100 से अधिक विकास कार्यों की फ़ाईले भुगतान के लिए लंबित, कारण लापरवाही या फिर कमिशनखोरी?

निजी ठेकेदार/बिल्डर्स एवं मालिकों को निर्माण की लागत का 1 प्रतिशत उपकर जमा करना जरूरी | Kranti Bhaskar

दमण। संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली एवं दमण-दीव ( PWD ) लोक निर्माण विभाग द्वारा करवाए गए विकास कार्यों में कोनसा अधिकारी कितना कमिशन मार रहा है? इसकी जांच करने का उचित महूर्त प्रशासन कब निकालेगी यह तो प्रशासन ही जाने! लेकिन उक्त विभाग एवं विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली देखकर ऐसा लगता है की विभाग में कनिय अभियंता से लेकर सचिव तक सब ढाक के तीन पात की तरह है। कोई खुलेआम मांग लेता है तो कोई चक्कर कटवाकर बताता है की उसे उसका हिस्सा नहीं मिला तो काम आगे नहीं बढ़ेगा! यह परंपरा कब बंद होगी और इस परंपरा को जारी रखने के लिए अधिकारियों का किसका आशीर्वाद प्राप्त है यह सवाल भी अब फन उठाए है।

जानकारी मिली है की लोक निर्माण विभाग के सचिव ( Shri Saurabh Mishra, IAS (AGMUT:2015) ) सौरभ मिश्रा के पास 100 से अधिक विकास कार्यों की फ़ाईले भुगतान के लिए लंबित है और विकास कार्य करने वाले ठेकदार एवं एजेंसिया सचिव ( Shri Saurabh Mishra, IAS (AGMUT:2015) ) सौरभ मिश्रा के कार्यालय पर टक टकी लगाए बैठे है की मिश्रा जी कार्यालय में आए और बिल पास करें, लेकिन ना जाने सौरभ मिश्रा किस कार्य में व्यस्त है की लंबित फाइलों का आंकड़ा दर्जनों से बढ़ते बढ़ते सैकड़ों टक पहुच गया, क्या उन्हे भी हिस्सा चाहिए? यदि नहीं तो फिर इतनी लापरवाही क्यों?

वैसे संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली एवं दमण-दीव ( Public Works Department ) लोक निर्माण विभाग एवं उक्त विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल कोई नई बात नहीं है उक्त विभाग के एवं विभागीय अधिकारियों के भ्रष्टाचार के किस्से सौरभ मिश्रा को पूर्व की कई फाइलों में मिल जाएंगे, पूर्व में उक्त विभाग एवं विभागीय अधिकारी ना स्थानिय सतर्कता विभाग की जांच से बचा ना ही केंद्रीय सतर्कता विभाग की जांच से, पूर्व में उक्त विभाग एवं विभागीय अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कई मामलों ने कई बार दानह एवं दमण-दीव प्रशासन को शर्मशार किया और इस वक्त सौरभ मिश्रा की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल पुनः प्रशासन के लिए शर्मिंदगी का कारण बन रही है।

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वैसे आपको बता दे कि पूर्व उक्त विभाग के भवन यानि कार्यालय के निर्माण में भ्रष्टाचार कि शिकायत कि गई थी अब सोचने वाली बात है कि भला जो अपने ही कार्यालय को बनाने में भ्रष्टाचार कर रहा हो उस विभाग के अधिकारी कैसे होंगे? आपको बता दे कि दमण-दीव भाजपा ( BJP ) के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा नेशनल काउंसिल के सदस्य तथा इस वक्त भाजपा दानह एवं दमण-दीव भाजपा के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त बालुभाई पटेल ने प्रशासक प्रफुल पटेल को एक ज्ञापन सौंपकर एक मामले में जांच की मांग की थी।

