घूसखोरी में नंबर-1 भारत! किसी चैनल पर बहस हुई? किसी मंत्री ने ट्वीट किया?

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आप भ्रष्टाचार को समस्या मानते है या नहीं? यह सवाल ही तय कर सकता है कि आपके और आपके बच्चो का भविष्य क्या होगा, यदि वह गरीब है तो अमीर बन पाएंगे या भ्रष्टाचार कि बेड़ीय उन्हे अमीर बनने से रोकती रहेगी? यह सवाल भी इस लिए क्यों कि सार्वजनिक सेवाओं में अपना काम निकालने के लिए रिश्वत देने के दर और व्यक्तिगत संबंधों के उपयोग के मामले में भारत एशिया में पहले स्थान पर है। भ्रष्टाचार निगरानी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) की नई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है। इस खुलासे के बाद क्या भारत के किसी मंत्री ने इस पर ट्वीट किया? अगर आपके पास समय है तो खोजिए। क्यों कि यह विषय साधारण विषय नहीं है, भ्रष्टाचार हमेशा से एक ऐसी समस्या रही है जो आम आदमी को आर्थिक समानता से दूर रखती है।

रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर (GCB) एशिया ने पाया कि रिश्वत देने वाले करीब 50 फीसदी और व्यक्तिगत संबंध का उपयोग करने वाले 32 फीसदी लोगों ने बताया कि ऐसा नहीं करने पर उन्हें सेवाएं नहीं मिल सकती हैं। यह कोई मुद्दा नहीं है यह एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में सभी जानते है लेकिन कुछ करने से पहले यह सोचते है कि उनके कुछ करने से कुछ सुधार होगा या नहीं?

इस वर्ष 17 जून से 17 जुलाई के बीच भारत में 2000 लोगों पर हुए सर्वे के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। सार्वजनिक सेवाओं में रिश्वत भारत को दीमक की तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि धीमी और जटिल नौकरशाही प्रक्रिया, अनावश्यक लालफीताशाही और अस्पष्ट नियामक ढांचे नागरिकों को जान-पहचान और गलत तरीके के नेटवर्क के माध्यम से बुनियादी सेवाओं तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक समाधान निकालने को विवश करते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “राष्ट्रीय और राज्य सरकारों को सार्वजनिक सेवाओं के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, रिश्वतखोरी और भाई-भतीजावाद से निपटने के लिए निवारक उपायों को लागू करने और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं को जल्दी और प्रभावी ढंग से वितरित करने के लिए उपयोगकर्ता के अनुकूल ऑनलाइन प्लेटफार्मों में निवेश करने की आवश्यकता है।”

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हालांकि भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायतों पर अंकुश लगाना कठिन है, लेकिन भारत में अधिकतर नागरिक (63 फीसदी) मानते हैं कि अगर वे पुलिस के पास भ्रष्टाचार की रिपोर्ट करते हैं तो उन्हें परेशान किया जाएगा या उनसे बदला लिया जाएगा। जारी भ्रष्टाचार का सबसे प्रमुख कारण यही है कि भ्रष्टाचार कि शिकायत करने वाले को उस अधिकारी के रुतबे, हैसियत, पहुँच और नेटवर्क से भय लगता है जिसके खिलाफ वह शिकायत करना चाहता है।

भारत में 89 फीसदी लोगों को लगता है कि सरकारी भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है। 18 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनसे जनप्रतिनिधियों ने वोट के बदले रिश्वत की पेशकश की और 11 प्रतिशत ने यौन संबंध रखने या ऐसा करने वाले किसी व्यक्ति को जानते हैं।

सर्वेक्षण के मुताबिक लगभग 63 प्रतिशत लोगों का मानना है कि भ्रष्टाचार से निपटने में सरकार अच्छा काम कर रही है, जबकि 73 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। कुल मिलाकर यह कह सकते है भ्रष्टाचार मुक्त भारत अभी काफी दूर है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने काफी समय पहले भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा दिया था, जनता को लगा कि अब देश बदलेगा लेकिन आज भी भ्रष्टाचार जारी है। अधिकारियों कि शिकायत के बाद भी उन्हे निलंबित नहीं किया जाता है जबकि उनकी जगह लेने के लिए देश में हजारों लाखों योग्य उम्मीदवार मिल सकते है।

