सीपीआई(एम) का सचिवालय पर प्रदर्शन, मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन!

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) यानी माकपा ने 28 सितंबर को राज्य सचिवालय पर प्रदर्शन किया तथा डयूटी मजिस्ट्रेट के माध्यम मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया ।

इस अवसर पर पार्टी के केंद्रीय कमेटी के सदस्य एवं पार्टी के पर्यवेक्षक कामरेड बीजू कृष्णन ने कहा है कि भाजपा सबका साथ, सबका विकास के नारे के साथ सत्ता में आयी थी उसने सत्ता में आते ही अपने छुपे हुऐ एजेंडे को लागू कर दिया और धीरे-धीरे कर रही है। जिसके परिणामस्वरूप देशभर में साम्प्रदायिक, जातिवादी उन्माद चरम पर है । इस पार्टी की कॉरपोरेट तथा जनविरोधी नीतियों के परिणामस्वरूप आज देश में महंगाई ,बेरोजगारी चरम पर है।

उन्होंने राज्य के बढ़ते अपराधों के लिए भाजपा की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए अंकिता हत्याकांड के लिए भाजपा सरकार की कड़े शब्दों में निन्दा करते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। साथ ही कहा है कि जांच के दायरे में हत्यारों के पिता एवं उसके परिजनों को लाया जाना चाहिए। उन्होंने अंकिता हत्याकांड के बाद इस प्रकरण को उजागर करने वाले पत्रकारों को धमकी देने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की तथा पत्रकारों को सुरक्षा देने की मांग की।

एस एफ आई के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं खेतिहर मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव कामरेड विक्रम ने मोदी सरकार की नीतियों की भर्त्सना करते हुए कहा कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण आमजन त्रस्त है। बेरोजगारी, महंगाई तथा भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा की नीतियों को बेनकाब करने की आवश्यकता है।

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इस दौरान पार्टी राज्य सचिव राजेंद्र सिंह नेगी, किसान सभा के महामंत्री गंगाधर नौटियाल, महिला समिति की उपाध्यक्ष इन्दु नौडियाल, सीटू के महामंत्री महेंद्र जखमोला, एस एफ आई महामंत्री नितिन मलेठा समाधान पार्टी राज्य सचिव मंडल सदस्य कामरेड सुरेंद्र सिंह सजवाण भी संबोधित किया, और ड्यूटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया।

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इस अवसर पर स्मार्ट सिटी से उत्पन्न समस्या, इन्दिरा मार्केट प्लान में कार्य शुरू करने, अकृषिक भूमि, पंचायत छूटे हुऐ उत्तराखंड आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी घोषित करना, भूमि तथा मलीन बस्तियों में बसे लोगों का मालिकान हक, किसानों में फसल का मुआवजा देना शामिल है। इसके अलावा राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय मांगों का एक ज्ञापन मुख्यमंत्री एवं पीएम को ज्ञापन दिया गया जो कि निम्नलिखित है।

(1) सभी कृषि उत्पादों को गारंटीकृत सीड को जोड़ते हुऐ 50 प्रतिशत की दर से एमएसपी के साथ खरीद सुनिश्चित की जाऐl

(2) केन्द्र सरकार सभी गरीब एवं मध्यम दर्जे के किसानों और खेत मजदूरों को एकमुश्त ऋण माफी, 60 वर्ष से ऊपर के सभी को पेंशन दी जाए।

(3) चार श्रम संहिताओं को समाप्त किया जाए। विधुत बिल संशोधन 022 वापस लिए जाऐ।

(4) नौकरी की सुरक्षा और सभी को नौकरी की गारंटी, शहरी क्षेत्र में मनरेगा का विस्तार, न्यूनतम दैनिक मजदूरी 600 रूपये तथा सालभर कम से कम 200 दिन का काम दिया जाऐ।

(5) महंगाई पर रोक लगाओ, खाद्य पदार्थों पर जीएसटी वापस लिया जाए । पेट्रोल, डीजल, गैस, मिट्टी के तेल पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क पर भारी कटौती की जाए।

राज्यस्तरीय मांगें :-

(1)  राज्य में बढ़ती अपराधिक घटनाओं पर अविलम्ब रोक लगाई जाये । अंकिता हत्याकांड सहित अन्य सभी मामलों के दोषियों को कड़ी सजा दी जाऐ। अंकिता हत्याकांड को उजागर करने वाले पत्रकारों को मिल रही धमकी को गम्भीरता से लेते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया जाऐ। राज्य में बढ़ रही नशे के व्यापार पर अविलम्ब रोक लगे ।

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(2) राज्य में भर्ती घोटाले की सुप्रीम कोर्ट के जज की देखरेख में सीबीआई जांच की जाए।

(3) राज्य में सभी कामगारों को कम से कम 26000 रूपये प्रतिमाह मिले तथा उनकी कम से कम 10,000 रूपये पेंशन सुनिश्चित हो। काम की ठेकेदारी करण बंद हो। सेना में अग्निपथ योजना समाप्त हो।

(4) राज्य के आपदा पीड़ितों की समुचित सहायता एवं विस्थापित होने वालों का समुचित समाधान किया जाए। सालों से ग्राम पंचायतों, अकृषिक भूमि, चाय बगानों, तथा मलीन बस्तियों पर रह रहे लोगों को मालिकाना हक देना सुनिश्चित किया जाए।

(5) किसानों के धान की खराब फसलों की नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावितों समुचित मुआवजा दिया जाए।

(6) किसानों को न्यूनतम प्रति क्विंटल 500 रूपये दिया जाऐ।

(7) रेशम कोकून का मूल्य कम से कम 400 रूपये प्रति निर्धारित किया जाऐ।

(8) जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ इनसे हो रही फसलों एवं मानव क्षति की क्षतिपूर्ति के लिए समुचित मुआवजा सुनिश्चित की जाए तथा इस संदर्भ मोटर सुरक्षा कानून की तर्ज पर कानून बनाया जाए।

(9) उधमसिंहनगर शक्ति फार्म के बंगाली विस्थापितों की जमीन भूमाफियाओं के कब्जे से छुड़ाना सुनिश्चित किया जाए तथा 2006-2007 का समझौता लागू किया जाए।