बालुभाई पटेल ने प्रशासक को सौंपे अपने ज्ञापन में बताया है कि लोक निर्माण विभाग द्वारा उसका खुदका भवन बनाने के लिए टेंडर नं. ४७/२०१४-१५, टेंडर आईडी नं. १६९९२५  द्वारा टेंडर निकाला गया था और उसी टेंडर में आइटम नंबर १४५ जिसकी विभाग की अंदाजित कीमत करीब ४ लाख रुपए थी, लेकिन ठेकेदार को वहीं आइटम का काम ४० लाख रुपए में दिया गया। इसे जान बुझकर बड़ा बनाने के लिए २०० मीटर ऊंचाई का एस्टीमेट बनाया गया जबकि लोक निर्माण विभाग खुद ही वाटर सप्लाई के बोरवेल का काम कर चुका है और यह बोरवेल आज पूर्ण आपूर्ति में पानी दे रहा है। दमण में २० से ३० मीटर ऊंचाई का बोरवेल का पूर्ण काम पंप मशीनरी के साथ ५०,००० रुपए में हो जाता है फिर भी ५०,००० रुपए के काम को गलत तरीके से एस्टीमेट करके ४० लाख रुपए में देकर बहुत बड़ा भ्रष्टाचार किया गया है तथा इसी प्रकार से आइटम नंबर-४२ में ४६ लाख रुपए का घोटाला किया गया है। इसी टेंडर में आइटम नं. १२ (फाउंडेशन कान्क्रीट) जिसकी विभाग की अंदाजित कीमत ६१५२ रुपए और मात्रा ७३३ क्यूबिक मीटर था, जबकि ठेकेदार ने उसमें सिर्फ ३१०० रुपए भरा था और इसके लिए ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए यह काम सिर्फ ३५० क्यूबिक मीटर मात्रा का ही किया गया। ऐसा ही आइटम नं. ११ (स्टील रेनफोर्समेंट) में किया गया है, इस टेंडर का मार्केट रेट जस्टीफिकेशन सीपीडब्ल्यूडी वर्क मैन्युअल के मुताबिक बनाये बिना ही टेंडर पास किया गया है जो सीपीडब्ल्यूडी की धारा २० का उल्लंघन है। बालुभाई आर. पटेल ने कहा है कि कुल मिलाकर इस टेंडर में कार्यपालक अभियंता ने ५० लाख रुपए का घोटाला किया है जबकि टेंडर की नियम व शर्तें नंबर १.२.३ के अनुसार यह ठेकेदार के पास (ग्राउंड प्लस थ्री) बिल्डिंग वर्क के अनुभव सर्टिफिकेट नहीं थे। बालु पटेल ने प्रशासक प्रफुल पटेल से निवेदन करते हुए कहा है कि इस टेंडर और काम की इंक्वायरी कर जवाबदार अधिकारी पर कदम उठाये और गलत तरीके से दिया गया लाखों रुपए की भुगतान की वसूली, संबंधित लोक निर्माण विभाग के अधिकारी से करें। अब पूर्व के इस मामले से समझ लीजिए कि विभाग का क्या हाल है क्यों कि भ्रष्टाचार के यह आरोप कांग्रेस के नहीं है यदि कांग्रेस द्वारा भी आरोप लगाए गए होते तो भी मामले कि जांच और कार्यवाही अतिआवश्यक है फिर यह तो सवय भाजपा नेता के आरोप है।

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प्रशासक प्रफुल पटेल को चाहिए की भले-ही कनिय अभियंता से भी नीचे के स्तर के अधिकारी को कार्यपालक अभियंता का प्रभार दे दे लेकिन विभाग एवं विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली का पर पैनी नजरें वह सवय रखे, क्यों की उक्त विभाग एवं विभागीय अधिकारी घोटाले में धीरे धीरे अब इतना अव्वल बनते जा रहे जिनहे सूचना के अधिकार के तहत झूठी, गलत, और जाली जानकारी उपलब्ध करने से भी भय नहीं लगता।