SC का निर्देश, कॉरपोरेट धोखाधड़ी मामले की छानबीन कर रहे पत्रकार को दें सुरक्षा

‘नवभारत गोल्ड’ के एक स्टिंग ऑपरेशन की चारों तरफ चर्चा है। दरअसल, ट्रेनों के एसी कोच में गंदी चादरों की सप्लाई के मामले को लेकर यह स्टिंग ऑपरेशन किया गया। चर्चा पत्रकार अभिषेक गौतम के इस सफलतापूर्वक काम को लेकर भी हो रही है, जिस तरह से उन्होंने 45 डिग्री सेल्सियस के तापमान में 6 रात मजदूरी करते हुए इस स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया और सफेद चादरों पर पड़े भ्रष्टाचार के धब्बों के पर्याप्त सबूत जुटाए।

अभिषेक बताते हैं कि  अक्टूबर के पहले और दूसरे हफ्ते में छह रातों तक रोजाना 12 घंटे मैं भी लाउंडरेड्स कंपनी में काम करने वाले मजदूरों के साथ जुटा रहा, ताकि रेलवे के एसी कोच में गंदी चादरों की सप्लाई का सच सामने लाया जा सके। अभिषेक बताते हैं कि इस स्टिंग ऑपरेशन की जरूरत तब महसूस हुई, जब सितंबर में राजधानी और दिल्ली-लखनऊ एसी स्पेशल समेत कई ट्रेनों के यात्रियों ने गंदी चादरों के बारे में ट्विटर पर लगातार शिकायतें कीं।

उन्होंने बताया कि लॉन्ड्री के अंदर पान-गुटखा और सिगरेट पीना मना है, लेकिन यहां काम करने वाले मजदूर चोरी छिपे अंदर गुटखा और तंबाकू ले जाते है। वे सीसीटीवी कैमरों से छिपाकर गुटखा और तंबाकू खाते हैं और पास पड़ी हुई चादर पर थूकते हैं। कुछ मजदूर चादर से नाक पोछते और और लंच के समय उस पर सोते भी हैं। इन चादरों को भी बाद में प्रेस करके पैक कर दिया जाता है। लॉन्ड्री के अंदर जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन उनमें से कितने कैमरे रात में बंद रहते हैं और कितने चलते हैं, यह बता पाना मुश्किल है।

अभिषेक बताते हैं कि  3, 4, 5, 6, 8 और 10 अक्टूबर को काम किया। वहां काम करने वालों से बातचीत में पता चला कि ट्रेन से गंदी चादरों के बंडल सीधे वहां लाए जाते हैं। जो बहुत गंदी चादरें होती हैं, उनकी मशीन से धुलाई कर उन्हें प्रेस किया जाता है। बाकियों को बिना धुले प्रेस कर देते हैं। रोज रात में करीब 6 ट्रक माल वहां से भेजा जाता है। कर्मचारियों का कहना था कि दिन में भी इतना ही माल भेजा जाता होगा। उनके मुताबिक, एक चादर की धुलाई की कीमत 7 रुपए है और एक ट्रक में करीब 3 लाख रुपए का माल होता है। रात में करीब 3-4 ट्रक वहां से दिल्ली भेजे जाते हैं।

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नवभारत के स्टिंग के बाद रेलवे के जिम्मेदार अफसरों की नींद अब टूटने लगी है। नवभारत के मुताबिक, रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि स्टिंग से मिली जानकारियों की तस्दीक करने के लिए उनकी टीम नोएडा की लाउंडरेड्स कंपनी में गई। उन्हें वहां लगे सीसीटीवी कैमरे खराब मिले। इसका जिक्र स्टिंग वाली रिपोर्ट में भी किया गया था। इस बारे में  नवभारत ने रेलवे के सीपीआरओ दीपक कुमार से भी बात की। उन्होंने बताया कि कि इस मामले में एक जांच कमिटी बनाई गई है, उसकी रिपोर्ट के आने के बाद ही वह कुछ कहेंगे।

