दमण में मीटर रीडिंग के नाम पर जनता के लाखों रुपये स्वाहा…

दमण। संघ प्रदेश दमण-दीव विधुत विभाग के अभियन्ताओं कि ख़राब कार्यप्रणाली देखकर लगता है विधुत विभाग में घोटाले का दौर अब भी जारी है। जानकारी मिली है कि दमण विधुत विभाग ने किसी निजी कम्पनी को घरेलू और आवासीय कनेकसन के मीटर कि रीडिंग का ठेका दिया है। ठेका कितने में दिया और ठेका देने में कितने नियमों कि अनदेखी हुई यह सवाल तो है ही लेकिन यह सवाल भी है कि जब दमण-दीव विधुत विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी है तो उसने किसी निजी कम्पनी को मीटर कि रीडिंग के लिए ठेका क्यो दिया और यदि पर्याप्त कर्मचारी नहीं है तो विभाग नई भर्ती क्यो नहीं कर रही?

बताया जाता है कि नानी दमण में दिलीप नगर के पास स्थित किसी पार्थ इलेक्ट्रिकल कम्पनी को मीटर रीडिंग का ठेका दिया गया है ठेकदार का नाम जीतू बताया जाता है और जीतू दमन-दीव विधुत विभाग के पुराने तिकड़मी एजेंट अनिल मालवीय का खास बताया जाता है। जानकारी यह भी मिली है कि पार्थ इलेक्ट्रिकल के मालिक जीतू ने भी अपने कर्मचारियों को रीडिंग के लिए एक अलग से ठेका दे रखा है, मतलब कि कर्मचारियों को बता दिया गया कि रीडिंग लाओं और पैसे ले जाओ, जो जितनी अधिक रीडिंग लाएगा उसे उतना अधिक पैसा मिलेगा। ठेकदार रीडिंग लाने वाले कर्मचारियों को 3 रुपये से 4 रुपये प्रति रीडिंग के हिसाब से देकर अपना उल्लू सीधा कर रहा है और अभियंता सबकुछ जानते बुझते जनता के लाखों रुपये स्वाहा होते देख रहे है। हो ना हो इस मामले में अवश्य बड़ा भ्रष्टाचार छुपा है क्यो कि दमण विधुत विभाग कि वेबसाइट के अनुसार 40502 घरेलू और आवासीय कनेकसन है बताए जाते है। वैसे अब ठेकदार अपने कर्मचारियों को एक रीडिंग के लिए कितने पैसे दे रहा है यह जानकारी तो सामने आ गई। लेकिन विधुत विभाग ठेकदार को एक रीडिंग के लिए कितने पैसे दे रहा है यह जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

जानकारी यह भी मिली है कि रीडिंग से संबन्धित अधिकतर कामकाज कनिय अभियंता भावेश जोशी और कनिय अभियंता मेहुल टण्डेल देखते है दोनों ही कनिय अभियंता वर्क-चार्ज पर बताए जाते है। जोशी घरेलू और आवासीय कनेकसन और मेहुल कमर्शियल। पार्थ इलेक्ट्रिकल को जो रीडिंग का कोंटरेक्ट दिया गया है वह घरेलू और आवासीय कनेकसन का है और घरेलू और आवासीय कनेकसन का काम काज जोशी के पास है। अब सवाल यह उठता है कि विभाग के पास मीटर रीडिंग के लिए कितने आदमी है और वह कितने मीटर कि रीडिंग लेते है तथा यह कैसे तय करते है कि ठेकदार के आदमियों ने कितने मीटर कि रीडिंग ली और उन्हे कितना भुगतान करना है? मामला काफी पैचीदा है क्यो कि मीटर रीडिंग का काम विधुत विभाग के कर्मचारी भी करते है। कही ऐसा तो नहीं कि मीटर कि रीडिंग सरकारी कर्मचारी ले रहे हो और ठेकदार बिना कुछ किए विभाग को बिल देकर पैसा ले रहा हो? ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी। हकीकत क्या है जांच के बाद पता चलेगा। इस लिए उक्त मामले में विधुत सचिव को जांच करनी चाहिए वह यदि व्यस्त है तो किसी जांच एजेंसी से भी जांच करवा सकते है लेकिन मामले को देखकर लगता है कि जांच में जितनी देरी होगी उतना ही जनता के धन का गमन अधिक होगा, इस लिए बेहतर है यही है कि विधुत सचिव इस मामले कि जांच जल्द करवा ले क्यो कि प्रशासक प्रफुल पटेल ने जांच शुरू कि तो वीर जांच कि आंच विधुत सचिव तक आणि तय है।

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