दानह कि कुल आबादी से कई गुना अधिक मरीज़ दानह के एक अस्पताल में।  

हाल ही में श्री विनोभा भावे सिविल अस्पताल द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया गया कि दादरा नगर हवेली कि जिला अस्पताल श्री विनोबा भावे सिविल अस्पताल को कायाकल्प पुरस्कारो की भी श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

दिनांक 11-10-2019 के दिन नई दिल्ली के स्टीन ऑडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन द्वारा संघ प्रदेश दा.न.ह. के श्री विनोबा भावे सिविल अस्पताल को सबसे बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संघ प्रदेश के स्वास्थ्य निदेशक एवं श्री विनोबा भावे सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वी. के. दास और स्वास्थ्य विभाग दा.न.ह. में कार्यरत राज्य सलाहकार (क्वालिटी मॉनिटरिंग) श्रीमती स्मिता गवली ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।

श्री विनोबा भावे सिविल अस्पताल को प्राप्त हुआ राष्ट्रीय स्तर पर कायाकल्प पुरस्कार और 2 करोड़ की धन राशि।

दादरा नगर हवेली कि जिला अस्पताल श्री विनोबा भावे सिविल अस्पताल में रोजाना लगभग ५००० मरीज अपना ईलाज करवाने आतें हैं। केवल ईस संघप्रदेश के ही नहीं बल्कि गुजरात और महाराष्ट्र के लोग भी इस अस्पताल में इलाज करवाने आतें हैं। इसी से ज्ञात होता है कि यह अस्पताल बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर श्री विनोबा भावे सिविल अस्पताल को मिली ईस उपलब्धि के लिए प्रशासक श्री प्रफुलभाई पटेल ने संघ प्रदेश के स्वास्थ्य निदेशक एवं श्री विनोबा भावे सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वी. के. दास और स्वास्थ्य विभाग को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है और भविष्य में दोनों प्रदेशों में स्वास्थ सुविधाएं और बेहतर बनाने की होंसला अफजाई की है‌‌।

वैसे श्री विनोबा भावे अस्पताल को जो पुरस्कार मिला है उसके लिए उसका श्रेय उन सभी अधिकारियों और चिकित्सकों को जाता है जिनहोने इस अस्पताल में अपनी अपनी सेवा दी और सेवा दे रहे है। लेकिन इस श्रेय के साथ एक सवाल भी है सवाल यह है कि प्रेस विज्ञप्ति में श्री विनोभा भावे सिविल अस्पताल कि और से बताया गया कि इस अस्पताल में प्रतिदिन 5000 मरीज अपना इलाज़ करवाने आते है। मरीज़ों कि जो संख्या बताई जा रही है वह संख्या अवश्य ही चौकाने वाली है क्यो कि प्रतिदिन 5000 मरीज़ के इसाब से केवल 1 वर्ष में 1825000 होता है, मतलब क्या वाकई एक साल में केवल दानह के एक अस्पताल में प्रति वर्ष 1825000 मरीज़ इलाज़ करवाते है? यह सवाल जितना चौकाने वाला है इसका जवाब भी उतना ही चौकाने वाला होगा क्यो कि दादरा नगर हवेली कि जनसंख्या इससे आधी भी नहीं है और दादरा नगर हवेली में, श्री विनोभा भावे अस्पताल के अलावे कई दर्जनों अस्पताल और भी है। ऐसे में यदि केवल एक अस्पताल में प्रतिदिन 5000 मरीज़ इलाज़ करवा रहे है तो बाकी के दर्जनों अस्पताल में प्रतिदिन कितने मरीज़ इलाज़ करवाते होंगे? सवालों को देखकर लगता है दानह कि कुल आबादी बीमार है और बीमारी से लड़ रही है वरना प्रतिदिन 5000 मरीज़ एक अस्पताल में इलाज़ करवाने आए यह संभव नहीं लगता। कहीं ऐसा तो नहीं खर्च और बजट के नाम पर मरीज़ों कि संख्या को कई गुना बताकर कोई घोटाला किया जा रहा है? क्यो कि जितने अधिक मरीज़ होंगे उतनी अधिक दवाओं कि खरीद होगी और जितनी अधिक दवाइयाँ खरीदी जाएगी उतना अधिक अधिकारी कमीशन डकार सकेंगे? जनता जानती है कि अधिकारी कैसे काम करते है कैसे मरीजों के साथ बर्ताव करते है और कैसे मरीजों कि जांच और दवायों के नाम पर घोटाले करते है, खेर जो भी प्रशासन को चाहिए कि वह थोड़ा ध्यान दे क्यो कि ज्यादा ध्यान देने का समय शायद किसी के पास नहीं होता तो अब तक कई बार जांच हो चुकी होती और कई बार सीबीआई के छापे पड़ चुके होते। शेष फिर।

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