वैसे भ्रष्टाचार के मामले में कुछ समय पहले प्रधानमंत्री कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर जानकारी मांगी गई थी कि 2014 से 2018 तकअनियमितता तथा घोटालो के विषय में, प्रधान मंत्री कार्यालय तथा प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को कुल कितनी शिकायते मिली, कुल कितने मामलो में भ्रष्टाचार तथा घोटालो की जांच हेतु पत्र अग्रेषित किए गए, कितने मामलो में भ्रष्टाचार तथा घोटालो की जांच हेतु शिफारिश की गई, कितने मामलो में भ्रष्टाचार तथा घोटालो की जांच कारवाई गई तथा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी एवं प्रधान मंत्री कार्यालओ कोसीबीआई जांच करवाने हेतु कुल कितने मामलो में शिकायते प्राप्त हुई? सच पूछे तो भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए सबसे अवश्यक्त है की पहले देश में हो रहे भ्रष्टाचार के स्पष्ट आंकड़े जमा किए जाए तभी भ्रष्टाचार मुक्त भारत संभव है।

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उक्त सभी मामलो और सवालों का जवाब यह मिला की, प्रधान मंत्री कार्यालय के जनता प्रभाग के कंप्यूटीकृत रिकार्ड में दर्ज़ पत्रों का विवरण निकालने के लिए, भेजने वाले का नाम, पता तथा दिनांक देना आवश्यक है, इसके अभाव में सूचना निकालना संभव नहीं है, क्योकि रिकॉर्ड व्यक्तिमूलक है ना की विषयमूलक। साफ़ साफ़ शब्दों में कहा जाए तो प्रधान मंत्री कार्यालय का यह कहना है की उनके कार्यालय में, यह जानकारी ही नहीं है की भ्रष्टाचार के मामले में जनता द्वारा कुल कितनी शिकायते आई, कितनी शिकायतों पर कार्यवाही हुई और कितनी शिकायतों पर कार्यवाही बाकी है, प्रधान मंत्री कार्यालय का कहना है की उनके कार्यालय में, विषय के हिसाब से शिकायतों और पत्रों का ब्योरा नहीं रखा जाता। अब यह समझमे नहीं आता कि जिस समस्या का विषयवार ब्योरा ही नहीं रखा जाता है उस समस्या से निजात कैसे मिलेगी?

इसके अलावे एक और जानकारी मांगी गई कि (क) भारत देश तथा राज्यों में एवं संघ प्रदेशों में होने वाले जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन, हड़ताल जैसे मामलों कि जानकारी, प्रधान मंत्री कार्यालय के किस विभाग / खंड / प्रभाग के जिम्मे है? इस बिन्दु के आलवे एक सवाल और किया गया कि (ख) भारत देश तथा राज्यों में एवं संघ प्रदेशों में होने वाले जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन, हड़ताल तथा अन्य सवेदनशील मामलों कि जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रधान मंत्री कार्यालय में क्या व्यवस्था है, क्या सयन्त्र है तथा कितने कर्मचारी है?

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यह जानकारी इस लिए मांगी गई क्यों कि देश कि जनता को जब भी सरकार तक अपनी बात, मांग पहुंचनी होती है तो तो वह जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन, हड़ताल के तहत अपनी बात और मांग पहुँचती है जनता को लगता है कि जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन, हड़ताल कर वह सरकार को बता सकती है कि से क्या चाहिए, लेकिन प्रधान मंत्री कार्यालय से जो जवाब मिला वह जनता कि उम्मीदों पर पानी फेरने वाला साबित हुआ। (क) और (ख) पर प्रधान मंत्री कार्यालय का कहना है कि मांगी गई जानकारी असपष्ट और व्यापक प्रकृति कि है। प्रधान मंत्री कार्यालय से मिले जवाब का यह मतलब निकाला जाए कि जनता द्वारा किए गए जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और हड़ताल कि जानकारी प्रधान मंत्री और प्रधान मंत्री कार्यालय को मिलती ही नहीं? सवाल तो कई है आपके मन में भी होंगे। वैसे सवाल करते रहना चाहिए यह आपको जागरूक बनाता है उत्तर खोजने के लिए अधिकारी, नेता, मीडिया, पत्रकार होना जरूरी नहीं है आम आदमी को भारत के संविधान से सवाल करने कि आजादी दी है अपनी बात रखने कि आजादी दी है इस लिए जब भी समय मिले सवाल करते रहिए, क्यों कि आपके सवाल आप ही कि आने वाली पीढ़ी के भविष में उन्नति और प्रगति कि सीढ़ी साबित होगी। हर कोई NDTV का रविश कुमार नहीं बन सकता क्यों कि उसके लिए भी करोड़ों का तामजाम चाहिए, कॉरपोरेट से करोड़ों के विज्ञापन चाहिए, क्रांति भास्कर एक लम्बे समय से खोजी पत्रकारिता करता आया है और आगे भी वह अपनी खोजी पत्रकारिता जारी रखेगा, आज हमारे संसाधन अन्य बड़े TV चेनलों और समाचार एजेंसियों कि तुलना में कम है है इस लिए हमारी खबरें भी देश के उन हिस्सो और पाठकों तक नहीं पहुँच पाती जो ईमानदार पत्रकारिता पसंद करते है लेकिन हंसिल नहीं कर पा रहे। शेष फिर।