दमण में खेती कि जमीन पर, शराब का लाइसेन्स, फूड लाइसेन्स और जीएसटी रजिस्ट्रेशन कैसे जारी हुआ?

दमण। संघ प्रदेश दमण आबकारी विभाग के अधिकारियों कि कार्यप्रणाली देखकर लगता है उक्त प्रदेश में शराब कारोबारियों कि चांदी होती रही है और जब तक प्रशासन, कुम्भकर्णी निंद्रा में मग्न आबकारी अधिकारियों कि विभाग से पूरी तरह छुट्टी नहीं करती, तब तक अनियमितताओं में कमी कि कामना बेमानी है।

खेर इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में कही भी ऐसा कोई राज्य है, जहां आबकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा किसी को (ऐग्रीकल्चर) खेती कि जमीन पर बार एंड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स जारी किया हो? क्या किसी ने किसी राज्य में अब तक खेती कि जमीन पर, बार एंड रेस्टोरेन्ट को देखा है? तो इन दोनों सवालों का जवाब होगा नहीं। क्यो कि यह तो नामुमकिन है कि कोई खेती कि जमीन पर शराब के कारोबार का व्यवसाय करें, और वह भी विभाग कि स्वीकृति लेकर। लेकिन यह सब दमण में मुमकिन हो चुका है।

दमण में खेती कि जमीन पर एक नहीं बल्कि 3 बार एंड रेस्टोरेन्ट का मामला सामने आया है। जिसमे से पहला है न्यू चीयर्स बार एंड रेस्टोरेन्ट, दूसरा है आमंत्रण बार एंड रेस्टोरेन्ट और तीसरा है अतिथि बार एंड रेस्टोरेन्ट। अब इन तीनों के अलावे दमण में और कितने बार एंड रेस्टोरेन्ट खेती कि जमीन पर चल रहे है यह तो आबकारी आयुक्त को पता करना चाहिए। वैसे खेती कि जमीन पर चल रहे उक्त तीनों बार एंड रेस्टोरेन्ट को लेकर, क्रांति भास्कर ने दिनांक 18-11-2019 को एक प्रमुखता से खबर प्रकाशित कि थी। लेकिन उक्त खबर के बाद जहां एक तरफ जनता अब आबकारी विभाग से तरह तरह के सवाल कर रही है वही दूसरी तरफ आबकारी अधिकारियों अभी भी ऐसे हाथ पर हाथ धरे मुद्रा से बैठे है जैसे कि वह किसी कुम्भकर्णी निंद्रा में मग्न हो। अब आबकारी विभाग के अधिकारियों कि निंद्रा कब खुलेगी? यह सवाल भी फन उठाए है? क्यो कि उक्त तीनों बार एंड रेस्टोरेन्ट पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं देखने को मिली।

  • आबकारी विभाग के अधिकारियों ने कितनी रिश्वत लेकर, खेती कि जमीन पर बार एंड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स जारी किया?
  • किस अधिकारी द्वारा उक्त तीनों बार एंड रेस्टोरेन्ट के लाइसेस जारी किए?

अब कार्यवाही क्यो नहीं हुई यह सवाल तो जनता कर ही रही है साथ ही साथ जनता यह भी जानना चाहती है यह नामुमकिन कैसे मुमकिन हुआ? आबकारी विभाग के अधिकारियों ने कितनी रिश्वत लेकर, इस नामुमकिन को मुमकिन किया? और किस अधिकारी द्वारा उक्त तीनों बार एंड रेस्टोरेन्ट के लाइसेस जारी हुई? इन तीनों सवालों का जवाब तो जांच के बाद ही मिल सकता है लेकिन जांच कब होगी और होगी भी या नहीं यह? इस सवाल का जवाब तो आबकारी आयुक्त को स्वय देना चाहिए। क्यो कि वही इस विभाग के मुख्या है।

  • खेती कि जमीन पर फूड लाइसेन्स कैसे जारी हुआ, जीएसटी रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ?

वैसे बताया जता है कि बार एंड रेस्टोरेन्ट के लाइसेन्स जारी करने कि एक लम्बी प्रक्रिया होती है। जिसमे लाइसेन्स के लिए आवेदन करने वाले से आबकारी विभाग के अधिकारी आवेदन के साथ साथ कई दस्तावेज़ और जनकारियाँ मांगते है। उसके बाद लाइसेन्स जारी करने के पहले आबकारी विभाग के अधिकारी उस स्थल का निरक्षण भी करते है जहां वह लाइसेन्स जारी करने वाले है। उस जमीन पर पार्किंग के लिए जगह है या नहीं, जमीन एन-ए है या नहीं, एसी कई बातों का ध्यान रखा जाता है और उसके बाद बार एंड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स जारी किया जाता है। लेकिन उक्त तीनों बार एंड रेस्टोरेन्ट के लाइसेन्स खेती कि जमीन पर देख कर लगता है कि आबकारी विभाग के अधिकारियों ने उक्त मामले में काफी बड़ा भ्रष्टाचार किया है, अन्यथा छोटी से छोटी कमी का हवाला देकर लाइसेन्स ना देने वाले अधिकारी भला खेती कि जमीन में बिना रिश्वत लिए लाइसेन्स जारी कर दे दे यह बात जनता के लिए हज़म करनी मुश्किल है।

खेर जो हो चुका है उसे आबकारी विभाग के अधिकारी तो बदल नहीं सकते, लेकिन अब मामले में नियमानुसार कार्यवाही कर, यह अवश्य साबित कर सकते है कि यह सब कुछ अंजाने में हुआ और विभाग के किसी अधिकारी ने इस मामले में कोई रिश्वत नहीं ली। और यदि आबकारी विभाग के अधिकारी ऐसा नहीं करते तो उन्हे गिनीज़ बुक में अपने नाम दर्ज करवाने से कोई नहीं रोक सकता, क्यो कि मामला दूध बेचने का नहीं है मामला शराब बेचने का है।

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