वापी में जमीन का भाव आया जमीन पर, मात्र 298 रुपये प्रति स्क्वेयर फुट के हिसाब से बिकी जमीन।

VAPI । वापी में जमीन के भाव अब आसमान से उतर-कर धीरे धीरे नहीं बल्कि तेजी से जमीन की और आ रहे है। वापी चला रोड पर फॉर्च्यून स्क्वेयर के पीछे बनने वाले प्रोजेक्ट The Park की जमीन के दस्तावेज़ देखकर तो यही लगता है। The Park  की जमीन का क्षेत्रफल दस्तावेज़ के अनुसार 401967 स्क्वेयर फिट बताया जाता है और उक्त जमीन वर्ष 2018 में The Park के बिल्डर अमित अग्रवाल ने 12 करोड़ में ख़रीदी, अब इस हिसाब से उक्त जमीन की कीमत प्रति स्क्वेयर फिट 298 रुपये होती है।

जबकि इसी क्षेत्र कि एक और जमीन के दस्तावेज़ भी क्रांति भास्कर को मिले है जो कि वर्ष 2012 के है और उक्त दस्तावेज़ 655 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट के हिसाब से किए गए है। अब वाजिब सी बात है वर्ष 2012 से 2018 में जमीन कि कीमत बढ़नी चाहिए थी, लेकिन उक्त दोनों दस्तावेजों को देखकर लगता है कि जमीन के भाव अब तेजी से बढ्ने कि बजाय गठ रहे है और यह ख़बर निवेशकों के लिए अच्छी नहीं।

वापी में यदि इसी तरह जमीन के भाव तेजी से कम होते रहे तो निवेशकों को आने वाले समय में भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। निवेशक निवेश करने से परहेज कर सकते है। खेर इस पूरे मामले की हकीकत क्या है और क्या जितनी रकम के दस्तावेज़ बनाए गए है जितनी स्टेंप ड्यूटी अदा की गई है क्या उतनी रकम में ही जमीन की खरीद-बिक्री हुई या फिर The Park के बिल्डर ने भी सरकार और आयकर को चुना लगाने के लिए, खरीद बिक्री में काले धन का लेन-देन किया है? सच क्या है इसके लिए तो आयकर अधकरियों को जांच करने की जरूरत है लेकिन The Park प्रोजेक्ट की जमीन में काले-धन कि लेन-देन नहीं की गई और वाकई जमीन इतने कम दामों में बिकी, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि वापी में स्थित इमारतों में फ्लेट और दुकान में निवेश करने वालों को आने वाले समय में नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्यो कि यदि ज़मीनों के दाम कम हुए तो फ्लेट और दुकानों के दाम भी कम होंगे। वैसे इस एक मामले के अलावे क्रांति भास्कर को और भी दर्जनों बिल्डरों अलग अलग प्रोजेक्टो के दस्तावेज़ मिले है दस्तावेजों में काफी चौकाने वाली जांकारिया और आंकड़े है। लेकिन उन दस्तावेजों कि सत्यता पर, क्रांति भास्कर कि पड़ताल फिलवक्त जारी है। क्रांति भास्कर दस्तावेजों कि पड़ताल कर जल्द उन सभी मामलों को भी सरकार और जनता के सामने रखेगी, जिससे टैक्स चोरी पर लगाम लग सके। शेष फिर।

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