वहीं, अभिषेक गौतम के काम की तारीफ करते हुए ‘नवभारत टाइम्स’ के दिल्ली के रेजिडेंट एडिटर सुधीर मिश्रा लिखते हैं, ‘रेलवे के ठेके लेने वाली विशालकाय लॉन्ड्री में छह दिन तक पैंतालिस डिग्री में जिस्म तपा कर सच निकालने वाले अभिषेक गौतम की देश भर में चर्चा हो रही है। खासतौर पर मीडिया हाउसेज में। सोशल मीडिया पर देश के बड़े बड़े संपादकों, अफसरों, नेताओं, पत्रकारों और आम लोगों ने नवभारत गोल्ड के स्टिंग ऑपरेशन को साझा किया और सराहना की। इससे यह समझ आना चाहिए कि जब लोग मीडिया और पत्रकारों के बारे में तरह-तरह की नकारात्मक उपमाओं, अपशब्दों और आलोचनाओं से हमलावर होते हैं तो यह उनकी पत्रकारिता से नाराजगी नहीं होती। यह उनकी विवशता और गुस्सा है क्योंकि उन्हें अपने टीवी चैनलों और दूसरे मीडिया माध्यमों से वह नहीं मिलता, जिसकी उन्हें जरूरत है। हर तरह की खबर पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं को चाहिए होती है, लेकिन सबसे ज्यादा उसकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हुई।

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बता दें कि पत्रकार अभिषेक गौतम नवभारत टाइम्स के लिए दिल्ली में क्राइम बीट देखते हैं। उन्होंने एनसीआर और लखनऊ में स्वास्थ्य व नगर निगम की बीट पर काम किया है। उन्होंने भिखारियों की जिंदगी पर एक स्टिंग किया था, जिसमें वह खुद भिखारी बनकर एक हफ्ते तक लखनऊ की सड़कों पर घूमे थे। इस स्टोरी के लिए उन्हें साल 2018 के कर्पूर चंद्र कुलिश इंटरनेशनल अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म से सम्मानित भी किया गया था।

साढ़े 6 करोड़ लेकर लाखों चादरें बिना धुले भेजी
लाउंडरेड्स कंपनी ने रेलवे से आधिकारिक तौर पर चादर धुलाई के नाम पर बीते छह महीने 6 करोड़ रुपये ले लिए, लेकिन जब चादर धोने की बात आई तो लाखों चादरें बिना धुले ही भेज दी। यात्रियों ने रेलवे पर भरोसा कर बेफिक्र होकर इन्हें ओढ़ भी लिया। इसी तरह तौलिया, तकिया और कंबल धोने में अनियमितता बरती गई। मामला नवभारत गोल्ड में छपने के बाद अफसरों ने जांच शुरू करा दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाया जाता है या नहीं।

कंपनी के ओनर ने नहीं मानी गलती
चादरों की धुलाई वाला स्टिंग छपने के बाद हमने लाउंडरेड्स कंपनी के ओनर निरूपम मल्होत्रा से भी बात की। लेकिन, उन्होंने यह मानने से इनकार कर दिया कि उनकी लॉन्ड्री में चादरों को बिना धुले भेजा जाता है। निरूपम का कहना है कि वह यह काम लंबे वक्त से कर रहे हैं और कंपनी में सभी चादरें धोईं जाती हैं।

फिर कैसे सुधरेगा सिस्टम?
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि अफसर और ठेकेदार की मिलीभगत से धुलाई में गड़बड़ी का खेल करीब एक दशक से चल रहा है। इतना ही नहीं, कोच अटेंडेंट भी गंदी चादरें खपाने के लिए मजबूर किए जाते हैं। कई बार तो यात्री गंदी चादर मिलने पर भड़क जाते हैं, तो कोच अटेंडेंट को अपनी गलती मानकर माफी मांगनी पड़ती है।