सोशल मीडिया पर प्रचार का हिसाब लेगा चुनाव आयोग, भूल कर भी ना करे ये गलतियां

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मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा कहा कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इस दौरान किसी भी राजनीतिक पार्टियों के विज्ञापन पोस्ट करने से पहले जानकारी देनी होगी। बिना परमीशन के कोई भी दल सोशल मीडिया पर प्रचार नहीं कर पाएगा। गूगल और फेसबुक को इलेक्शन कमीशन ने ऐसे विज्ञापनदाताओं की पहचान करने के लिए कहा है।

इतना ही नही्ं फेक न्यूज और हेट स्पीच पर भी चुनाव आयोग की नजर रहेगी। आयोग ने इसे निंयत्रित करने के लिए सभी सोशल मीडिया प्लेटपफॉर्म्स को अधिकारी नियुक्त करने के लिए कहा गया है। चुनाव आयोग ने आम जनता और राजनीतिक दलों के लिए कुछ ऐप्स और डिजिटल पोर्टल्स तैयार करवाए हैं। ऐसा ही एके वेब पोर्टल ‘समाधान’ आम जनता के लिए होगा। इस पर आम लोग चुनाव से संबंधित फीडबैक दे सकत हैं। नियमानुसार उम्मीदवारों को अपना नामांकन दाखिल करते समय ही अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स का विवरण प्रस्तुत करना होगा।

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मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि मीडिया में पेड न्यूज और फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने के लिये राज्य एवं जिला स्तर पर मीडिया निगरानी समितियों की भी मदद ली जाएगी।

चुनावी खर्च में बताना होगा- सोशल मीडिया कैंपेनिंग पर कितना खर्च किया गया?

  • कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार अपने प्रचार के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सेना तथा सेना के किसी भी जवान या अधिकारी के फोटो का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
  • राजनीतिक दल या उम्मीदवार ऐसा कोई भी कंटेट पोस्ट नहीं कर सकते जो चुनाव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा डाले या देश में शांति, सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करे।
  • राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को अब अपने चुनावी प्रचार-प्रसार के खर्चों के विवरण में सोशल मीडिया पर किए जाने वाले विज्ञापन और प्रचार के खर्च के साथ इंटरनेट प्रदाता कंपनी को दिए गए पैसे, किसी वेबसाइट पर दिए गए विज्ञापन और पार्टी के लिए कंटेट बनाने वाली टीम की सैलेरी भी शामिल करनी होगी।
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सोशल मीडिया पर यह है अपराध

  • धर्म और जाति को लेकर की जाने वाली टिप्पणी।
  • भय व्याप्त करने वाले या अफवाह फैलाने वाली पोस्ट डालना।
  • सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और भ्रामक संदेश फैलाना।
  • बिना पुष्टि के गलत, भ्रामक संदेश पोस्ट करना।
  • झूठी पोस्ट के जरिये किसी को अपराध के लिए उकसाना।
  • चुनाव के समय में किसी दल अथवा व्यक्ति का प्रचार करना।
  • झूठे संदेश बनाकर उन्हें प्रसारित करना।