता से ऊपर बात करो और सहायक अभियंता कहते है जब तक ऊपर से यानि कार्यपालक अभियंता स्वय संज्ञान लेने के लिए नहीं कहते, तब तक नियमों पर रखी गई निर्देशों कि बड़ी चट्टान नहीं हटाई जाएगी, मतलब जब तक कार्यपालक अभियंता नहीं कहते तब तक कार्यवाही नहीं की जाएगी। अब विधुत विभाग के अधिकारियों के ऐसे रवैये के पीछे का कारण क्या है और लाख अनियमितताओं के बाद भी अभियंता इतने बे-फिक्र क्यो है तो इसका जवाब है वरीय अधिकारियों से सहायक अभियंता और कनिय अभियन्ताओं को मिलने वाला संरक्षण।

जनता को मतलब कि शिकायतकर्ता को यह नहीं पता होता है कि जिस क्षेत्र के लाइट चोरी या अनियमितता को लेकर वह शिकायत कर रहा है उस क्षेत्र का कार्यभार विधुत विभाग के किस अभियंता कि देख रेख में आता है क्यो कि शिकायतकर्ता ने ना जे-ई-आर-सी के नियमों कि किताब पढ़ी होती है ना सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेरिटी के बारे में उसे जानकारी होती है। शिकायतकर्ता तो बस इतना बताता है कि किस थम्बे से किसका तार जुड़ा है और किस डोमेस्टिक कनेकसन से कमर्शियल का उपयोग हो रहा है, अभियंता कई अभियंता तो इतने भ्रष्ट हो चुके है कि बार बार शिकायत करने के बाद थम्बे से जुड़ा तार तो काट देते है लेकिन कोई मामला दर्ज़ नहीं करते है और ऐसा भी कई बार हो चुका है। सीधी सी बात है कि जब लाइट चोरी पर मामला दर्ज़ किया तो लाइट चोरी करने वाले से वसूला दण्ड सरकारी तिजोरी में जमा होगा, जबकि मामला दर्ज़ नहीं किया तो वही अवैध तरीके से वसूला दण्ड अधिकारियों और अभियन्ताओं कि तिजोरी में जमा होगा।

अभी कुछ महीनों पहले कि बात है दमण क्षेत्र के दाबेल मुख्य मार्ग पर स्थित एक अवैध ढाबे में सालों से उसके पास में स्थित थम्बे से लाइट के तार जुड़े हुए थे। क्रांति भास्कर कि टिम द्वारा लाइट चोरी कि शिकायत करने पर लाइट के तार काट दिए गए, लेकिन नियमानुसार कोई मामला दर्ज़ नहीं किया गया। अब मामला दर्ज़ ना करने कि अवज में अभियंता ने कितनी रिश्वत ली यह तो उक्त क्षेत्र के कनिय अभियंता के ऊपर वाले अधिकारी ही बता सकते है। वैसे दाबेल क्षेत्र के सहायक अभियंता का प्रभार हरीश टंडेल के पास बताया जाता है। एक समय ऐसा भी था जब हरीश टंडेल ने विधुत विभाग कि गड़बड़ियों और अनियमितताओं को खुलकर जनता के सामने रखते थे, लेकिन आज बात कुछ और है आज वह स्वय अनियमितताओं पर आंखे बंद कर तमाशा देखने वाले अधिकारियों कि फेहरिस्त में शामिल है।

खेर विधुत विभाग के अभियन्ताओं को चाहिए कि डोमेस्टिक लाइन से कमर्शियल उपयोग के लिए एक जांच अभियान चलाए और विधुत चोरी करने वालों पर नियमानुसार कठोर कार्यवाही करें। वैसे क्रांति भास्कर कि टिम ने विधुत चोरी और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए मुहिम छेड़ दी है और यदि जनता चाहे तो वह भी विधुत चोरी और अनियमितताओं पर क्रांति भास्कर कि टिम को जानकारी दे सकती है। जिससे कि विधुत चोरी पर प्रतिबंध लगे और भ्रष्ट अभियन्ताओं के चहरे से ईमानदारी का मुखोटा उतरें। शेष फिर।

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